सरकारी प्रयासों से दशकों बाद बस्तर के दूरदराज गांव में नेटवर्क आया।

कोंडापल्ली—जहां जंगलों की खामोशी टूटकर पहली बार मोबाइल की घंटी सुनाई दी
दुनिया भर में तकनीक की रफ्तार कभी रुकती नहीं। शहरों में 5G तेज़ी से फैल रहा है, मेट्रो ट्रेनों में इंटरनेट मिल रहा है, और लोग वर्चुअल रियलिटी में नए अनुभव खोज रहे हैं।
लेकिन इसी देश में—घने लकड़ी के जंगलों और ऊँचे पहाड़ों के बीच—एक ऐसा गांव था, जो 75 साल बाद भी दुनिया से उस तरह जुड़ा नहीं था जैसे भारत के बाकी लोग थे।
कोंडापल्ली, बस्तर के बीजापुर जिले का यह गांव, एक ऐसा नाम था जो अक्सर खबरों में सुरक्षा, हिंसा और संघर्ष के कारण ही उभरता था।
लेकिन इस बार खबर बिल्कुल उलट थी।
इस बार कोंडापल्ली दुनिया से “कटने” की वजह से नहीं, बल्कि दुनिया से “जुड़ने” की वजह से सुर्खियों में था।
1. गांव जो सैटेलाइट मैप पर भी धुंधला दिखता था
कोंडापल्ली को मानो समय ने पीछे छोड़ दिया था।
वर्षों तक यह गांव किसी दूरस्थ द्वीप की तरह रहा—
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सड़कें टूटीं
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बिजली अनुपस्थित
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सरकारी कर्मचारी मुश्किल से पहुँच पाते
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और सबसे बड़ा—संचार का अभाव
मोबाइल नेटवर्क की बात तो दूर, यहां ऐसे घर भी थे जिन्होंने कभी मोबाइल फोन को काम करते हुए नहीं देखा था।
गांव की पहचान सिर्फ एक ही थी—
माओवादियों का गढ़।
2. सुरक्षा बलों के कैंप ने हवा पलटी
दिसंबर 2024 में जब क्षेत्र में सुरक्षा कैंप स्थापित हुआ, तभी बदलावों की पहली आहट सुनाई दी।
पहले-पहल गांव वाले दूर से देखते, फिर धीरे-धीरे बातचीत शुरू हुई।
लोहे की चादरों से बनते कैंप के साथ रिश्तों की मजबूत दीवार भी बनती चली गई।
और इसी दौरान कोंडापल्ली के लिए सबसे बड़ा प्लान तैयार हुआ—
यहां मोबाइल नेटवर्क लाना है।
सरकारी इंजीनियरों, सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन की टीमों ने इसे चुनौती की तरह लिया।
क्योंकि यहां टावर लगाना आम काम नहीं था, यह सुरक्षा और भरोसे दोनों की परीक्षा थी।
3. महीनों की मेहनत—और फिर टावर खड़ा हुआ
एक-एक सामान को जंगल, पहाड़ियों और कच्ची पगडंडियों से ढोकर लाना पड़ा।
कई दिन वन क्षेत्र में फंसे हुए उपकरण, भारी बारिश, सुरक्षा जोखिम—हर चीज़ ने यह काम कठिन बनाया।
लेकिन एक दिन, जब विशाल टावर आखिरकार खड़ा हो गया, गांववालों के चेहरे पर उम्मीद का चंद्रमा उग आया।
उन्हें पता था—अब बस वह पल चाहिए जब पहली बार फोन का सिग्नल आएगा।
4. वह ऐतिहासिक पल—जब “नेटवर्क आया!” की आवाज गूंजी
अधिकारियों ने जैसे ही कहा कि टावर शुरू हो गया है, पूरा गांव हिलता हुआ टावर की तरफ दौड़ा।
कोई बच्चा मोबाइल लेकर पहली बार “नेटवर्क सर्च” कर रहा था,
कोई महिला दुपट्टा संभालते हुए तेजी से चल रही थी,
और बुजुर्गों की आंखों में वह चमक थी जो उम्र से नहीं, उम्मीद से आती है।
फिर…
मोबाइल की स्क्रीन पर पहली बार “4G” चमका।
गांव में जो हुआ, वह शब्दों में बयां करना कठिन है।
रोमांच, खुशी, हैरानी, विश्वास—सब एक साथ फूट पड़ा।
5. टावर की पूजा—विकास का पहला उत्सव
कोंडापल्ली के लोगों ने टावर के चारों ओर घेरा बनाकर पूजा की।
नारियल फूटा, फूल चढ़ाए गए, दीया जला।
टावर उनके लिए सिर्फ एक मशीन नहीं था—
