राजस्थान विधानसभा: विमर्श शुल्क पर सदन में घिरी सरकार, कांग्रेस विधायक मनीष यादव बोले- ये 223 करोड़ का घोटाला

Rajasthan Assembly Session: राजस्थान विधानसभा में विमर्श शुल्क को लेकर हंगामा हुआ। कांग्रेस विधायक मनीष यादव ने 223 करोड़ रुपये की वसूली और जवाबों में विरोधाभास का आरोप लगाया। सरकार ने जवाब दिया, जबकि विपक्ष ने जांच और शुल्क वापसी
राजस्थान विधानसभा में बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान जोरदार हंगामा हुआ। पहले जनजातीय छात्रावासों में खाद्य सामग्री आपूर्ति का मुद्दा उठा और इसके बाद प्रदेश के तीन विश्वविद्यालयों में लिए जा रहे विमर्श शुल्क को लेकर सरकार घिर गई। इस दौरान कांग्रेस विधायक मनीष यादव ने सवाल किया कि निजी विश्वविद्यालयों में स्वयंपाठी छात्रों से प्रति छात्र एक हजार रुपये का विमर्श शुल्क किन नियमों के तहत वसूला जा रहा है।
जवाबों में विरोधाभास का आरोप
सरकार की ओर से उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा जवाब देने के लिए खड़े हुए। इस पर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि एक ही सवाल के दो अलग-अलग जवाब दिए गए हैं। मनीष यादव ने कहा कि यही प्रश्न उन्होंने अतारांकित प्रश्न में भी पूछा था, जिसमें मंत्री की ओर से अलग जवाब दिया गया, जबकि तारांकित प्रश्न में अलग जानकारी दी गई। यादव ने कहा कि विमर्श शुल्क के नाम पर 223 करोड़ रुपये वसूले गए, लेकिन सरकार यह स्पष्ट नहीं कर रही कि इस राशि से कितने विद्यार्थियों को कब-कब विमर्श दिया गया
नेता प्रतिपक्ष ने जताई आपत्ति
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार के जवाब पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मंत्री सदन को गुमराह कर रहे हैं और यह विशेषाधिकार उल्लंघन की श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा कि मंत्री से पूछा गया था कि किस अधिनियम के तहत शुल्क वसूला जा रहा है, लेकिन जवाब में आदेश की प्रति पढ़ी गई।
जूली ने कहा कि बच्चों से एक-एक हजार रुपये किस आधार पर लिए जा रहे हैं और इसे वापस कराया जाना चाहिए। मामले के गरमाने पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच तीखी बहस हुई। कांग्रेस विधायक मनीष यादव विरोध जताते हुए वेल की ओर बढ़े, जिस पर स्पीकर ने उन्हें सीट पर लौटने की चेतावनी दी।
सदन के बाहर भी जारी रही बयानबाजी
सदन के बाहर मनीष यादव ने कहा कि प्रश्न परीक्षा शुल्क के अलावा विमर्श शुल्क के वैधानिक आधार और उससे विद्यार्थियों को हुए लाभ को लेकर था। उन्होंने कहा कि राजस्थान विश्वविद्यालय, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय और मत्स्य विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षा शुल्क के अतिरिक्त विमर्श शुल्क लिया गया।
उनके अनुसार प्रदेश में लगभग 23 लाख विद्यार्थियों से 223 करोड़ रुपये वसूले गए। उन्होंने कहा कि मंत्री के जवाब में पहले परीक्षा शुल्क और विमर्श शुल्क को एक बताया गया, जबकि दूसरे परिशिष्ट में दोनों को अलग बताया गया। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों की ओर से भेजे गए जवाब में विभिन्न वर्षों से शुल्क वसूले जाने की जानकारी दी गई और इसे परीक्षा कार्यों में उपयोग करने का उल्लेख किया गया।
यादव ने कहा कि उन्होंने 21 अगस्त 2025 को भी यही प्रश्न पूछा था, जिसमें अलवर विश्वविद्यालय ने पहले 2016 से शुल्क लेने की बात कही थी, जबकि अब 2018 से लेने की जानकारी दी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कितने विद्यार्थियों को विमर्श दिया गया, इसका जवाब नहीं दिया गया और इसे 223 करोड़ रुपये का घोटाला बताया। साथ ही मामले की जांच की मांग की।



