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QR कोड से वसूली: जयपुर ट्रैफिक कॉन्स्टेबल समेत 3 गिरफ्तार।

जनता बेहाल, वसूली बेमिसाल! जयपुर ट्रैफिक पुलिस की शर्मनाक हरकत

क्राइम इंडिया टीवी डिजिटल डेस्क।

मनोज कुमार सोनी। जयपुर। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पहले से ही अव्यवस्था और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी रही है। आए दिन पुलिसकर्मियों की अवैध रूप से पैसे मांगने की शिकायतें सामने आती रहती हैं, लेकिन हालात में सुधार के बजाय स्थितियां और खराब होती जा रही हैं। अब एक ताजा मामला सामने आया है जिसमें ट्रैफिक पुलिस के सिपाही और होमगार्ड ने मिलकर QR कोड से अवैध वसूली का धंधा चला रखा था।  यह पूरा खेल शहर के व्यस्त त्रिवेणी नगर चौराहे पर चल रहा था। ट्रैफिक कॉन्स्टेबल भवानी सिंह, होमगार्ड वकार अहमद और पंक्चर दुकानदार मोहम्मद मुस्ताक चालान नहीं काटने के बदले वाहन चालकों से ऑनलाइन पेमेंट के जरिए पैसे वसूलते थे। मुस्ताक की दुकान पर कॉन्स्टेबल के अकाउंट से जुड़े QR स्कैनर को लगाया गया था, जहां वाहन चालकों को पेमेंट करने के लिए मजबूर किया जाता था और रकम सीधे भवानी सिंह के खाते में जाती थी।

पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह लंबे समय से ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों को धमकाकर वसूली कर रहा था। किसी भी वाहन चालक को चालान से बचाने के नाम पर अलग-अलग रकम वसूल ली जाती थी। इस अवैध कमाई को तीनों आपस में बांटते थे। शुक्रवार देर रात सूचना मिलने के बाद बजाज नगर थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया। ऑनलाइन पेमेंट स्कैनर जब्त कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। शनिवार को इन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से तीनों को 3 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।

जांच अधिकारी और SHO बजाज नगर पूनम चौधरी ने बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपी जांच को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं इस गोरखधंधे में अन्य पुलिसकर्मी भी शामिल तो नहीं थे और यह नेटवर्क कितने समय से संचालित हो रहा था।

ट्रैफिक व्यवस्था की हकीकत यह है कि सड़क पर आमजन सुरक्षित नहीं और पुलिस की साख लगातार गिरती जा रही है। इससे पहले भी कई बार ट्रैफिक कर्मियों पर वसूली और दादागिरी के आरोप लगे, लेकिन सख्त कार्रवाई और उच्चस्तरीय मॉनिटरिंग ना होने से ऐसे मामले लगातार दोहराए जा रहे हैं। शहरवासी सवाल उठा रहे हैं कि जब कानून की रक्षा करने वाले ही कानून तोड़ने लगें, तो आम जनता किस पर भरोसा करे? इस मामले ने एक बार फिर जयपुर ट्रैफिक पुलिस की कार्यशैली और नियंत्रण प्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

 

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