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पंचायत पुनर्गठन पर कांग्रेस का हल्ला बोल, दौसा कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन।

भाजपा सरकार पर प्रतिशोध की राजनीति का आरोप, कांग्रेस उतर गई मैदान में।

दौसा, 26 नवंबर — क्राइम इंडिया टीवी डिजिटल डेस्क।मनोज कुमार सोनीजयपुर/दौसा राजस्थान में पंचायतों के पुनर्गठन को लेकर जारी विवाद अब सड़कों से जिला मुख्यालय तक पहुंच चुका है। राज्य की भाजपा सरकार द्वारा हाल ही में किए गए पंचायतों के पुनर्गठन में कई पंचायतों को ऐसी पंचायत समितियों में शामिल कर दिया गया है जो भौगोलिक व जनसुविधा की दृष्टि से आमजन के बिल्कुल विपरीत साबित हो रहा है। इसी मुद्दे पर जिला कांग्रेस कमेटी दौसा आज मुखर नज़र आई और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर सरकार के निर्णय का कड़ा विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा सरकार के पुनर्गठन निर्णय से ग्रामीण जनता को दैनिक जीवन, सरकारी सेवाओं, शिक्षण संस्थानों, स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। इससे न केवल समय और धन की बर्बादी हो रही है बल्कि बुजुर्गों, महिलाओं और छात्रों के लिए यह व्यवस्था बेहद कष्टकारी साबित हो रही है। बड़ी संख्या में कांग्रेस जन प्रतिनिधि और कार्यकर्ता पहुंचे ज्ञापन सौंपने के दौरान जिले के प्रमुख कांग्रेस नेताओं की भारी मौजूदगी रही।

इस मौके पर —

➡️ दौसा सांसद मुरारीलाल मीणा

➡️ दौसा विधायक डी.सी. बैरवा

➡️ बांदीकुई विधायक गजराज खटाना

➡️ जिला कांग्रेस अध्यक्ष रामजीलाल ओड

➡️ प्रदेश सचिव चंचल कसाना

ब्लॉक स्तरीय एवं पंचायत स्तरीय पदाधिकारी बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और ग्रामीणजन शामिल रहे। नेताओं ने जोर देकर कहा कि चुनाव जीतने के बाद भाजपा सरकार प्रशासनिक सुधारों के नाम पर राजनीतिक प्रतिशोध ले रही है। ग्रामीणों की सुविधा को दरकिनार कर औंधाधुंध तरीके से पंचायतों का पुनर्गठन कर दिया गया है।“जनता की सहमति बिना लिया गया निर्णय” कांग्रेस कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि पुनर्गठन की प्रक्रिया बिना सर्वे, बिना जनमत और बिना क्षेत्रीय आवश्यकताओं को समझे लागू की गई है। जिससे ground level पर कई तरह की समस्याएं खड़ी हो गई हैं।

सांसद मुरारीलाल मीणा ने कहा — “सरकार यदि जनता की सुविधा और विकास की बात करती है, तो फिर आमजन की आवाज क्यों नहीं सुन रही?पंचायतें जनता से दूर कर दी गई हैं। यह निर्णय जल्द वापस लिया जाए।”

विधायक डी.सी. बैरवा ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा — “सत्ता में आते ही भाजपा को ग्रामीणों की कठिनाइयां नजर ही नहीं आ रही। हम इस गलत निर्णय को लागू नहीं होने देंगे।”

विधायक गजराज खटाना ने कहा –  “ग्रामीणों की सहूलियत को प्राथमिकता मिले।पंचायतें दूसरी समितियों में भेजने से लोगों को भारी दिक्कत हो रही है।”

जिला कांग्रेस अध्यक्ष रामजीलाल ओड ने कहा कि—पंचायतों का पुनर्गठन जनता की सुविधा बढ़ाने के लिए होना चाहिए, न कि उसे परेशान करने के लिए।भाजपा सरकार की यह नीति ग्रामीणों की भावनाओं के विरुद्ध है।

ज्ञापन में रखी ये प्रमुख मांगे पंचायतों को पहले वाली समितियों के अंतर्गत रखा जाए, भौगोलिक दूरी व किराया खर्च को कम करने का प्रयास, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक कार्यों के लिए जनता को सुविधा मिले, ग्रामीणों की मंशा के अनुरूप पुनः विचार किया जाए, ज्ञापन में कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय को वापस नहीं लिया तो आंदोलन जारी रहेगा।

ग्रामीणों की भी बढ़ी नाराज़गी पुनर्गठन से प्रभावित गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि अब पटवारी, तहसील, पंचायत कार्यालय के चक्कर लगाने में डेढ़ से दो गुना दूरी तय करनी पड़ रही है। बस किराया और समय खर्च बहुत बढ़ गया, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए सफर बेहद मुश्किल, ग्रामीणों ने भी कांग्रेस नेताओं को समर्थन दिया और कहा कि उनकी मांग पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा।

सरकार पर राजनीतिक दमन का आरोप कांग्रेस का सीधे तौर पर आरोप है कि भाजपा सत्ता का दुरुपयोग कर रही है और कांग्रेस समर्थित गांवों में जानबूझकर असुविधाजनक व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके पीछे राजनीतिक बदले की भावना दिखाई दे रही है। शांतिपूर्ण विरोध की दी चेतावनी जिला कांग्रेस कमेटी ने कहा कि “यदि प्रशासन और सरकार ने आवाज नहीं सुनी तो जिलेभर में लोकतांत्रिक तरीके से और बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। जिला कलेक्टर ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने का भरोसा जताया है। प्रशासन ने जनभावनाओं को गंभीरता से लेने की बात कही है।।

 

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