PM Kisan 22वीं किस्त से पहले खेती में आत्मनिर्भरता का संकल्प, आयात पर लगेगा ब्रेक

पीएम किसान सम्मान निधि योजना की अगली किस्त से पहले केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र को लेकर बड़ा संकेत दिया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भारत को फलों, सब्जियों और फूलों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनना होगा और आयात पर निर्भरता खत्म करनी होगी।
सरकार का बदला हुआ कृषि एजेंडा
अब सरकार केवल न्यूनतम समर्थन मूल्य और आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहना चाहती। कृषि मंत्री का कहना है कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए उन्हें लाभकारी और उच्च मांग वाली फसलों की ओर ले जाना जरूरी है।
आयात क्यों बनता है बोझ
कई फल और फूल ऐसे हैं, जिनका उत्पादन देश में संभव है, लेकिन अब तक उनका आयात किया जाता रहा है। इससे किसानों को नुकसान और देश की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। सरकार इसी स्थिति को बदलना चाहती है।
आईसीएआर की अहम भूमिका
आईसीएआर और उससे जुड़े अनुसंधान संस्थानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसी फसलों की सूची तैयार करें, जिनका उत्पादन देश में बढ़ाया जाना चाहिए। वैज्ञानिक स्तर पर किसानों को नई तकनीक और उन्नत बीज उपलब्ध कराए जाएंगे।
नई फसलों से किसानों को अवसर
एवोकाडो, ड्रैगन फ्रूट और अन्य उभरती फसलें अब सिर्फ शहरी उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रह गई हैं। यदि इनकी खेती को बढ़ावा दिया जाए, तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी किसानों को अच्छा मुनाफा मिल सकता है।
लाभप्रदता होगी आधार
कृषि मंत्री ने साफ कहा कि किसान तभी नई फसल अपनाएगा, जब उसे फायदा होगा। इसलिए सरकार उत्पादन से पहले बाजार की मांग और कीमतों का आकलन करेगी।
सब्जियों में आत्मनिर्भर भारत
सब्जियों के क्षेत्र में भारत पहले से मजबूत स्थिति में है। अब जरूरत बेहतर आपूर्ति श्रृंखला और भंडारण सुविधाओं की है, ताकि किसानों को सही मूल्य मिल सके।
पीएम किसान योजना का व्यापक असर
पीएम किसान योजना किसानों को आर्थिक सुरक्षा देती है। इसके साथ यदि उत्पादन और बाजार दोनों मजबूत किए जाएं, तो खेती वास्तव में लाभ का सौदा बन सकती है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती
इस नीति से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।



