स्कूलों में स्ट्रे डॉग्स की बढ़ती संख्या को देखते हुए शिक्षकों को निगरानी का काम भी मिला।

शिक्षकों पर अतिरिक्त बोझ: समाधान या परेशानी?
छत्तीसगढ़ में जारी हुआ नया आदेश चर्चा में है। स्कूलों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय है, लेकिन समाधान के नाम पर शिक्षकों पर बोझ डालना कितना उचित है?
नोडल अधिकारी के रूप में शिक्षक
आदेश में कहा गया कि हर स्कूल में नोडल अधिकारी बनेगा और शिक्षक ही आवारा कुत्तों की सूचना प्रशासन को देंगे।
क्या यह शिक्षक का कार्यक्षेत्र है?
शिक्षक पहले ही कई गैर-शैक्षिक कार्यों में उलझे रहते हैं—चुनाव ड्यूटी, सर्वे, जनगणना, योजनाओं का फीडिंग कार्य आदि। अब कुत्तों पर निगरानी?
एसोसिएशन ने उठाया सवाल
टीचर्स एसोसिएशन ने इसे शिक्षक की गरिमा के विरुद्ध बताया है।
उनका कहना है कि प्रशासन को अपना काम खुद करना चाहिए।
शिक्षण प्राथमिकता होनी चाहिए
स्कूलों की गुणवत्ता सुधारनी है तो शिक्षकों को पढ़ाई पर केंद्रित रहने देना जरूरी है।
अच्छी पहल, गलत तरीका
कुत्तों से सुरक्षा जरूरी है, पर जिम्मेदारी सही विभाग को सौंपी जानी चाहिए।
सकारात्मक समाधान क्या?
– नगर निगम की नियमित पेट्रोलिंग
– स्कूलों के आसपास बाड़बंदी
– कुत्तों के लिए वैक्सिनेशन अभियान



