राजस्थान ट्रैफिक व्यवस्था ध्वस्त।
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राजस्थान की सड़कों पर मौत का तांडव: ओवरस्पीड बसें और अवैध पार्किंग ने बढ़ाया खतरा।

बसें, ऑटो, टैक्सियां—जहाँ चाहें वहीं रुकती; नियमों की ऐसी धज्जियाँ पहले कभी नहीं देखी।

राजस्थान में बढ़ते सड़क हादसे – ग्राउंड रिपोर्ट। क्राइम इंडिया टीवी डिजिटल डेस्क, मनोज कुमार सोनी।

जयपुर/राजस्थान वीरों की धरती, लेकिन अब हादसों की धरती बनती जा रही है। क्राइम इंडिया टीवी की टीम ने जब ग्राउंड पर उतरकर सच्चाई देखी, तो तस्वीरें भयावह थीं। जो असलियत सामने आई है, वह हर जिम्मेदार नागरिक को झकझोरने के लिए काफी है। राजस्थान की कई सड़कों पर प्राइवेट बसें ऐसे दौड़ती दिखाई दीं मानो वे सड़क नहीं, रेस ट्रैक हो। बस चालक ओवरटेक करने के लिए इतने तेज हॉर्न बजाते हैं कि वह कानों को चीरते हुए निकल जाता है। बाइक चालकों की गाड़ी डगमगाने लगती है… और कई बार हादसा हो ही जाता है।

हमारी टीम ने कई चौराहों, बस स्टॉप और सड़कों पर देखा बसें बिना संकेत दिए, बिना इंडिकेटर के, अचानक ब्रेक मारकर सवारी चढ़ाने-उतारने लग जाती हैं। पीछे आने वाले वाहन चालक संभल नहीं पाते और हादसा होना तय है। यह सीधे-सीधे,लापरवाही नहीं, हत्या का प्रयास जैसी स्थिति है। बसों में सुरक्षा व्यवस्था का नामोनिशान नहीं

हर बस में होना चाहिए: फायर सेफ्टी किट, फर्स्ट एड बॉक्स, इमरजेंसी विंडो,पुलिस, एंबुलेंस, कंट्रोल रूम के नंबर लेकिन ज्यादातर बसों में यह नहीं मिला।कुछ बसों में बॉक्स था तो अंदर खाली…कुछ में सिलेंडर तो था, लेकिन एक्सपायरी डेट के बाद का…

राजस्थान में सड़क सुरक्षा सप्ताह चल रहा है।पोस्टर, बैनर, सभाएँ—सब दिखाई देती हैं।लेकिन सड़क पर नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं।तेज हॉर्न प्रतिबंधित हैं, फिर भी बसें हथौड़े जैसे हॉर्न बजा रही हैं। ओवरलोडिंग प्रतिबंधित है, फिर भी बसें छत तक भरी हुई मिल रही हैं।RTO सिर्फ कागज़ चेक करता है,सुरक्षा नहीं। बसों में अवैध बदलाव—माल सामान भरकर दौड़ा रहे हैं

कई प्राइवेट बसों में भारी सामान, समान के कट्ठे, बोरियाँ, पैकेट्स, इलेक्ट्रॉनिक सामान, कूरियर के बैग बड़ी मात्रा में भरे मिले। बसों को ट्रक बना दिया गया है।यात्रियों की सीटों के नीचे तक सामान…आपात स्थिति में कोई बाहर कैसे निकलेगा?

प्रशासन की चुप्पी- क्या कोई बड़ी साठगांठ- RTO, पुलिस, परिवहन विभाग- किसी को ये बसें दिखाई नहीं देती? या दिखाई देती हैं लेकिन कार्रवाई नहीं होती?कई बसें,बिना फिटनेस,बिना सुरक्षा चेक,बिना डॉक्यूमेंट अपडेट,फिर भी धड़ल्ले से चल रही हैं। ये सवाल जनता पूछ रही है…क्योंकि हर हादसा किसी परिवार की रोटी कमाने वाले को छीन लेता है।

हमने दौसा, करौली, जयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, सीकर, नागौर, टोंक सहित कई जिलों में पड़ताल की।

तस्वीर हर जगह एक जैसी मिली,कहीं फ्लाईओवर के नीचे बस ने बाइक वाले को रौंदा,कहीं ओवरस्पीड ने पूरी कार को घसीटकर खाई में गिरा दिया,कहीं मरम्मत रहित बस का ब्रेक फेल,कहीं ओवरलोडेड बस पलट गई राजस्थान में हर 24 घंटे में औसतन 12–17 सड़क हादसे हो रहे हैं। हर दिन परिवार उजड़ रहे हैं।

राजस्थान में लागू हैं: GPS आधारित स्पीड कंट्रोल,इमरजेंसी इग्निशन कट-ऑफ,ऑटोमैटिक हॉर्न मॉनिटरिंग लेकिन प्राइवेट बसों ने ये लागू ही नहीं किए। परिवहन अधिकारी बस मालिकों के आगे बेबस दिखते हैं या फिर कुछ और कहानी है?  सरकार कब जागेगी? जनता सड़क पर मर रही है। बस मालिक करोड़ों कमा रहे हैं।लेकिन सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं।

सवाल यह है कि:क्या RTO सिर्फ पैसे लेने के लिए है? क्या पुलिस सिर्फ दिखावे के लिए चालान काटती है? क्या सरकार को मौतों का वास्तविक डेटा बताया भी जाता है?

