‘बाल विवाह मुक्त अलवर’ अभियान के तहत कार्यशाला आयोजित, प्रभावी रोकथाम उपायों पर व्यापक मंथन

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित 100 दिवसीय ‘आशा अभियान’ और राष्ट्रीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार गुरुवार को प्रतापगढ़ ऑडिटोरियम, अलवर में ‘बाल विवाह मुक्त अलवर’ अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और बाल संरक्षण से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
न्यायिक अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ आयोजन
कार्यशाला की अध्यक्षता जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनंत भंडारी ने की। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अलवर के पूर्णकालिक अध्यक्ष मोहनलाल सिंधी की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम में बाल निर्देश अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग तथा पुलिस प्रशासन के प्रतिनिधियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
बाल विवाह के दुष्परिणामों पर विशेषज्ञों की राय
कार्यशाला के दौरान बाल विवाह की रोकथाम से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि बाल विवाह एक सामाजिक कुरीति होने के साथ-साथ नाबालिगों के भविष्य, शिक्षा और स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालने वाला अपराध है। वक्ताओं ने जागरूकता अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने, स्कूल स्तर पर संवाद कार्यक्रम आयोजित करने और सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
कानूनी सहायता और त्वरित कार्रवाई पर जोर
चर्चा के दौरान पीड़ित नाबालिगों को कानूनी सहायता, परामर्श, पुनर्वास और सुरक्षा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर भी विस्तार से मंथन किया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बाल विवाह की सूचना मिलने पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
कार्यक्रम के अंत में सभी विभागों ने आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए अलवर जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प दोहराया। इसे अभियान को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।



