SDM–DSP से लेकर मंत्री-विधायक तक जाल में फंसे: 90 गोपनीय वीडियो बरामद।
हाई-प्रोफाइल रैकेट का खुलासा: प्यार का झांसा, वीडियो रिकॉर्डिंग और करोड़ों की वसूली।

हनी ट्रैप का अब तक का सबसे बड़ा खुलासा: भोपाल की 5 महिलाओं का 15 करोड़ का प्रेम-जाल रैकेट, 90 वीडियो बरामद।
क्राइम इंडिया टीवी डिजिटल डेस्क। मानोज कुमार सोनी। भोपाल। मध्यप्रदेश में हनी ट्रैप कांड का सनसनीख़ेज़ खुलासा हुआ है। राजधानी भोपाल में रहने वाली पांच महिलाओं ने मिलकर एक संगठित गिरोह बनाया और इसे अपना “खुद का हाई-प्रोफाइल रोजगार मॉडल” बताकर बड़ी साजिश रची। गिरोह ने पिछले दो साल में प्रदेश के अफसरों, नेताओं और प्रभावशाली लोगों को प्रेमजाल में फंसा कर करोड़ों की उगाही की।
जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने 2 SDM, 3 DSP, कई मंत्री, विधायकों, विभागीय अधिकारियों और नामचीन चेहरों को अपने मकड़जाल में फंसाया। आरोप है कि महिलाएं पहले सोशल मीडिया पर टारगेट की तलाश करतीं, फिर भरोसा जीतकर उनसे नज़दीकियां बढ़ातीं, मुलाकातें तय करतीं और गुप्त रूप से वीडियो रिकॉर्ड कर लेतीं। इसके बाद शुरू होता था वसूली का खेल। वीडियो वायरल करने की धमकी देकर अफसरों और नेताओं से मोटी रकम ऐंठी जाती थी।
प्राथमिक जांच में पुलिस ने माना है कि अब तक गिरोह ने लगभग 15 करोड़ रुपये अवैध तरीके से वसूले हैं। रैकेट का पर्दाफाश तब हुआ जब तीन महिलाओं के मोबाइल से 90 आपत्तिजनक वीडियो बरामद हुए। इनमें कई हाई-प्रोफाइल चेहरे होने की आशंका है। वीडियो की संख्या और टारगेट की लिस्ट देखकर पुलिस भी हैरान है।
भीतर की जानकारी यह भी बताती है कि ये महिला गिरोह अत्यंत प्रोफेशनल तरीके से काम करता था। हर लड़की का अलग काम था ● कोई दोस्ती बनाती ● कोई भावनात्मक जुड़ाव तैयार करती ● कोई मुलाकात सेट करती ● कोई रिकॉर्डिंग संभालती ● और एक वसूली का काम करती पुलिस सूत्रों का कहना है कि गिरोह का नेटवर्क सिर्फ भोपाल तक सीमित नहीं है। जबलपुर पुलिस भी जांच में जुट गई है क्योंकि कई लेन-देन और मुलाकातें जबलपुर में होने के संकेत मिले हैं। प्रारंभिक पूछताछ में यह भी सामने आया है कि इनका नेटवर्क राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक फैलने की कोशिश में था। पुलिस को शक है कि वहां भी कुछ संपर्क विकसित किए गए होंगे या कोई समानांतर फ्रेंचाइजी मॉडल तैयार हो रहा होगा।
जांच एजेंसियां अब डिजिटल फोरेंसिक की सहायता से मोबाइल, लैपटॉप और चैट बैकअप खंगाल रही हैं। कौन-कौन टारगेट था, किससे कितनी रकम वसूली गई, किसने शिकायत नहीं की—इन सबकी परतें खुल रही हैं। अधिकारियों में खलबली मच गई है। कई अफसर और नेता अब खुद ही बैकफुट पर हैं कि कहीं उनका नाम सामने न आ जाए। पुलिस ने साफ किया है कि मामला बेहद संवेदनशील है, इसलिए जांच गोपनीय रखी जा रही है।
सूत्र बताते हैं कि गिरोह के पास न सिर्फ वीडियो बल्कि कॉल रिकॉर्डिंग, चैट हिस्ट्री और ट्रांजैक्शन स्क्रीनशॉट भी हैं। ये सब मिलाकर मामला और गंभीर हो गया है। विशेष टीम बनाई गई है जो गिरोह के वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग पैटर्न और प्रत्येक टारगेट की प्रोफाइल का विश्लेषण कर रही है। किसने स्वेच्छा से पैसे दिए और किसे धमकाकर लूटा गया यह भी देखा जा रहा है।
अधिकारियों को यह भी आशंका है कि गिरोह ने वीडियो बेचने या दूसरे राज्यों में सौदेबाजी करने की कोशिश भी की होगी। इसका डिजिटल ट्रेस खंगाला जा रहा है।पुलिस विभाग के अंदर यह चर्चा है कि कुछ अफसरों ने डर के चलते मामले को दबा कर रखा था लेकिन अब जब वीडियो बरामद हो गए हैं, तब पूरा नेटवर्क सामने आ रहा है।
जांच टीम ने कहा है कि इस मामले में बड़े खुलासे अभी बाकी हैं। आने वाले दिनों में कई बड़े नाम उजागर हो सकते हैं। प्रदेश सरकार ने भी इस हनी ट्रैप मामले को हाई-प्रोफाइल केस घोषित कर विशेषज्ञों की टीम लगाने के निर्देश दिए हैं।आम जनता और जनप्रतिनिधियों को चेतावनी जारी की गई है कि सोशल मीडिया पर अनजान प्रोफाइल, दोस्ती के प्रस्ताव और निजी मुलाकातों से बचें।
इस खुलासे के बाद राजनीतिक गलियारे में भारी हलचल है। विपक्ष इसे सिस्टम की विफलता बता रहा है और सवाल उठा रहा है कि इतने लंबे समय तक गिरोह सक्रिय कैसे रहा।फिलहाल पांचों महिलाएं पुलिस हिरासत में हैं और पूछताछ जारी है। पुलिस ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही और गिरफ्तारी हो सकती है।
सभी विधायक, मंत्री और प्रशासनिक अधिकारी सतर्क रहें।सोशल मीडिया और निजी मुलाकातों के जरिए चल रहे हनी ट्रैप मॉड्यूल अब राज्यों में फैल रहे हैं। राजस्थान और यूपी में भी इस तरह की गतिविधियों के संकेत मिलने पर खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।मामला आगे कितना बड़ा रूप लेगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। लेकिन इतना स्पष्ट है यह प्रदेश के अब तक के सबसे संगठित हनी ट्रैप नेटवर्क में से एक है।