क्राइम इंडिया टीवी टीम ने 30 दिनों के हालिया मामलों का अध्ययन किया: 1. जयपुर–सीकर रोड: बस की टक्कर से तीन मौत।2. टोंक रोड: तेज हॉर्न से बाइक संतुलन बिगड़ा, दो मौत।3. उदयपुर: ओवरलोड बस पलटी, 14 घायल।4. अजमेर: बस स्टॉप नहीं, सड़क पर सवारियां चढ़ाई, दुर्घटना।5. दौसा: अचानक ब्रेक से कार बस में घुसी।6. चित्तौड़: स्टंट करते चालक ने बाइक को टक्कर मारी।7. करौली: बस का टायर फटा—सुरक्षा चेक नहीं।8. भीलवाड़ा: फायर एक्सटिंग्विशर न होने से आग में 1 की मौत।9. अलवर: तेज हॉर्न से महिला की तबीयत बिगड़ी।10. नागौर: सामान से भरी बस पलटी,ये हादसे सिर्फ उदाहरण हैं…असल में संख्या और बड़ी है।

आमजन की राजस्थान सरकार से 7 बड़ी माँगें:. हर बस में फायर सेफ्टी किट अनिवार्य और अद्यतन हो. तेज हॉर्न जब्त कर बस मालिक पर कड़ी कार्रवाई हो. GPS आधारित स्पीड लिमिटर अनिवार्य हो.ओवरलोडिंग और अवैध सामान पर 50,000 का फाइन. सड़क सुरक्षा चेक हर 10 दिन पर हो. बसों के अंदर CCTV और दो आपात निकास अनिवार्य हों. RTO और पुलिस की संयुक्त टीम रैंडम चेक करे

जनता की आवाज़ लोग एक ही बात कहते मिले बस वाले मनमानी कर रहे हैं… कोई देखने वाला नहीं।दैनिक यात्री डर के साए में सफर कर रहे हैं।“सरकार सख्त हो, वरना मौतें रुकेंगी नहीं।”

राजस्थान की जनता के नाम सड़कें किसी की जान लेने के लिए नहीं बनीं।लेकिन सिस्टम की नाकामी ने इन्हें मौत का रास्ता बना दिया है। अब वक्त है कि:,RTO ईमानदार बने,पुलिस सख्त बने,बस मालिक नियम माने,तभी राजस्थान सुरक्षित होगा।

क्राइम इंडिया टीवी की टीम जब प्रेमनगर पुलिया, तिलक हॉस्पिटल, पुरानी चुंगी और कानोता के बीच गई,

तो जो हालात कैमरे में कैद हुए, वह बेहद चिंताजनक थे।पुलिया के नीचे बनी सड़कें अब सड़क नहीं,पूरी की पूरी अनियमित पार्किंग में बदल चुकी हैं।जहाँ वाहन चलने चाहिए, वहाँ,कारों की कतारें, ऑटो रिक्शा लाइन से खड़े, ई-रिक्शा और सवारी गाड़ियाँ कब्जा जमाकर खड़ी मिलीं।

ऑटो और टेक्सी सवारियाँ उतारते-चढ़ाते हुएपूरी लेन को ब्लॉक कर देते हैं। इस अव्यवस्था के बीच दोपहिया वाहन चालकों को बीच से निकलना पड़ता है,और इसी में रोज़ाना छोटी-बड़ी दुर्घटनाएँ हो रही हैं।तस्वीरें साफ दिखा रही हैं कि,न फुटपाथ बचा, न सड़क… सब कब्ज़े में।

जहाँ पुलिस की लगातार गश्त होनी चाहिए, वहाँ घंटों तक एक भी ट्रैफिक पुलिसकर्मी नजर नहीं आता।लोग नियम नहीं, मजबूरी में गलत दिशा से निकलते हैं।बिना व्यवस्था की पार्किंग, दुकानों की भीड़ और सड़क पर खड़ी बाइक की लंबी कतारें,पूरी ट्रैफिक लाइन को choking point बना देती हैं।ऐसा लगता है कि यहाँ ट्रैफिक सिस्टम नहीं, ट्रैफिक भगवान भरोसे चल रहा है। सवारियों से भरे ऑटो सड़क के बीच खड़े होकर,चिल्लाकर यात्री बुलाते हैं,और आने-जाने वाले वाहनों को रुकना, मुड़ना और झटके से ब्रेक लगाना पड़ता है।

कानून कहता है – पुलिया, चौराहों और मुख्य मार्गों पर वाहन खड़ा करना सख्त मना है। लेकिन यहाँ कानून ही गायब है। लोगों का कहना है हर दिन जाम लगता है, हर दिन खतरा रहता है…लेकिन कार्रवाई कोई नहीं करता।

यह स्थिति केवल ट्रैफिक की समस्या नहीं,ये एक संभावित बड़े हादसे की चेतावनी है।बिना किसी नियंत्रण के,बिना किसी ट्रैफिक मैनेजमेंट के,बिना किसी सुरक्षा चिंता केजिस तरह वाहन खड़े किए जाते हैं, यह सीधा-सीधा जनता की जान से खिलवाड़ है। जयपुर जैसे स्मार्ट सिटी कहलाने वाले शहर में,ऐसी असंगठित स्थिति,प्रशासन की नाकामी को उजागर करती है।

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