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हस्तलिखित 100 अरब राम नाम के दर्शन का अद्भुत अवसर, गोविंददेवजी मंदिर में उमड़ेगी भक्तिभाव की गंगा।

1 से 10 दिसंबर—भक्तों के लिए स्वर्ग सा अनुभव, दिव्य परिक्रमा और कृपा वर्षा

गोविंददेवजी की नगरी में आस्था का महासागर, 100 अरब राम नाम से गूंजेगा सत्संग भवन।

मनोज कुमार सोनी। जयपुर। भगवान श्रीकृष्ण की पावन नगरी, जयपुर में स्थित श्री गोविंद देवजी मंदिर सदियों से भक्तों के हृदय में आस्था का केंद्र रहा है। आराध्य देव गोविंद देवजी के चरणों में बैठकर भक्त जिस भक्ति और प्रेम में डूब जाते हैं, वह उन्हें जीवनभर के लिए दिव्यता की अनुभूति करा देता है। इसी आध्यात्मिक वातावरण में अब एक बार फिर वह क्षण आने वाला है, जिसका इंतजार पूरे प्रदेश के भक्त उत्साह के साथ करते हैं। 1 दिसंबर से 10 दिसंबर तक गोविंददेवजी मंदिर परिसर में हस्तलिखित 100 अरब से अधिक राम नाम महामंत्र का अद्भुत और अलौकिक दर्शन भक्तों को मिलेगा।यह दर्शन ही नहीं परिक्रमा का सौभाग्य भी प्रदान होगा, जहां हर कदम के साथ श्रद्धालु अपने मन, कर्म और बोल को राममय कर सकेंगे। मंदिर प्रवक्ता मानस गोस्वामी ने बताया कि मार्गशीर्ष माह की पुण्य वेला में यह आयोजन प्रद्युम्न कुमार गोस्वामी जी की स्मृति में किया जाता है।अजमेर स्थित राम नाम बैंक द्वारा संजोए गए राम नाम महामंत्र की करोड़ों-करोड़ पुस्तिकाएं गोविंददेवजी के सत्संग भवन में सजाई जाएंगी।यही नहीं, एक-एक मंत्र भक्ति की वह ऊर्जा समेटे है जो भक्तों के जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन ला सके।2005 में जब यह आयोजन पहली बार हुआ था, तब संग्रह मात्र 17 अरब मंत्रों का था।पिछले दो दशकों में यह संख्या बढ़कर 100 अरब मंत्रों तक पहुंच गई—यह स्वयं में आस्था की महासाधना है।भक्तों ने अपने हाथों से लिखकर यह मंत्र संजोए हैं, हर अक्षर में भक्ति की शक्ति और विश्वास की विजय झलकती है। अब तक जयपुर सहित अजमेर, उदयपुर, नाथद्वारा, भीलवाड़ा, झांसी, अहमदाबाद आदि कई नगरों में इस महोत्सव का आयोजन हो चुका है। परंतु गोविंददेवजी के दरबार में यह 11वीं दिव्य प्रस्तुति होने जा रही है।.गोविंददेवजी की छत्रछाया में राम नाम की महिमा भक्ति की परिक्रमा और मन की शांति सब एक साथ मिलने वाली है। जो भक्त इस परिक्रमा में शिरकत करेंगे, उनका मन राम-कृष्ण भक्ति की अखंड ज्योति से आलोकित हो उठेगा।

कहा भी गया हैराम नाम बिन सुख नाहींहर राम नाम मंत्र मनुष्य के दुख हरकर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग खोलता है। हर वर्ष की तरह इस बार भी लाखों भक्तों के पहुंचने की उम्मीद है। भक्तजन सुबह-सवेरे आरती और भजन के साथ परिक्रमा करेंगे और दिव्य अनुभूति से भर जाएंगे। प्रबंधन द्वारा दर्शन सुविधा, सुरक्षा और शब्द-संकीर्तन की विशेष व्यवस्था की गई है।

आइए- आराध्य की शरण में बैठे जहां भगवान श्रीकृष्ण स्वयं अपने भक्तों के बीच विराजते हैं, वहां जाकर राम नाम का महामंत्र पढ़ना, सुनना और परिक्रमा करना निश्चय ही जीवन को ईश्वरीय कृपा से भर देगा। आस्था के दीप जलाइए,राम नाम लिखिए,गोविंददेवजी की शरण में आइए,और भक्ति की परिक्रमा कीजिए। इस महोत्सव का उद्देश्य केवल परिक्रमा या कार्यक्रम भर नहीं है, बल्कि राम नाम को जन-जन तक पहुँचाना, हर हृदय में भक्ति की ज्योत जलाना और जीवन को सद्गुणों की राह पर अग्रसर करना है।

