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सिकंदरा में बड़ा हादसा टला: शीतला माता मंदिर के पास बिजली का पोल गिरा।

दीपावली से पहले मेंटेनेंस के नाम पर लाखों खर्च, लेकिन हादसे नहीं रुक रहे सवालों के घेरे में विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली।

  • मेंटेनेंस के नाम पर जनता का पैसा तो खर्च होता है, लेकिन सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती।

क्राइम इंडिया टीवी डिजिटल डेस्क जयपुर – दौसा जिले के सिकंदरा कस्बे में शुक्रवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। शीतला माता मंदिर के समीप लगे पुराने बिजली पोल के अचानक गिर जाने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। यह हादसा सुबह करीब 5 बजे हुआ, जब अधिकांश लोग सो रहे थे। पोल मकान के बिलकुल पास आकर गिरा, लेकिन गनीमत रही कि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यह पोल नाली में लगा हुआ था। लगातार बहते पानी से इसकी नींव कमजोर हो चुकी थी। कई बार स्थानीय लोगों ने विद्युत विभाग को इस पोल की जर्जर स्थिति के बारे में सूचना दी थी, लेकिन विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। परिणामस्वरूप आज यह हादसा होते-होते टल गया, जो भविष्य में किसी बड़ी त्रासदी का रूप ले सकता था।

सिकंदरा में बिजली पोल गिरने की घटना ने एक और बड़ी सच्चाई उजागर की है त्योहारों से पहले मेंटेनेंस के नाम पर विभाग हर साल लाखों रुपये खर्च करता है, लेकिन जमीनी हालात में सुधार नहीं होता। दीपावली नज़दीक है, और उसी बहाने विभाग ने हाल ही में पूरे इलाके में मेंटेनेंस ड्राइव चलाने का दावा किया था। लेकिन शुक्रवार सुबह शीतला माता मंदिर के पास बंदरों के हिलाने से गिरा पोल उस पूरे दावे पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।

ग्रामीणों ने खुलकर कहा कि “मेंटेनेंस” का मतलब सिर्फ कागज़ पर टिक मार्क करना बन गया है। वास्तव में कोई मरम्मत नहीं होती, सिर्फ फोटो खिंचवाकर रिपोर्ट भेज दी जाती है। मंदिर क्षेत्र सहित पूरे सिकंदरा कस्बे में ऐसे कई बिजली पोल हैं जो किसी भी वक्त गिर सकते हैं।

स्थानीय निवासी बताते है “हर साल दीपावली से पहले बिजली विभाग के कर्मचारी आते हैं, एक-दो जगह पर दिखावा करके चले जाते हैं। नाली में धंसे पोल वैसे ही पड़े रहते हैं। काम तो बस ठेकेदार की रिपोर्ट में होता है, हकीकत में कुछ नहीं। लोगों का कहना है कि विभागीय अफसरों की लापरवाही और भ्रष्टाचार का नतीजा है कि मेंटेनेंस के नाम पर जनता का पैसा तो खर्च होता है, लेकिन सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती।

विभाग ने हाल ही में “सिकंदरा ज़ोन में बिजली लाइन सुधार और पोल रीन्यूअल” के लिए लाखों रुपये का बजट पास किया था। लेकिन ज्यादातर पुराने पोल क्षतिग्रस्त खड़े हैं, कहीं बेस टूटा है, तो कहीं पोल झुक गया है।

कागज़ों में मेंटेनेंस, ज़मीन पर मौत का इंतज़ार” यही हकीकत अब लोगों के मुंह से सुनाई दे रही है। स्थानीय दुकानदारो का कहना है कि दीपावली के समय गांव में लाइटिंग और बिजली की खपत बढ़ जाती है, जिससे तारों और पोलों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। “अगर विभाग पहले ही सुधार कर देता, तो ऐसे हादसे नहीं होते। लेकिन अब वे भी जानते हैं — काम सिर्फ दिखावे के लिए होता है।”

ग्रामीणों ने कहा कि इस बार दीपावली के पहले मेंटेनेंस की औपचारिकता पूरी करने वाले अधिकारी और ठेकेदारों पर जांच होनी चाहिए। क्योंकि जब हर साल लाखों खर्च हो रहे हैं, फिर भी हादसे रुक नहीं रहे तो पैसा आखिर जा कहां रहा है?

यह घटना एक सिस्टम फेल्योर की कहानी है जहां जवाबदेही खत्म हो चुकी है और हर बार हादसे के बाद सफाई दी जाती है। जनता अब पूछ रही है: मेंटेनेंस के नाम पर जेबें भरने वालों की जिम्मेदारी कौन तय करेगा?”

आने वाले दिनों में दीपावली के दौरान बिजली की खपत और बढ़ेगी, और अगर ऐसे पोल व तारों की स्थिति नहीं सुधारी गई, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

लोगों ने साफ कहा है कि इस बार वे सिर्फ आश्वासन नहीं, कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पूरे सिकंदरा क्षेत्र में बिजली पोलों की “सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट” तैयार की जाए और उसे सार्वजनिक किया जाए।

दीपावली पर लाइटें जरूर जलें लेकिन लापरवाही की अंधेरी फाइलों में किसी की ज़िंदगी न बुझे। अब वक्त आ गया है कि सिस्टम सिर्फ दिखावा नहीं,  अधिकारियों ने भरोसा दिया है कि 48 घंटे के अंदर नया पोल लगाकर आपूर्ति सामान्य कर दी जाएगी।

लेकिन सवाल अब भी वही है  क्या हर हादसे के बाद ही विभाग की नींद खुलेगी? क्या नागरिकों की चेतावनी तब तक फाइलों में दबकर रह जाएगी जब तक कोई जनहानि न हो जाए?

अगर आज यह पोल किसी व्यक्ति पर गिरता तो शायद यह खबर “बिजली विभाग की लापरवाही से मौत” बन जाती। इसलिए जनता अब केवल भरोसे नहीं, जवाबदेही और कार्रवाई की मांग कर रही है।

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