राज्य सरकार ने बिजली दरों में की गई वृद्धि को रद्द कर दिया है।

राज्य में बिजली दर वृद्धि को लेकर अनेक घटनाक्रम सामने आए। हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग (एमईआरसी) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके कारण राज्य में कई उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में बढ़ोतरी हो गई थी। यह निर्णय राज्यभर के उपभोक्ताओं, विशेष रूप से अक्षय ऊर्जा कंपनियों के ग्राहकों, के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा गया। एमईआरसी के आदेश में यह भी प्रावधान था कि सौर ऊर्जा कंपनियों के उपभोक्ताओं को प्रतिदिन सिर्फ आठ घंटे बैंक में संग्रहित ऊर्जा उपयोग की छूट मिलेगी, जबकि पहले १७ घंटे की छूट थी। न्यायालय ने इसे मूल आदेश से महत्वपूर्ण बदलाव मानते हुए सबको नए सिरे से सुनवाई का आदेश दिया।
इस फैसले का राज्य के जनमानस में अच्छा प्रभाव पड़ा। उपभोक्ताओं और सामाजिक संगठनों ने खुशी व्यक्त की, क्योंकि बढ़ी हुई दरें न केवल आम नागरिक की वित्तीय स्थिति पर दबाव डालती थीं, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र एवं किसानों पर भी बोझ बढ़ जाता था। दूसरी ओर, यह भी तर्क दिया गया कि बिजली कंपनियां अपने घाटे को कम करने के लिए दरें बढ़ाना चाहती थीं, परंतु उपभोक्ता परिषद और अन्य संगठन लगातार विरोध कर रहे थे। उन्होंने मांग रखी कि सार्वजनिक हित और वित्तीय समृद्धि के लिए बिजली दरों में वृद्धि न की जाए।
राज्य के पावर कॉर्पोरेशन द्वारा घाटे का हवाला देते हुए दरें बढ़ाने का प्रस्ताव नियामक आयोग के समक्ष पेश किया गया था, किंतु जन प्रतिरोध को देखकर आयोग ने निर्णय लिया कि उपभोक्ताओं को राहत देना आवश्यक है। कई वर्षों से राज्य में बिजली दरें स्थिर रखी गई थीं और सार्वजनिक दबाव व आंकड़ों का विश्लेषण सामने रखने के बाद, नियामक आयोग ने वृद्धि प्रस्ताव को खारिज कर जनता को राहत प्रदान की।
इस घटनाक्रम के परिणामस्वरूप राज्य में औद्योगिक इकाइयों, कृषकों, घरेलू उपभोक्ताओं व व्यवसायियों को बिजली के खर्च में बढ़ोतरी का डर नहीं रहा। विशेषज्ञों का भी मत था कि यदि अभावग्रस्त क्षेत्रों में बिजली दरें और बढ़ती तो आर्थिक असमानता और सामाजिक असंतुलन को बढ़ावा मिलता।
इस प्रकार, बिजली दर वृद्धि का आदेश रद्द होने से राज्य में जन सामान्य, विशेषकर मध्यम और निम्नवर्गीय परिवारों, किसानों, माइक्रो एवं स्मॉल इंडस्ट्रीज़, अस्पतालों आदि की वित्तीय स्थितियों को राहत मिली। जनता ने न्यायालय व नियामक आयोग का धन्यवाद व्यक्त किया और उम्मीद जताई कि भविष्य में भी ऐसी निर्णयप्रणाली बनी रहेगी जिससे उपभोक्ता हित सुरक्षित रहें और जनता का विश्वास तंत्र और न्यायपालिका पर मजबूत हो।



