माओवादी मुठभेड़ में वीरगति को प्राप्त हुए जवान आशीष शर्मा

माओवाद विरोधी अभियान में शहीद हुए साहसी योद्धा आशीष शर्मा
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के घने जंगलों में चला माओवादी विरोधी अभियान एक बार फिर खामोश हो गया, लेकिन इस बार इसकी कीमत देश ने एक बहादुर अधिकारी की शहादत के रूप में चुकाई। बालाघाट के हॉकफोर्स निरीक्षक आशीष शर्मा ने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उनका बलिदान सिर्फ एक सैनिक की मौत नहीं, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए दिया गया सर्वोच्च योगदान है।
संयुक्त तलाशी अभियान में अचानक हुई गोलीबारी
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के सुरक्षा बलों ने माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया था। बीती रात करीब दो से चार बजे के बीच जंगलों में अचानक माओवादियों ने सुरक्षाबलों पर गोलीबारी शुरू कर दी। इस हमले में निरीक्षक आशीष शर्मा गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके साथी जवानों ने तुरंत उन्हें डोंगरगढ़ के अस्पताल पहुंचाया, लेकिन सुबह सात से आठ बजे के बीच उन्होंने अंतिम सांस ली।
वीरता की मिसाल थे आशीष शर्मा
बलिदानी आशीष शर्मा सिर्फ एक अधिकारी नहीं, बल्कि हौसले और समर्पण की जीवंत मिसाल थे। 14 जून 2025 को बालाघाट के कटेझिरिया जंगल में हुए एक बड़े ऑपरेशन में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी, जिसमें तीन महिला समेत चार माओवादी ढेर किए गए थे। इस अभियान में उनकी वीरता देखकर उन्हें हाल ही में क्रमोन्नति (बैच से पूर्व पदोन्नति) दी गई थी।
परिवार और क्षेत्र में शोक की लहर
उनकी शहादत की सूचना जैसे ही उनके गृह जिले बालाघाट पहुंची, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। किरनापुर और उसके आसपास के गांवों में लोगों ने उन्हें अपने क्षेत्र का गर्व बताते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि दी। परिवार ने कहा — “हमें गर्व है कि आशीष ने देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया।”
सम्मान और अभियान तेज
शहादत के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है। माओवादियों की तलाश में डॉक, जंगलों और पहाड़ी इलाकों की घेराबंदी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि आशीष शर्मा के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा।



