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10 साल बाद न्याय: चुनावी रंजिश में हुए हत्याकांड में 23 लोगों को जेल; 12 को उम्रकैद, 11 को मिली यह कठोर सजा

Bharatpur News: भरतपुर के 2015 के हत्याकांड में अदालत ने 23 आरोपियों को दोषी ठहराया। 12 को उम्रकैद और 11 को सात-सात साल की सजा मिली। तीन आरोपियों की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी थी। मामला चुनावी रंजिश से जुड़ा बताया गया।

10 years after infamous Bharatpur murder case 12 people sentenced to life imprisonment and 11 to 7 years each

भरतपुर में 10 साल पुराने चर्चित हत्याकांड और मारपीट मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-3 ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने दो परिवारों के कुल 23 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 12 आरोपियों को आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं 11 अन्य आरोपियों को सात-सात वर्ष के कारावास से दंडित किया गया। सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों की मृत्यु हो चुकी थी, जिन्हें भी न्यायालय ने दोषी माना।

स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम से उपजा विवाद
अपर लोक अभियोजक धर्मेंद्र कुमार के अनुसार, घटना 15-16 अगस्त 2015 की है। चिकसाना थाना क्षेत्र के गांव पीपला में 15 अगस्त को सरकारी स्कूल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दो पक्षों के बीच कहासुनी और विवाद हुआ था। अगले दिन 16 अगस्त को यह विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। मामले में पूर्व सरपंची चुनाव को लेकर दोनों पक्षों के बीच रंजिश की बात भी सामने आई।

बस स्टैंड पर मारपीट और गोलीकांड
रिपोर्ट के अनुसार, दयाचंद ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसका भतीजा राकेश गांव के बस स्टैंड पर खड़ा था। इसी दौरान सौदान सिंह ने अपने परिजनों के साथ मिलकर राकेश के साथ मारपीट शुरू कर दी। जब राकेश को बचाने उसके परिजन पहुंचे तो उनके साथ भी मारपीट की गई। जांच में सामने आया कि मारपीट के दौरान चरन सिंह उर्फ चन्नो ने राकेश को गोली मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना में परिवार के अन्य सदस्य भी घायल हुए थे।

न्यायालय से सजा बूलने के बाद आरोपियों को जेल की बस तक ले जाते पुलिसकर्मी

उम्रकैद पाने वाले आरोपी
न्यायालय ने आरोपी गुलाब, करतार, होरीलाल, गुड्डू, चरन सिंह, ओमी, रघुवीर, महेश, मुकेश, भगवान सिंह, लाखन और खजान सिंह उर्फ खज्जो को आजीवन कारावास एवं 20-20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। वहीं तेजपाल, अटलबिहारी, तेज सिंह, दयाचंद, नरेन्द्र, प्रभु, वीरेन्द्र, चरन सिंह, दिनेश और टीकम सहित कुल 11 आरोपियों को सात-सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई।

दूसरे पक्ष की रिपोर्ट और जांच
घटना के बाद दूसरे पक्ष के श्यामलाल ने भी चिकसाना थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने दयाचंद और उसके परिजनों पर हमला करने का आरोप लगाते हुए 54 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने जांच के बाद 11 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया। ट्रायल के दौरान अदालत ने चार और लोगों को आरोपी माना।

सुनवाई के दौरान तीन की मृत्यु
मामले की सुनवाई के दौरान भोजाराज, सौदान और राजू की मृत्यु हो गई। न्यायालय ने उन्हें भी दोषी माना। शेष 12 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। न्यायालय में गवाही के दौरान मृतक राकेश के पक्ष से बयान देते हुए राजाराम ने कहा कि सरपंच चुनाव में उन्होंने सौदान सिंह को वोट नहीं दिया था। गांव में दो पैनल थे और उसी चुनावी रंजिश के चलते यह घटना हुई।

फैसले के समय न्यायालय परिसर में भीड़
फैसले के दौरान न्यायालय परिसर में दोनों पक्षों के बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। सजा का एलान होते ही परिजन आरोपियों से मिलने की कोशिश करते रहे, लेकिन पुलिस सुरक्षा के चलते बातचीत नहीं हो सकी। आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच जेल बस तक ले जाया गया। इस दौरान कुछ ग्रामीण वीडियो बनाते नजर आए। बस में बैठे आरोपी अपने परिजनों को जरूरी सामान और मोबाइल आदि के बारे में जानकारी देते दिखाई दिए, वहीं परिजन उन्हें जल्द मिलने और कानूनी मदद दिलाने का भरोसा देते रहे। करीब एक दशक बाद आए इस फैसले से गांव में लंबे समय से चले आ रहे विवाद पर न्यायिक मुहर लग गई है।

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