30 हज़ार करोड़ की जंग… करिश्मा की बेटी ने लगाया गंभीर आरोप।
वसीयत बदलने पर बवाल, समायरा बोली,हमारा हक छीना गया।

- ऐसे मुद्दे कोर्ट में दोबारा नहीं आने चाहिए… करिश्मा कपूर की बेटी को जज ने लगाई फटकार।
क्राइम इंडिया टीवी डिजिटल डेस्क। मनोज कुमार सोनी।
नई दिल्ली| दिवंगत संजय कपूर की लगभग ₹ 30,000 करोड़ की संपत्ति को लेकर कपूर परिवार में तनातनी चल रही है। इस बीच नया मोड़ तब आया जब करिश्मा की बेटी समायरा कपूर ने अदालत में कहा कि उनकी यूनिवर्सिटी की फीस दो महीने से नहीं भरी गई है। इस पर अदालत ने तुरंत सख्त फटकार लगाई और कहा “ऐसे मुद्दे कोर्ट में दोबारा नहीं आने चाहिए।”
मामले की पृष्ठभूमि यह है कि संजय कपूर के निधन के बाद उनकी वसीयत, संपत्ति वितरण एवं परिवार के भीतर अधिकारों को लेकर बहस चल रही है। करिश्मा कपूर के दो बच्चे-समायरा और कियान कपूर ने अपनी सौतेली माँ प्रिया कपूर पर आरोप लगाए हैं कि उन्होंने संजय की वसीयत में छेड़छाड़ की है, और बच्चों का नाम व हिस्सेदारी वसीयत में शामिल नहीं है।
सुनवाई में क्या हुआ समायरा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने अदालत में दावा किया कि उनकी फीस दो महीने से बकाया है, क्योंकि उनके पिता ने शादी-सम्बंधी आदेश (मेट्रिमोनियल डिक्री) के अंतर्गत बच्चों के शैक्षणिक एवं पालन-पोषण खर्चों की ज़िम्मेदारी ली थी, और वर्तमान में संपत्ति जो कंट्रोल में है वह प्रिया कपूर के अधीन है।
प्रिया कपूर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नायर ने कहा कि यह दावा “बेबुनियाद” है, बच्चों से जुड़े सारे खर्च पहले ही चुकाए जा चुके हैं, और इस तरह की बातें अदालत में इसलिए उठाई जा रही हैं ताकि मीडिया में सुर्खियाँ बटोर सकें।
जज की टिप्पणी अदालत की न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने इस पूरे सीन सुनने के बाद कहा: “मैं इस तरह की बात पर 30 सेकेंड से ज़्यादा समय नहीं लगाऊँगा… ऐसी बातें मेरे सामने दोबारा नहीं आनी चाहिए।” उन्होंने चेतावनी दी कि कोर्ट किसी तरह का ड्रामाटिक नैरेटिव बर्दाश्त नहीं करेगी।
वसीयत-और-हिस्सेदारी का विवाद समायरा और कियान ने अपनी माँ करिश्मा कपूर की ओर से यह दावा किया है कि वसीयत में उनका नाम शामिल नहीं है, जबकि उन्होंने अपने पिता से बचपन में यह आश्वासन हासिल किया था कि उनकी संपत्ति में हिस्सेदारी होगी। इसके चलते उन्होंने अदालत में संपत्ति बेचने या एलियन करने पर रोक लगाने की भी याचिका दायर की है।
मामला क्यों बढ़ गया है संजय कपूर की संपत्ति का दायरा बहुत बड़ा माना जा रहा है, लगभग ₹ 30,000 करोड़। बच्चों की पढ़-लिखाई, यूनिवर्सिटी फीस, अन्य खर्चे अदालत के सामने आए हैं। जो इस विवाद को सिर्फ वसीयत-विरासत का मामला नहीं बल्कि पारिवारिक और सामाजिक मुद्दे में बदल रहा है।
मीडिया और सार्वजनिक नजर में यह केस इसलिए भी आया है क्योंकि इसमें बिंदु-बिंदु पर आरोप-प्रत्यारोप हो रहे हैं, व कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि “मीडिया शो” नहीं चलेगा।
सामाजिक और कानूनी असर बड़े परिसंपत्ति वाले मामलों में वसीयत की वैधता, पारिवारिक हिस्सेदारी, सौतेले माता-पिता एवं बच्चों के अधिकार जैसे मुद्दे सामने आ रहे हैं। कोर्ट का रुख स्पष्ट है कि निजी विवादों को मीडिया-मंच या ड्रामाटिक रूप से नहीं चलाना चाहिए न्याय व्यवस्था में अनुशासन होना चाहिए।
इस मामले से एक उदाहरण बनता है कि कितने संवेदनशील तरीके से पारिवारिक संपत्ति विवाद से बच्चों-शिक्षा-भविष्य जैसे पक्ष निकल आते हैं। यदि फैसला ऐसा हुआ कि वसीयत फर्जी पाई गई या बच्चों का हक तय हुआ, तो ऐसे “उत्कृष्ट” संपत्ति विवादों में न्यायिक दृष्टिकोण बदल सकता है।
आगे क्या होगा इस मामले की अगली सुनवाई तय है, जिसमें मध्यवर्ती रोक लगाने (इंटरिम इनजंक्शन) और संपत्ति का नियंत्रण कौन-के हाथ में रहेगा, वह देखा जाएगा।
अदालत ने दोनों पक्षों को यह संकेत दिया है कि आगे ऐसे “लूज़ स्ट्रिंग्स” लेकर आने से बचें — संपत्ति विवाद के बहाने पढाई-फीस-खर्च आदि को उठाना कोर्ट को पसंद नहीं है।मीडिया तथा सार्वजनिक टिप्पणी के प्रभाव को लेकर भी न्यायालय ने सतर्कता दिखाई है।