भजनों की धुन, शंखनाद और घंटों की मधुर ध्वनि से पूरा मंदिर परिसर रामकृष्ण भक्ति में डूब जाएगा। सत्संग भवन में प्रवेश करते ही भक्तों को ऐसा लगेगा मानो आस्था और आशा का समुद्र उमड़ पड़ा हो। जहां नजर जाएगी, राम नाम की पवित्र झंकार मन को ईश्वर के पथ पर ले चलेगी। महोत्सव के दौरान सुबह-शाम विशेष आरती, संगीत मय भजनों, कीर्तन और हनुमान चालीसा पाठ का भी आयोजन रहेगा। भक्तों को रामकथा और महापुरुषों के प्रवचन सुनने का भी अवसर मिलेगा।

आयोजकों ने बताया कि इस वर्ष बच्चों और युवाओं के लिए राम नाम लिखने की विशेष प्रेरणा मुहिम भी चलाई गई है, ताकि नई पीढ़ी धर्म की जड़ों से जुड़ी रहे। मंदिर प्रशासन का कहना है कि जो भक्त इन मंत्रों का दर्शन करेंगे, परिक्रमा पूरी करेंगे, उनके जीवन में भगवान की असीम कृपा बरसेगी। क्योंकि इन्होंने करोड़ों लोगों के हाथों से लिखे हर एक नाम में विश्वास, प्रेम और भक्ति का संकल्प समाया है।

कहा जाता है— जिसके जीवन में राम आ जाएं, वहाँ कोई कष्ट टिक नहीं सकता। देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालुओं की जयपुर आने की संभावना है। मंदिर परिसर में सुरक्षा, पार्किंग, जल-प्रसाद और मीडिया व्यवस्थाएँ सुदृढ़ रखी जा रही हैं। विशेष तौर पर दिव्यांग भक्तों के लिए भी सुविधाएँ सुनिश्चित की गई हैं। इस बार फूलों से सुसज्जित पवित्र पांडाल भक्तों में रूहानी अनुभूति जगाएगा।

भक्तों का कहना है कि गोविंददेवजी के इस अनूठे मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण स्वयं भक्तों के सामने आकर दर्शन देते हैं।उनके मुखमंडल पर बदलते भावों को भक्त हर दिन अनुभव करते हैं। यह अद्भुत और अलौकिक अनुभूति जगत के किसी और मंदिर में इतनी स्पष्टता से महसूस नहीं होती। यही कारण है कि यहां आकर केवल दर्शन ही नहीं होते व्यक्ति के जीवन की दिशा बदल जाती है।मन में सद्गुण आते हैं,नकारात्मकता मिटने लगती है और

भक्ति का अमृत जीवन में उतर आता है। महोत्सव में आने वाले भक्त निःस्वार्थ भाव से राम नाम पुस्तिकाओं का भी लेखन कर सकेंगे, जिससे आने वाले वर्षों में इस संख्या को और अधिक बढ़ाया जा सके। एक साधारण मनुष्य भी हर दिन थोड़ा-थोड़ा लिखकर भक्ति की महान साधना में सहभागी बन सकता है।आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि परिक्रमा से पहले मन को शांत कर प्रेम और समर्पण से नामस्मरण करें, किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचें, बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सहयोग दें

माना जाता है कि जीवन में जो मनोकामना पूरी करनी हो, राम नाम परिक्रमा के दौरान हृदय से प्रार्थना की जाए,तो भगवान कृपा बरसाते हैं और रास्ते स्वयं खुलते चले जाते हैं।धर्म केवल मंदिर जाने का नाम नहीं,धर्म है भक्ति, प्रेम और सेवा का भाव।”जहाँ तक कदम चलते जाएं,वही तक भगवान का संरक्षण मिलता जाए। भगवान गोविंददेवजी की कृपा उन सभी पर बनी रहे जो अपने मन में अपार श्रद्धा लेकर इस मंदिर में दर्शन करने पहुंचेंगे।

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