भारी विरोध के आगे झुकी राजस्थान सरकार, रामकथा में शिक्षकों की ड्यूटी वाला आदेश चंद घंटों में वापस

राजस्थान में बूंदी जिले के बांसी के अंबिका माता मंदिर में पिछले तीन दिन से जारी रामकथा में व्यवस्था संभालने को जिम्मा सरकारी स्कूल के पांच शिक्षकों को सौंपा गया तो बवाल हो गया। शिक्षकों संगठनों ने इस आदेश पर आपत्ति जताई। वहीं, कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मंगलवार को यह मुद्दा विधानसभा में उठाया।
HighLights
- इससे पहले स्कूलों के आसपास कुत्तों को भगाने का सौंपा गया था जिम्मा
- गोविंद सिंह डोटासरा ने मंगलवार को यह मुद्दा विधानसभा में उठाया
राजस्थान में बूंदी जिले के बांसी के अंबिका माता मंदिर में पिछले तीन दिन से जारी रामकथा में व्यवस्था संभालने को जिम्मा सरकारी स्कूल के पांच शिक्षकों को सौंपा गया तो बवाल हो गया। शिक्षकों संगठनों ने इस आदेश पर आपत्ति जताई।
वहीं, कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मंगलवार को यह मुद्दा विधानसभा में उठाया। स्कूलों में पढ़ाना छोड़कर रामकथा में शिक्षकों को तैनात करने पर बवाल हुआ तो बुधवार को आदेश वापस ले लिया गया।
मालूम हो कि बांसी के अंबिका माता मंदिर में 31 जनवरी से सात फरवरी तक नौ दिवसीय महायज्ञ धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम रामकथा का आयोजन किया जा रहा है। रामकथा के लिए शिक्षकों की ड्यूटी दो से सात फरवरी तक के लिए लगाई गई थी।
इससे पहले जनवरी माह में शिक्षा विभाग की ओर से सभी सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की स्कूलों के आसपास आवारा कुत्तों को भगाने का जिम्मा सौंपने का आदेश जारी किया गया था।
रामकथा में शिक्षकों की ड्यूटी लगाने का आदेश शिक्षामंत्री मदन दिलावर के निर्देश पर बूंदी में समग्र शिक्षा विभाग के मुख्य ब्लाक शिक्षा अधिकारी ने जारी किया था। शिक्षा अधिकारी ने पांचों शिक्षकों को शैक्षिक कार्य से मुक्त कर रामकथा में व्यवस्था संभालने के लिए भेजने के आदेश लिखित में जारी किए थे।
एक ही स्कूल के पांच शिक्षकों की रामकथा में व्यवस्था कायम करने के लिए ड्यूटी लगाई गई तो स्कूल बंद होने की स्थिति में आ गया। अभिभावकों ने भी इस आदेश पर आपत्ति जताई।
इस मामले में बूंदी जिला शिक्षा अधिकारी कुंजबिहारी भारद्वाज ने कहा कि गलती हुई थी। पूरे मामले में संशोधित आदेश जारी किया गया है। पूरे आदेश को निरस्त किया गया है।



