‘धर्मनिरपेक्षता का कोई क्रैश कोर्स नहीं होता’, जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में बोले जावेद अख्तर

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में जावेद अख्तर ने धर्मनिरपेक्षता और भाषा पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्षता कोई क्रैश कोर्स नहीं है, बल्कि यह माहौल से आती है। अख्तर ने संस्कृत को हजारों साल पुरानी और उर्दू को ‘कल की बच्ची’ बताया, साथ ही तमिल को सबसे पुरानी जीवित भाषा कहा। उन्होंने जोर दिया कि भाषा धर्म से नहीं, पहचान से जुड़ी है और लोगों को अपनी मातृभाषा सिखानी चाहिए।
HighLights
- धर्मनिरपेक्षता माहौल से आती है, क्रैश कोर्स नहीं होता।
- संस्कृत हजारों साल पुरानी, उर्दू ‘कल की बच्ची’ है।
- भाषा धर्म से नहीं, बल्कि पहचान से जुड़ी होती है।
धर्मनिरपेक्ष का कोई क्रैश कोर्स नहीं होता है। कोई सिखाएगा तो वो फेक होगा। धर्मनिरपेक्ष आपके आसपास के माहौल में मिलता है। संस्कृत पहले आई या उर्दू, यह सवाल गलत है। संस्कृत हजारों साल पुरानी है। उर्दू तो कल की बच्ची है।
तमिल सबसे पुरानी जिंदा भाषा है। उर्दू रेस में नहीं है। यह बातें गुरुवार से शुरु हुए जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान गीतकार व लेखक जावेद अख्तर ने ”पांइट्स आफ व्यू” सत्र में लेखक वरीशा फरासत से बातचीत के दौरान कहीं।
धर्मनिरपेक्षता माहौल से आती है, क्रैश कोर्स नहीं होता
पांच दिवसीय फेस्टिवल के 266 सत्रों में करीब पांच सौ वक्ता शामिल होंगे। पहले दिन राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा एवं दिया कुमारी और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट भी पहुंचे।
एक अन्य सत्र ”इंडिया इन उर्दू: उर्दू इन इंडिया” में जावेद अख्तर ने कहा कि उर्दू जुबान ने पाकिस्तान के टुकड़े करवाए। भारत में बसे लोग उर्दू को ही अपना मानते हैं तो वो तनाव बनाकर रखते हैं।
संस्कृत हजारों साल पुरानी, उर्दू ‘कल की बच्ची’ है
भाषा कभी भी धर्म, समाज की नहीं होती है। क्षेत्र की भाषा होती है, धर्म की नहीं। दिल्ली उच्च न्यायालय का उदाहरण देते हुए कहा कि न्यायालय ने कहा था कि उर्दू शब्दों का उपयोग कम किया जाना चाहिए, लेकिन मैं कहता हूं कि इसकी जरूरत ही नहीं थी। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश का इतिहास बताता है कि लोग अपनी मातृभाषा बांग्ला के लिए खड़े हुए।
मुस्लिम होने के बावजूद उन्होंने उर्दू को अपनाना जरूरी नहीं समझा, क्योंकि भाषा आस्था से नहीं, बल्कि पहचान से जुड़ी होती है। हिंदी और उर्दू का व्याकरण एक ही है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी आनी चाहिए। यह दुनिया की भाषा है।
भाषा धर्म से नहीं, बल्कि पहचान से जुड़ी होती है
लोगों को अपने बच्चों को धर्म नहीं, अपनी मातृभाषा सिखानी चाहिए। कार्यक्रम में अभिनेत्री जीनत अमान ने संजाय राय के एक सवाल पर कहा कि मैं अपनी आटोग्राफी लिखना चाहूंगी।
इससे पहले गुरुवार सुबह फेस्टिवल की शुरूआत के मौके पर ऐश्वर्या विधा रघुनाथन ने शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति दी। फेस्टिवल में एक सत्र में लेखिका बानू मुश्ताक ने अपनी साहित्य से जुड़ी यात्रा पर चर्चा की।



