क्राइम समाचार

आईटी विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर प्रद्युमन दीक्षित पर मुकदमा दर्ज।

कभी ऑफिस नहीं गईं, फिर भी दो कंपनियों से लेती रहीं तनख्वाह।

एसीबी का बड़ा खुलासा अफसर की पत्नी के खाते में पहुँचे 37 लाख रुपए!
क्राइम इंडिया टीवी डिजिटल डेस्क, जयपुर।

मनोज कुमार सोनी। जयपुर राजस्थान में भ्रष्टाचार के एक अनोखे और चौंकाने वाले मामले ने सबको हैरान कर दिया है। आईटी विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर प्रद्युमन दीक्षित ने रिश्वत लेने का ऐसा तिकड़म निकाला, जो अब पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए सबक बन गया है। आरोप है कि अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए ठेकेदारों से सीधे पैसे नहीं लिए, बल्कि अपनी पत्नी के नाम पर सैलरी दिलवाकर लाखों रुपए की घूस वसूली की।

जांच में सामने आया कि प्रद्युमन दीक्षित ने अपनी पत्नी पूनम दीक्षित को दो प्राइवेट कंपनियों, ओरियनप्रो सॉल्यूशंस लिमिटेड और ट्रीजेन सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड में बिना काम किए ही नौकरी पर दिखाया। दोनों कंपनियों से 21 महीनों में कुल ₹37.54 लाख रुपए उनके खातों में ट्रांसफर किए गए। यह पैसा ‘सैलरी’ के नाम पर हर महीने करीब ₹1.60 लाख आता था।

एसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक पूनम दीक्षित कभी किसी कंपनी के दफ्तर नहीं गईं, न किसी प्रोजेक्ट में शामिल हुईं। यह पूरा खेल ‘टेंडर पास’ कराने की एवज में किया गया। प्रद्युमन दीक्षित ने कंपनियों से कहा था कि अगर सरकारी ठेका चाहिए तो उनकी पत्नी को नौकरी पर रखो और हर महीने सैलरी देते रहो।

जांच में यह भी सामने आया कि पूनम दीक्षित की उपस्थिति रिपोर्ट स्वयं उनके पति प्रद्युमन दीक्षित ही सत्यापित करते थे। उन्होंने दोनों कंपनियों में ‘डुअल एंप्लॉयमेंट’ दिखाया, यानी एक ही अवधि में दो जगह नौकरी और वेतन दोनों। यह न केवल भ्रष्टाचार बल्कि आईटी एक्ट और सर्विस रूल्स दोनों का उल्लंघन है।

राजस्थान एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने जब कोर्ट के आदेश पर जांच शुरू की, तो रिकॉर्ड्स ने पूरे घोटाले की पोल खोल दी। बैंकों से ली गई स्टेटमेंट, कंपनियों के एचआर रिकॉर्ड और डिजिटल पेमेंट ट्रेल से पुष्टि हुई कि पूनम दीक्षित के 5 अलग-अलग बैंक खातों में जनवरी 2019 से सितंबर 2020 के बीच नियमित रूप से भुगतान होते रहे।

सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि जिन दो कंपनियों ने पूनम दीक्षित को सैलरी दी, उन्हें उसी अवधि में राजस्थान सरकार से लाखों के आईटी टेंडर भी मिले। यानी रिश्वत को वैधानिक रूप देने के लिए ‘जॉब’ का आवरण तैयार किया गया था।

हाईकोर्ट के आदेश पर खुला पूरा मामला

पूरा मामला तब सामने आया जब एक परिवादी ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की और एसीबी से जांच की मांग की। कोर्ट ने 6 सितंबर 2024 को आदेश जारी किया, जिसके बाद एसीबी ने 3 जुलाई 2025 को प्राथमिक जांच दर्ज की। रिकॉर्ड खंगालने में तीन महीने लगे और 17 अक्टूबर 2025 को एसीबी ने औपचारिक मुकदमा दर्ज कर लिया।

जांच अधिकारी ने जुटाए डिजिटल सबूत

डीएसपी नीरज गुरनानी के नेतृत्व में जांच टीम ने 200 से अधिक दस्तावेजों की जांच की। इसमें ईमेल ट्रेल, बैंक स्टेटमेंट, वेतन स्लिप्स, और आईटी विभाग की आंतरिक फाइलें शामिल हैं। टीम ने पाया कि प्रद्युमन दीक्षित ने सरकारी सिस्टम में टेंडर पास करने के लिए जानबूझकर फाइलों में देरी की और संबंधित कंपनियों पर ‘पैमेंट’ के लिए दबाव बनाया।

एसीबी ने कंपनियों के अधिकारियों को भी लिया रडार पर

एसीबी अब दोनों कंपनियों के निदेशकों से पूछताछ की तैयारी कर रही है। प्रारंभिक जांच में ओरियनप्रो और ट्रीजेन दोनों कंपनियों के ईमेल में ‘कॉन्ट्रैक्चुअल अप्रूवल’ का उल्लेख मिला है, जिसमें पूनम दीक्षित का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज है।

एसीबी अधिकारियों का कहना है कि यह घूसखोरी का एक नया तरीका है, जहां रिश्वत सीधे न लेकर परिवार के सदस्य को नौकरी दिलाकर पैसे ट्रांसफर किए जाते हैं। विशेषज्ञ इसे ‘फैमिली ट्रांसफर मोड ऑफ करप्शन’ कह रहे हैं, जो आय का वैध स्रोत दिखाकर ब्लैकमनी को व्हाइट में बदलने की रणनीति होती है।

आईटी विभाग में इस खुलासे के बाद हड़कंप मचा हुआ है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने प्रद्युमन दीक्षित को फिलहाल सस्पेंड करने और विभागीय जांच शुरू करने का निर्देश जारी किया है।

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