Bhiwadi Blast: फैक्टरी का मालिक-मैनेजर गिरफ्तार, पुलिसवाले का भाई निकला आरोपी; कांग्रेस का प्रदर्शन क्यों?

Bhiwadi Illegal Firecracker Factory Blast Update: भिवाड़ी के खुशखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया में अवैध पटाखा फैक्टरी में हुए धमाके के मामले में पुलिस ने मालिक हेमंत कुमार शर्मा और मैनेजर अभिनंदन को गिरफ्तार किया है। हादसे में आठ लोगों की मौत हुई थी और 4 गंभीर घायल हो गए थे। एक अन्य आरोपी की तलाश जारी है।
भिवाड़ी के खुशखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया में 16 फरवरी को अवैध रूप से पटाखा निर्माण के दौरान हुए भीषण धमाके के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए फैक्टरी मालिक हेमंत कुमार शर्मा और मैनेजर अभिनंदन को गिरफ्तार कर लिया है। हेमंत, भिवाड़ी पुलिस की डीएसटी टीम में तैनात हेड कॉन्स्टेबल योगेश कुमार शर्मा का भाई है, जिससे मामला और भी संवेदनशील हो गया है।
भिवाड़ी एएसपी अतुल साहू ने बताया कि इस मामले में कुल 4 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया था। इनमें फैक्टरी मालिक हेमंत कुमार (निवासी शाहजहांपुर, खैरथल-तिजारा), मैनेजर अभिनंदन (निवासी मोतिहारी, बिहार), प्लॉट मालिक राजेंद्र कुमार (निवासी गाजियाबाद, यूपी) और ठेकेदार अजीत (निवासी खुशखेड़ा, भिवाड़ी) शामिल हैं।

चार में से दो आरोपी हेमंत और अभिनंदन को गिरफ्तार कर लिया गया है। ठेकेदार अजीत की हादसे में ही मौत हो चुकी है। वहीं, तीसरे नामजद आरोपी प्लॉट मालिक राजेंद्र कुमार के गाजियाबाद स्थित घर पर 16 फरवरी की रात पुलिस टीम पहुंची थी।
परिजनों ने बताया कि राजेंद्र ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित है और अस्पताल में उपचाराधीन है। 17 फरवरी को उसके परिजन खुशखेड़ा थाने पहुंचे और लिखित आश्वासन दिया कि वे राजेंद्र को पेश करेंगे। यदि गुरुवार तक वह उपस्थित नहीं होता है तो पुलिस दोबारा दबिश देकर गिरफ्तारी का प्रयास करेगी।
हादसे के बाद जांच में बड़ा खुलासा हुआ। 17 फरवरी को घटनास्थल से करीब 500 मीटर के दायरे में एक और अवैध पटाखा फैक्टरी और एक गोदाम संचालित होने की जानकारी मिली। ये दोनों भी हेमंत कुमार शर्मा के स्वामित्व में पाए गए। पुलिस ने इन्हें भी सील कर दिया है। मृतकों के शवों का डीएनए परीक्षण और मेडिकल बोर्ड से पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है। जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क और लापरवाही के पहलुओं की गहन पड़ताल में जुटी हैं।
भिवाड़ी अग्निकांड पर कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन
भिवाड़ी में हुए भीषण अग्निकांड को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ने बुधवार को मिनी सचिवालय पर जोरदार प्रदर्शन करते हुए धरना दिया। बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी एकत्रित होकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपने पहुंचे, लेकिन मौके पर कोई जिम्मेदार अधिकारी उपस्थित नहीं मिला। अधिकारियों की गैरमौजूदगी से कार्यकर्ताओं में गहरा आक्रोश फैल गया और उन्होंने इसे पीड़ित परिवारों की अनदेखी बताया।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन जानबूझकर जनप्रतिनिधियों और मृतकों के परिजनों की आवाज से दूरी बना रहा है। काफी देर तक इंतजार करने के बावजूद जब कोई अधिकारी वार्ता के लिए बाहर नहीं आया तो कार्यकर्ता मिनी सचिवालय की सीढ़ियों पर ही बैठ गए और धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई गई।
धमाके में ठेकेदार सहित आठ लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 4 मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए थे। घायलों का इलाज जारी है। हादसे के बाद पूरे औद्योगिक क्षेत्र में हड़कंप मच गया था और प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फैक्टरी को सील कर दिया था
धरने के बाद अंततः प्रशासनिक अधिकारियों ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने अग्निकांड में मृतकों के परिवारों को न्याय दिलाने, दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग रखी।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रकाश गंगावत ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा घोषित तीन-तीन लाख रुपये का मुआवजा बेहद अपर्याप्त है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी त्रासदी में अपनों को खोने वाले परिवारों के लिए यह राशि ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ समान है। गंगावत ने मांग की कि प्रत्येक मृतक के परिजन को कम से कम 50 लाख रुपये का मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
उन्होंने अलवर जिले की सभी औद्योगिक इकाइयों और फैक्टरियों की व्यापक सुरक्षा जांच कराने की भी मांग उठाई। उनका कहना था कि कई स्थानों पर सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है, जिससे भविष्य में फिर किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।



