
क्राइम इंडिया टीवी डिजिटल डेस्क जयपुर
जयपुर भारत में चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल जारी है। बीते कुछ हफ्तों से जिस तेजी के साथ चांदी ने छलांग लगाई है, उसने निवेशकों और आम उपभोक्ताओं दोनों को हैरान कर दिया है। अब स्थिति यह है कि देश के कुछ प्रमुख शहरों में चांदी का भाव ₹2 लाख प्रति किलो के पार पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बढ़ोतरी अभी थमने वाली नहीं है, और आने वाले दिनों में यह धातु 2.10 लाख रुपये प्रति किलो तक जा सकती है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, देशभर में चांदी की कीमतें तेजी से ऊपर जा रही हैं। वर्तमान में प्रमुख शहरों में स्थिति इस प्रकार है
चेन्नई: ₹2,07,000 प्रति किलो
हैदराबाद: ₹2,07,000 प्रति किलो
बेंगलुरु: ₹1,93,700 प्रति किलो
दिल्ली: ₹1,90,000 प्रति किलो
मुंबई: ₹1,90,000 प्रति किलो चेन्नई और हैदराबाद में तो चांदी ने ₹2 लाख का आंकड़ा पार कर इतिहास रच दिया है। वहीं उत्तर भारत के बाजारों दिल्ली, जयपुर, लखनऊ और चंडीगढ़ में — दाम 1.90 लाख के आसपास स्थिर हैं, लेकिन हर दिन बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है।
1. अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग में उछाल: वैश्विक स्तर पर औद्योगिक उपयोग और निवेश की मांग दोनों में वृद्धि हुई है। 2. डॉलर में कमजोरी: डॉलर के कमजोर होने से चांदी और सोने जैसे कीमती धातुओं में निवेश बढ़ा है। 3. जियोपॉलिटिकल तनाव: इज़रायल-हमास संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश साधनों की ओर बढ़ा है। 4. इलेक्ट्रॉनिक और सोलर सेक्टर की मांग: चांदी का इस्तेमाल सौर पैनल और चिप मैन्युफैक्चरिंग में तेजी से बढ़ा है। 5. कम उत्पादन और सीमित आपूर्ति: दुनिया भर में खदानों से उत्पादन घटा है, जबकि मांग तेजी से बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का अनुमान: 2.25 लाख तक जा सकता है भाव- कमोडिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस साल के अंत तक चांदी 2.10 से 2.25 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर को छू सकती है। एमके ग्लोबल फाइनेंस के विश्लेषक अमित राठी कहते हैं
चांदी अब सिर्फ आभूषणों या बर्तनों तक सीमित नहीं रही। औद्योगिक उपयोग बढ़ने से यह निवेश का प्रमुख माध्यम बन गई है। यदि वर्तमान गति बनी रही तो अगले तीन महीनों में 10% से अधिक की बढ़ोतरी संभव है।”
पहला वर्ग इसे निवेश का स्वर्ण अवसर मान रहा है और भारी मात्रा में खरीदारी कर रहा है। दूसरा वर्ग सतर्क है और मानता है कि यह उछाल अस्थायी हो सकता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में किसी भी समय सुधार देखने को मिल सकता है।
बैंकिंग और निवेश सलाहकारों का कहना है कि छोटे निवेशक अगर लंबी अवधि के लिए सोच रहे हैं तो चांदी अब भी आकर्षक विकल्प है, क्योंकि आने वाले वर्षों में औद्योगिक उपयोग में इसकी भूमिका और बढ़ने वाली है।
आभूषण बाजारों में भी चांदी की कीमतों ने उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर डाला है।चांदी के बर्तन, सिक्के, और धार्मिक उपयोग की वस्तुओं की बिक्री में लगभग 25–30% की गिरावट आई है।शादी और त्योहारी सीज़न में जहां पहले लोग चांदी के गिफ्ट देना पसंद करते थे, वहीं अब अधिकांश खरीदार सोने की ओर या हल्की ज्वेलरी की ओर झुक रहे हैं।
इतनी तेज़ी हमने 20 साल के करियर में बहुत कम देखी है। हर दिन भाव बदलते हैं। ग्राहक पूछते हैं, ‘थोड़ा इंतजार करें क्या?’ लेकिन अगले दिन कीमत और ऊपर चली जाती है।”
लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) में भी चांदी के दामों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। पिछले महीने जहां प्रति औंस कीमत 24 डॉलर थी, वहीं अब यह 29 डॉलर के पार जा चुकी है। इस रफ्तार से चलते हुए, वैश्विक बाजार में भी 30 डॉलर प्रति औंस का स्तर टूट सकता है, जो 2013 के बाद पहली बार होगा।
सोलर एनर्जी कंपनियां और इलेक्ट्रॉनिक चिप निर्माता सबसे बड़े उपभोक्ता बनकर उभरे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में विश्व स्तर पर चांदी की मांग 1.2 अरब औंस तक पहुंची, जबकि आपूर्ति केवल 1.05 अरब औंस रही। यह अंतर ही कीमतों के उछाल का मुख्य कारण बना।
कमोडिटी एक्सचेंज MCX पर भी चांदी में निरंतर तेजी बनी हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि डॉलर इंडेक्स 105 के नीचे बना रहता है और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहीं, तो चांदी में 10-12% तक और उछाल संभव है।
चांदी की यह रफ्तार फिलहाल थमती नहीं दिख रही। जिन निवेशकों ने कुछ महीने पहले खरीदारी की थी, वे आज शानदार मुनाफे में हैं। वहीं, नए निवेशक अब सही समय का इंतजार कर रहे हैं।
भारत जैसे देश में, जहां चांदी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व गहराई से जुड़ा है, उसकी कीमतों में यह उछाल न सिर्फ आर्थिक खबर है, बल्कि आम आदमी के घर की चिंता का विषय भी बन चुकी है।आने वाले महीनों में इसका जवाब बाजार खुद देगा, लेकिन फिलहाल हर नजर चांदी के चमकते बाजार पर टिकी हैं।



