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उपचुनाव से पहले कांग्रेस में बम फटा, नरेश मीणा 6 साल के लिए बेदखल,सियासत में मचा भूचाल, खड़गे ने खुद दी मंजूरी।

राजस्थान कांग्रेस में हड़कंप,प्रभावशाली मीणा नेता पर पार्टी ने गिराई गाज, उपचुनाव में बढ़ेगी सियासी गर्मी

हाइलाइट्स

अनुशासन पर खड़गे का प्रहार!’ — राजस्थान कांग्रेस में मचा हड़कंप, मीणा को दिखाया बाहर का रास्ता!
दिल्ली से आया फरमान — बगावत का जवाब निष्कासन से, खड़गे ने खींची सियासी लकीर!
राजनीति में गर्मी बढ़ी — मीणा का निष्कासन बना बड़ा इलेक्शन फैक्टर, कांग्रेस में उठे अंदरूनी सवाल!

 

विशेष रिपोर्ट, क्राइम इंडिया टीवी डिजिटल नेटवर्क। जयपुर/नई दिल्ली।  राजस्थान की राजनीति में शुक्रवार को एक बड़ी और चौंकाने वाली घटना सामने आई। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने बारां जिले के वरिष्ठ कांग्रेस नेता श्री नरेश मीणा को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने यह कार्रवाई तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए। AICC के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज़ के अनुसार, नरेश मीणा को “विधानसभा उपचुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल पाए जाने” के चलते बाहर का रास्ता दिखाया गया है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान ने पिछले कई दिनों से राजस्थान के कुछ जिलों में “आंतरिक असंतोष” और “बगावती तेवरों” पर निगाह रखी हुई थी।

बताया जा रहा है कि बारां जिले में उपचुनाव की प्रक्रिया के दौरान नरेश मीणा पर पार्टी उम्मीदवारों के खिलाफ काम करने, स्थानीय स्तर पर अनुशासन तोड़ने और विपक्ष को अप्रत्यक्ष समर्थन देने के आरोप लगे थे। इन आरोपों की जानकारी सीधे जयपुर से दिल्ली तक पहुंची और अंततः पार्टी हाईकमान ने जांच रिपोर्ट के आधार पर यह निर्णय लिया।

राजस्थान के बारां जिले से कांग्रेस नेता नरेश मीणा को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है। यह कार्रवाई कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने की है। पार्टी की प्रेस रिलीज़ के अनुसार, नरेश मीणा को उपचुनाव प्रक्रिया के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल पाए जाने के बाद तत्काल प्रभाव से निष्कासित किया गया। गौरतलब है कि नरेश मीणा ने हाल ही में अंता विधानसभा उपचुनाव से अपनी उम्मीदवारी की घोषणा की थी। कांग्रेस ने यहां से पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया को उम्मीदवार घोषित किया है।

खड़गे ने कहा “अनुशासन से कोई ऊपर नहीं – AICC सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्पष्ट कहा कि “पार्टी के अनुशासन से बड़ा कोई नहीं है। अगर कोई नेता व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा में संगठन की जड़ों को नुकसान पहुंचाता है, तो कार्रवाई तय है। उन्होंने राज्य इकाई को भी संकेत दिया है कि आने वाले उपचुनाव और 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले अनुशासनहीनता पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी।

प्रदेश कांग्रेस में मचा हड़कंप – राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (RPCC) के भीतर नरेश मीणा की निष्कासन की खबर से सियासी हलचल तेज हो गई है। कई स्थानीय नेताओं का कहना है कि पार्टी ने जो कदम उठाया है, वह आने वाले दिनों में “संदेश देने वाली कार्रवाई” साबित हो सकती है। बारां जिले के कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भी इस फैसले को लेकर चर्चा का माहौल है। कुछ इसे “पार्टी अनुशासन की जीत” बता रहे हैं, तो कुछ इसे “स्थानीय गुटबाजी की परिणति” मान रहे हैं।

राजनीतिक में नरेश मीणा का नाम मीणा समुदाय के प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है। वे लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े रहे हैं और जिले के कई ब्लॉकों में पार्टी संगठन की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।कांग्रेस में उन्हें जमीनी स्तर पर सक्रिय और सशक्त संगठनकर्ता माना जाता था। हालांकि पिछले कुछ महीनों से उनके राज्य नेतृत्व से मतभेद की खबरें लगातार आ रही थीं।

