कानून में बदलाव

दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़) में 37 नक्सलियों ने शांति का मार्ग अपनाते हुए सरेंडर किया। वहीं पिछले 23 महीनों में करीब 2200 माओवादी हिंसा छोड़कर सामान्य जीवन की ओर लौटे हैं।

बदलते बस्तर की तस्वीर

दंतेवाड़ा में समर्पण की बड़ी घटना

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में 37 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। इनमें कई ऐसे नाम शामिल हैं, जिन पर कुल मिलाकर 65 लाख रुपये तक का इनाम था।

पूना मार्गेम अभियान की सफलता

सरकार और पुलिस द्वारा चलाए जा रहे “पूना मार्गेम” अभियान ने इन नक्सलियों को हिंसा छोड़कर समाज से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। इस पहल का उद्देश्य बस्‍तर क्षेत्र में स्थायी शांति और सामाजिक सम्मान की स्थापित करना है।

महिला नक्सलियों की बड़ी संख्या

समर्पण करने वालों में 12 महिलाएं भी शामिल हैं। कुमाली उर्फ अनीता मंडावी, गीता मड़कम और भीमा उर्फ जहाज जैसी महिला नेताओं ने भी हथियार डालना पसंद किया।

पुनर्वास नीति का फायदा

सरकार द्वारा चलाई जा रही पुनर्वास नीति के तहत समर्पणकर्ताओं को 50,000 रुपये की तत्काल मदद, खेती के लिए जमीन, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर दिए जाएंगे।

बड़े स्तर पर नक्सली संगठन कमजोर

पिछले 23 महीनों में 2,200 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। ये आंकड़े बताते हैं कि नक्सलवाद की पकड़ अब कमजोर होती जा रही है।

नया जीवन, नई उम्मीद

समर्पण करने वालों को न केवल कानून से राहत मिल रही है बल्कि सम्मानपूर्वक जीवन जीने का मौका भी मिल रहा है।

भारत का लक्ष्य — 2026 तक नक्सलवाद मुक्त देश

केंद्र सरकार ने 2026 तक नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने का लक्ष्य रखा है, और ये लगातार आत्मसमर्पण इसी दिशा में बड़ी उपलब्धि हैं।

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