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जयपुर-जोधपुर सहित पूरे प्रदेश में पुलिस सड़क पर अपराधियों में दहशत।

राजस्थान पुलिस की बड़ी सख्ती,अब शाम 6 से 9 तक सड़क पर होंगे IG से लेकर SHO

जयपुर प्रदेश में पुलिस की सुदृढ़ पैदल गश्त नीति: शाम 6 से 9 बजे तक सड़कों पर होंगे SHO से लेकर IG/कमिश्नर तक।

क्राइम इंडिया टीवी डिजिटल डेस्क।

मनोज कुमार सोनी। जयपुर। अपराध पर नकेल कसने और जनता में पुलिसिंग का भरोसा मजबूत करने के लिए राजस्थान पुलिस ने बड़ी पहल करते हुए एक नया अभियान शुरू किया है। इस पहल के तहत अब प्रदेश के सभी जिलों के पुलिस अधिकारी थाना प्रभारी (SHO) से लेकर रेंज स्तर के IG और कमिश्नर तक रोजाना शाम 6 बजे से 9 बजे तक अपने-अपने क्षेत्र में पैदल गश्त करेंगे। आईजी कानून व्यवस्था की ओर से जारी सख्त दिशानिर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि सड़क पर पुलिस की पैदल मौजूदगी से अपराधियों में भय और आमजन में सुरक्षा की भावना पैदा होगी।

बीते कुछ समय से बढ़ती चोरी, चेन स्नैचिंग, महिलाओं से छेड़छाड़, सड़क पर गुंडागर्दी और वाहन चोरी जैसे मामलों को देखते हुए गृह विभाग ने यह निर्णय लिया है। शाम के समय बाजारों में भीड़ बढ़ जाती है, ऐसे में अपराधी अधिक सक्रिय रहते हैं। इसी कारण इस समयावधि को विशेष रूप से चुना गया है। पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्र के मुख्य बाजारों, संवेदनशील कॉलोनियों, महत्वपूर्ण चौराहों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और पार्क जैसे इलाकों में पैदल गश्त अनिवार्य रूप से करें। सिविल ड्रेस में भी पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे, ताकि अपराधियों पर नजर रखी जा सके। आईजी कानून व्यवस्था ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी अधिकारी की पैदल गश्त शिथिल नहीं होनी चाहिए। उपस्थिति और लोकेशन की निगरानी GPS ट्रैकिंग और कंट्रोल रूम की मॉनिटरिंग से की जाएगी। गश्त के दौरान अधिकारियों को आम जनता से संवाद करने, उनकी समस्याएं सुनने और मौके पर ही समाधान की दिशा में कदम उठाने के निर्देश भी जारी हुए हैं। अभियान का एक अन्य उद्देश्य यह भी है कि पुलिस और जनता के बीच सीधा संवाद बढ़े। लंबे समय से लोगों की शिकायत रही है कि पुलिसकर्मी आम नागरिकों से दूर रहते हैं और थानों में ही सीमित दिखाई देते हैं। अब यह सोच बदलेगी। अधिकारी स्वयं सड़कों पर उतरकर जनता को सुरक्षा का अहसास कराएंगे।

इस पैदल गश्त के दौरान बदमाशों, असामाजिक तत्वों और अवैध हथियार या मादक पदार्थ कारोबार में संलिप्त लोगों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। संदिग्ध तत्वों की तुरंत पहचान कर कार्रवाई की जाएगी। थाना स्तर पर बनाई जाने वाली रिपोर्ट रोजाना उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।

नगर निगम और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय रखकर उन स्थानों की लाइटिंग व्यवस्था सुधारी जाएगी, जहां अंधेरा होने से अपराध को बढ़ावा मिलता है। साथ ही CCTV कैमरों की जांच, खराब कैमरों की सूची तैयार कर नगर निगम को भेजने और दुरुस्त करवाने के आदेश भी दिए गए हैं। महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए महिला पुलिसकर्मियों की भी टीम पैदल गश्त में शामिल रहेगी। खासकर कोचिंग संस्थानों, कॉलेज परिसर, मॉल एरिया और मेट्रो स्टेशन के आसपास विशेष निगरानी की जाएगी।

पुलिस अधिकारियों से कहा गया है कि गश्त के दौरान आम जनता को हेल्पलाइन नंबर, साइबर शिकायत पोर्टल और सुरक्षा ऐप की जानकारी भी दी जाए, ताकि हर समस्या के लिए थाने आने पर निर्भर ना रहना पड़े। सूत्रों के अनुसार इस अभियान में किसी भी तरह की ढील या लापरवाही पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई तय है। उच्च अधिकारियों द्वारा अचानक निरीक्षण भी होगा। गृह विभाग को उम्मीद है कि इस अभियान से प्रदेश में अपराध पर बड़ा नियंत्रण होगा। अपराधियों को यह महसूस होगा कि पुलिस हर वक्त उनके सिर पर खड़ी है। और जनता के मन में यह भरोसा भी मजबूत होगा कि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हाथों में है।

जनभागीदारी, जिम्मेदारी, पारदर्शिता और मजबूत कानून व्यवस्था की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। पुलिस अधिकारियों की पैदल गश्त जल्द ही जनता को जमीन पर दिखने वाले परिणाम भी देगी। प्रदेशभर में “चौकन्नी पुलिस  सुरक्षित नागरिक” की नीति को अमल में लाते हुए यह अभियान आने वाले दिनों में और भी व्यापक रूप ले सकता है। उम्मीद है कि जयपुर सहित पूरे राजस्थान में शाम का वक्त अब अपराधियों के लिए नहीं, सुरक्षित घर वापसी के लिए जाना जाएगा।

 

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