जोधपुर न्यायिक तंत्र में भूचाल! 8 जज एक साथ APO, गलियारों में तेज चर्चा।
हाईकोर्ट का बड़ा प्रशासनिक एक्शन, 8 न्यायिक अधिकारी प्रतीक्षा सूची।

प्रशासनिक कारणों से 8 अधिकारी APO, कोर्ट सिस्टम में हलचल।
मनोज कुमार सोनी।जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट के ताज़ा प्रशासनिक आदेश ने जोधपुर के न्यायिक महकमे में अचानक हलचल बढ़ा दी है। एक साथ 8 न्यायिक अधिकारियों को APO किए जाने के फैसले को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया से कहीं अधिक गंभीर माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, इतने बड़े स्तर पर एक साथ APO की कार्रवाई दुर्लभ मानी जाती है। खास बात यह है कि जिन अधिकारियों को APO किया गया है, उनमें जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्तर से लेकर POCSO कोर्ट और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट स्तर तक के अधिकारी शामिल हैं।
कानूनी हलकों में इस आदेश को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि आदेश में स्पष्ट रूप से “प्रशासनिक आवश्यकताओं” का उल्लेख किया गया है।लेकिन एक साथ इतने अधिकारियों को प्रतीक्षा सूची में रखने से न्यायिक कार्यप्रणाली पर अस्थायी प्रभाव पड़ सकता है।
बताया जा रहा है कि जिन अदालतों में ये अधिकारी कार्यरत थे, वहां अब नए पदस्थापन आदेश तक वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। इससे लंबित मामलों की सुनवाई की गति पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
जोधपुर महानगर और जिला स्तर की कई अहम अदालतें इस आदेश से सीधे प्रभावित हुई हैं। विशेष रूप से POCSO जैसे संवेदनशील मामलों की सुनवाई करने वाली अदालत में बदलाव को गंभीर माना जा रहा है।
न्यायिक सूत्रों का कहना है कि APO का अर्थ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं होता, बल्कि यह प्रशासनिक पुनर्संरचना का हिस्सा भी हो सकता है। फिर भी एक साथ 8 अधिकारियों को APO करना असाधारण कदम माना जा रहा है। यह भी चर्चा है कि जल्द ही बड़े स्तर पर नए पदस्थापन आदेश जारी हो सकते हैं, जिससे न्यायिक ढांचे में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकता है।
हाईकोर्ट के इस आदेश की कॉपी राज्य के प्रमुख प्रशासनिक अधिकारियों, विधि विभाग और संबंधित जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को भी प्रेषित की गई है, जिससे स्पष्ट है कि मामला उच्च स्तर पर समन्वय के साथ लिया गया निर्णय है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस निर्णय के दूरगामी प्रभाव सामने आ सकते हैं। फिलहाल पूरे न्यायिक महकमे की नजर अगली पोस्टिंग सूची पर टिकी हुई है।