यह थी उनके सपनों की सीढ़ी।
मांदर की थाप पर पूरे गांव ने नृत्य किया।
बच्चे कूदते रहे, महिलाएं झूमती रहीं, और पुरुषों की आंखें पहली बार गर्व से चमक उठीं।
ऐसा लगा मानो जंगल भी इस खुशी में सांसें तेज़ कर रहा हो।
6. सुरक्षा जवान—अब सिर्फ रक्षक नहीं, सहभागी भी
गांव और सुरक्षा बलों के बीच इन वर्षों में संदेह का गहरा पर्दा था।
लेकिन इस दिन वह पर्दा पूरी तरह गिर गया।
सुरक्षा बल मिठाइयां लेकर आए।
उन्होंने गांववालों के साथ तस्वीरें लीं, बच्चों को गिफ्ट दिए, और उनकी खुशी में सच्चे साथी बने।
यह एक नई शुरुआत का संकेत था—
डर की जगह भरोसा।
दूरी की जगह संवाद।
7. 728 टावरों का जाल—बस्तर में तकनीकी क्रांति
बीते दो सालों में बस्तर में इतनी बड़ी संचार क्रांति आई है कि आज वह भारत के डिजिटल नक्शे में मजबूती से शामिल है।
क्षेत्र में लगाए गए—
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728 नए टावर
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467 केवल 4G के टावर
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449 अपग्रेडेड 4G टावर
इनकी वजह से अब हजारों लोग पहली बार डिजिटल सुविधाओं से जुड़कर अपना जीवन आसान बना पाएंगे।
बस्तर के लिए यह असंभव जैसा काम था—और आज वह पूरा हो चुका है।
8. नियद नेल्ला नार योजना—एक नीति जिसने जमीन पर बदलाव किए
यह योजना सिर्फ कागजों पर लिखी रणनीति नहीं थी,
यह गांव-गांव जाकर डर को हराने और विकास को पहुंचाने का मिशन थी।
“आपका सबसे अच्छा गांव”—
इस नाम में छुपा लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट था—
हर गांव को एक बेहतर, सुरक्षित और जुड़ा हुआ गांव बनाना।
कोंडापल्ली आज इस योजना का जीवंत उदाहरण बन चुका है।
9. गांव में आए बड़े परिवर्तन
• सड़क का नया जीवन
BRO 50 किमी लंबे रूट को फिर से बना रहा है।
जहां कभी घंटों जंगल पार करने पड़ते थे, अब रास्ता आसान होगा।
• बिजली ने घरों में उम्मीद जलाई
दो महीने पहले पहली बार गांव में बल्ब जले।
पढ़ाई, व्यवसाय, रात की सुरक्षा—सब में बड़ा सुधार आया।
• मोबाइल नेटवर्क: सेवाओं का दरवाजा
अब गांववालों को—
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बैंकिंग
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पेंशन
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राशन
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स्वास्थ्य
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आधार सेवाएं
—सब मोबाइल पर मिल सकेंगी।
यह पहले किसी सपने जैसा था।
10. युवाओं के लिए यह सिग्नल सच में “नई दुनिया” है
ऑनलाइन पढ़ाई, सरकारी फॉर्म, खेती की जानकारी, नौकरी के आवेदन, नए अवसर—
इन सब तक पहली बार पहुंच बनी है।
एक युवा ने कहा—
“अब हम भी समय के साथ चलेंगे।”
इन शब्दों में भविष्य की पूरी कहानी छिपी है।
11. मुख्यमंत्री का संदेश—सीधा दिल में उतर जाने वाला
विष्णु देव साय ने कहा—
“यह टावर नहीं… यह लोगों के सपने खड़े हुए हैं।”
कोंडापल्ली के लिए यह सिर्फ उद्घाटन नहीं था,
यह वह मान्यता थी जिसके लिए वे सालों से तरस रहे थे।
12. कोंडापल्ली—अब बस्तर की नई पहचान
आज यह गांव अपनी कहानी खुद लिख रहा है।
जहां कभी
डर का साया था,
वहां अब नेटवर्क की रोशनी है।
जहां खामोशी थी,
वहां अब रिंगटोन गूंजती है।
कोंडापल्ली का सिग्नल बता रहा है—
विकास देर से आए तो क्या… आता है तो सब कुछ बदल देता है।