उपचुनाव की पृष्ठभूमि में बड़ा संकेत- राजस्थान में चल रहे विधानसभा उपचुनाव की प्रक्रिया के बीच कांग्रेस का यह कदम राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। पार्टी नहीं चाहती कि किसी भी प्रकार की अंदरूनी कलह या असंतोष से चुनावी छवि प्रभावित हो। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह फैसला कांग्रेस हाईकमान का एक “संदेश देने वाला मूव” है  जो अन्य असंतुष्ट नेताओं के लिए चेतावनी का काम करेगा।

भाजपा की नजरें भी टिक गईं इस घटनाक्रम के बाद भाजपा खेमे में भी हलचल बढ़ गई है। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी अब यह देखने में जुट गई है कि नरेश मीणा का अगला कदम क्या होगा क्या वे किसी नई पार्टी से जुड़ेंगे या स्वतंत्र रूप से चुनावी मैदान में उतरेंगे? पिछले कुछ वर्षों में देखा गया है कि कांग्रेस से निष्कासित कई नेताओं ने या तो निर्दलीय लड़ाई लड़ी है या फिर भाजपा में शामिल होकर सत्तारूढ़ दल को फायदा पहुंचाया है।

स्थानीय राजनीति पर असर बारां, झालावाड़ और कोटा बेल्ट में मीणा समुदाय की निर्णायक भूमिका है। नरेश मीणा का निष्कासन यहां के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि अगर मीणा कांग्रेस के खिलाफ खुलकर बयानबाजी करते हैं या किसी विरोधी उम्मीदवार का समर्थन करते हैं, तो यह कांग्रेस के लिए उपचुनाव में नुकसानदेह साबित हो सकता है।

हाल ही में कांग्रेस ने राजस्थान में संगठनात्मक फेरबदल की प्रक्रिया शुरू की है। प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को भी साफ निर्देश मिले हैं कि पार्टी के “असंतोषी गुटों” की पहचान कर कार्रवाई की जाए। नरेश मीणा का निष्कासन उसी अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है। इससे पहले भी कांग्रेस ने कई जिलों में “वोट कटवा” और “पार्टी लाइन से हटकर प्रचार” करने वालों को नोटिस जारी किए थे।

 

AICC की तरफ से जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज़ में स्पष्ट लिखा गया है कि

यह दस्तावेज़ K.C. Venugopal, महासचिव AICC द्वारा 10 अक्टूबर 2025 को जारी किया है।

राजनीतिक विश्लेषक डॉ. एन.के. शर्मा का कहना है यह निर्णय कांग्रेस के भीतर अनुशासन और केंद्रीकृत नियंत्रण को फिर से स्थापित करने का प्रयास है। पार्टी अब पुराने ढर्रे से निकलकर सख्ती की नीति अपना रही है, ताकि आने वाले चुनावों में गुटबाजी खत्म हो सके।”विश्वशनीय सूत्रों का भी मानना है कि राजस्थान कांग्रेस अब एकजुटता की छवि पेश करना चाहती है, ताकि भाजपा के मजबूत संगठन के मुकाबले वह बेहतर स्थिति में दिखाई दे।

इस खबर के प्रकाशन तक नरेश मीणा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि उनके करीबी समर्थकों का कहना है कि “यह फैसला जल्दबाजी में लिया गया है और वास्तविकता से दूर है। संभव है कि आने वाले दिनों में नरेश मीणा खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष रखें।

राजस्थान की सियासत इस वक्त बेहद संवेदनशील दौर में है। कांग्रेस जहां अनुशासन पर जोर दे रही है, वहीं जमीनी स्तर पर कई नेता “नाराज लेकिन सक्रिय” दिखाई दे रहे हैं। नरेश मीणा का निष्कासन आने वाले उपचुनावों में कांग्रेस के लिए या तो सुधार का संकेत बनेगा, या चुनौती का आगाज। राजनीतिक हलकों में अब नजरें इस पर हैं कि क्या यह कार्रवाई संगठन को मजबूत करेगी या नया बिखराव पैदा करेगी।

 

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