यूपी बोर्ड परीक्षा में 53 लाख से अधिक परीक्षार्थी होंगे शामिल, संवेदनशील केंद्रों पर रखी जाएगी निगरानी; लगेंगे जैमर

यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च तक होंगी, जिसमें 53 लाख से अधिक छात्र शामिल होंगे। नकल रोकने के लिए सरकार ने कड़े इंतजाम किए हैं, जिसमें जैमर, सीसीटीवी निगरानी और संवेदनशील केंद्रों पर विशेष ध्यान शामिल है। 18 जिलों को संवेदनशील घोषित किया गया है। परिणाम अप्रैल के अंत तक आने की उम्मीद है।
HighLights
- 18 फरवरी से 12 मार्च तक होंगी यूपी बोर्ड परीक्षाएं।
- 53 लाख से अधिक विद्यार्थी देंगे परीक्षा, कड़े इंतजाम।
- संवेदनशील केंद्रों पर जैमर, सीसीटीवी से विशेष निगरानी।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाएं 18 फरवरी से शुरू हो रही हैं, जिनमें इस वर्ष 53 लाख से अधिक विद्यार्थी शामिल होंगे। परीक्षाएं 12 मार्च तक चलेंगी और दोनों कक्षाओं की परीक्षाएं 15 दिनों में पूरी कराई जाएंगी।
परीक्षा परिणाम अप्रैल के अंतिम सप्ताह में घोषित करने की योजना है। नकल, अव्यवस्था और किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए राज्य सरकार ने इस बार कड़े और व्यापक इंतजाम किए हैं। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में 20 परीक्षा केंद्रों में जैमर लगाए जाएंगे। अति संवेदनशील केंद्रों पर कड़ी निगरानी रहेगी।
बुधवार को लोक भवन में आयोजित राज्य स्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में मुख्य सचिव एसपी गोयल ने सभी मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बोर्ड परीक्षाएं पूरी तरह नकलविहीन, शांतिपूर्ण और पारदर्शी ढंग से कराई जाएं। किसी भी स्तर पर लापरवाही क्षम्य नहीं होगी। पूर्व के अनुभवों को देखते हुए प्रदेश के 18 जिलों को संवेदनशील घोषित किया गया है।
इन जिलों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। अतिसंवेदनशील परीक्षा केंद्रों का प्रतिदिन दो बार निरीक्षण कराया जाएगा। सभी परीक्षा कक्षों और परिसरों में सीसीटीवी कैमरे और वायस रिकॉर्डर पूरी तरह कार्यशील रहेंगे। राज्य स्तर और प्रत्येक जिले स्तर पर कंट्रोल और मानिटरिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे।
परीक्षा से जुड़े सभी कार्मिकों का प्रशिक्षण समय पर पूरा कराने का निर्देश दिया गया है। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील केंद्रों की निगरानी एसटीएफ और एलआईयू के माध्यम से की जाएगी। प्रश्नपत्र खोलने की पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में होगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि स्ट्रांग रूम से केवल सही प्रश्नपत्र ही बाहर जाएं।
स्ट्रांग रूम की रात में रैंडम चेकिंग अनिवार्य होगी। बाहरी नकल रोकने के लिए क्षेत्राधिकारी और थानाध्यक्ष नियमित पेट्रोलिंग करेंगे। परीक्षार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परीक्षा समय पर बसों का नियमित संचालन और यथासंभव निर्बाध बिजली आपूर्ति के निर्देश दिए गए हैं।
इंटरनेट मीडिया पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी। अफवाह फैलाने, अवैध मुद्रण या परीक्षा में बाधा डालने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। सभी परीक्षा केंद्रों पर मुख्य विषयों के प्रश्नपत्रों के रिजर्व सेट उपलब्ध रहेंगे और प्रश्नपत्रों में केंद्रवार कोडिंग लागू की गई है। स्ट्रांग रूम की निगरानी के लिए परिषद मुख्यालय और प्रदेश के पांचों क्षेत्रीय कार्यालयों में कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाए जाएंगे।
222 अति संवेदनशील केंद्र
प्रदेश में कुल 8,033 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें 1,927 शहरी और 6,106 ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं। इनमें 222 केंद्र अति संवेदनशील और 683 संवेदनशील घोषित किए गए हैं। सभी केंद्रों पर सशस्त्र बल तैनात रहेंगे। उत्तर पुस्तिकाएं ए-फोर साइज की होंगी और हर पेज पर माध्यमिक शिक्षा परिषद का लोगो रहेगा।
प्रयोगात्मक परीक्षाओं के अंक पहले ही पोर्टल और मोबाइल एप के माध्यम से आनलाइन अपलोड किए जा चुके हैं। नकलविहीन परीक्षा अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन ने अभिभावकों, प्रभावशाली नागरिकों और मीडिया प्रतिनिधियों को भी इस अभियान से जोड़ने का निर्णय लिया है।
18 जिले संवेदनशील
यूपी बोर्ड परीक्षा को लेकर प्रदेश के 18 जिलों को संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। इनमें आगरा, मथुरा, अलीगढ़, हाथरस, एटा, कासगंज, प्रयागराज, कौशांबी, प्रतापगढ़, हरदोई, कन्नौज, आजमगढ़, बलिया, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर, देवरिया और गोंडा शामिल हैं।



