Life Styleसुबह की खाश खबरेंसुबह के प्रमुख समाचार

100 रुपये भी नहीं थी Dharmendra की पहली सैलरी, डेब्यू मूवी के लिए मिले थे इतने पैसे

  1. धर्मेंद्र की पहली सैलरी: 100 रुपये से भी कम में शुरू हुआ था हिंदी सिनेमा का ‘ही-मैन’ सफर

    बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता धर्मेंद्र आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। उन्हें हिंदी सिनेमा का ही-मैन कहा जाता है। उनकी शानदार एक्टिंग, दमदार डायलॉग डिलीवरी और सादगी ने लाखों लोगों का दिल जीता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि जिस अभिनेता ने आगे चलकर करोड़ों कमाए, उसकी पहली सैलरी 100 रुपये से भी कम थी।

    🎬 धर्मेंद्र का फिल्मी सफर कैसे शुरू हुआ

    धर्मेंद्र का जन्म पंजाब के लुधियाना ज़िले के नसराली गाँव में हुआ था। बचपन से ही उन्हें फिल्मों का बहुत शौक था। वे गांव में सिनेमा देखने के लिए मीलों पैदल चलते थे।
    धीरे-धीरे यह शौक उनके सपने में बदल गया — “एक दिन मैं भी फिल्मों में काम करूँगा।”

    1958 में फिल्मफेयर मैगज़ीन ने “न्यू टैलेंट हंट” नामक एक प्रतियोगिता रखी थी। धर्मेंद्र ने इसमें भाग लिया और उन्हें चुना गया। यही उनके फिल्मी करियर की शुरुआत बनी।

    🎥 पहली फिल्म और पहली सैलरी

    धर्मेंद्र को उनकी पहली फिल्म ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ (1960) में काम करने का मौका मिला।
    यह फिल्म बहुत बड़ी हिट तो नहीं हुई, लेकिन यहीं से उनके अभिनय का सफर शुरू हुआ।
    इस फिल्म के लिए उन्हें जो मेहनताना मिला, वह था — सिर्फ 51 रुपये!
    हाँ, आपने सही पढ़ा — सिर्फ इक्यावन रुपये!

    उस दौर में यह रकम भी किसी नौसिखिए कलाकार के लिए बड़ी बात थी, लेकिन धर्मेंद्र के सपनों के सामने यह छोटी नहीं, बल्कि प्रेरणा थी। उन्होंने इसे एक शुभ शुरुआत माना और मेहनत जारी रखी।

    💪 संघर्ष से सफलता तक का सफर

    धर्मेंद्र ने शुरूआती दिनों में बहुत संघर्ष किया। पैसों की कमी थी, मुंबई में रहना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
    धीरे-धीरे उन्हें पहचान मिली — ‘फूल और पत्थर’ (1966) जैसी फिल्मों से वे दर्शकों के दिलों में बस गए।

    इसके बाद शोले, चुपके-चुपके, यादों की बारात, सीता और गीता, धरम वीर, शोला और शबनम जैसी फिल्मों ने उन्हें हिंदी सिनेमा का सुपरस्टार बना दिया।

    ❤️ धर्मेंद्र की सादगी आज भी कायम

    धर्मेंद्र हमेशा अपनी सादगी और विनम्र स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। करोड़ों की सफलता के बावजूद उन्होंने कभी अपने शुरुआती दिनों को नहीं भुलाया।
    वे अक्सर कहते हैं —

    “मैं आज भी वही गाँव का साधारण लड़का हूँ, जिसने 51 रुपये लेकर अपना सपना शुरू किया था।”

    🌟 निष्कर्ष

    धर्मेंद्र की पहली सैलरी भले ही 100 रुपये से कम रही हो, लेकिन उनकी मेहनत, लगन और जज्बे ने उन्हें हिंदी सिनेमा का “ही-मैन” बना दिया।
    उनकी कहानी हमें यह सिखाती है कि —
    रकम छोटी हो सकती है, पर सपनों की उड़ान नहीं।

Related Articles

Back to top button