गुजरात में आतंक की बड़ी साजिश नाकाम, NIA ने पांच राज्यों में की बड़ी कार्रवाई

भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक बार फिर देश की सुरक्षा के लिए बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने गुजरात में एक आतंकी साजिश का खुलासा करते हुए पांच राज्यों में एक साथ छापेमारी की है। यह मामला अल-कायदा से जुड़े एक नेटवर्क से संबंधित बताया जा रहा है, जो भारत में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की योजना बना रहा था। इस कार्रवाई में कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है।
क्या है पूरा मामला
राष्ट्रीय जांच एजेंसी को कुछ समय पहले सूचना मिली थी कि अल-कायदा से जुड़ा एक गिरोह भारत में अपनी जड़ें फैलाने की कोशिश कर रहा है। बताया गया कि यह समूह देश के अलग-अलग हिस्सों में अपने लोगों की भर्ती कर रहा था और युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर झुका रहा था। एजेंसी को यह भी पता चला कि यह मॉड्यूल गुजरात के कुछ इलाकों में सक्रिय है और देश के खिलाफ हिंसक घटनाओं की तैयारी में लगा है।
इसी सूचना के आधार पर एनआईए ने एक बड़ी योजना बनाकर पांच राज्यों — गुजरात, महाराष्ट्र, केरल, उत्तर प्रदेश और दिल्ली — में एक साथ छापे मारे। यह छापेमारी अचानक की गई ताकि संदिग्धों को इसका अंदाजा न हो सके और वे सबूत नष्ट न कर पाएं।
छापेमारी में क्या मिला
एनआईए ने बताया कि तलाशी के दौरान कई महत्वपूर्ण डिजिटल उपकरण, मोबाइल फोन, लैपटॉप, पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क, और संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इसके अलावा, कुछ स्थानों से धार्मिक कट्टरता से जुड़े वीडियो, संदेश और विदेशी संपर्कों के रिकॉर्ड भी मिले हैं। ये सभी वस्तुएँ अब फोरेंसिक जांच के लिए भेजी गई हैं ताकि यह पता चल सके कि इनमें किस तरह की सूचनाएँ हैं और इनका संबंध किन-किन लोगों से है।
जांच एजेंसी का कहना है कि शुरुआती जांच से यह साफ हो रहा है कि यह गिरोह भारत में आतंकी नेटवर्क को मजबूत करने की कोशिश कर रहा था। यह समूह न केवल अल-कायदा से जुड़ा था, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को गुमराह करने का भी काम कर रहा था।
कब दर्ज हुआ था मामला
एनआईए ने इस मामले में जून 2023 में केस दर्ज किया था। यह मामला गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), भारतीय दंड संहिता (IPC) और विदेशी अधिनियम की कई धाराओं के तहत दर्ज किया गया था। इस कानून के तहत आतंक से जुड़ी गतिविधियों, षड्यंत्रों और विदेशी संगठनों के साथ संपर्क रखने पर सख्त सजा का प्रावधान है।
तब से ही एनआईए लगातार इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुँचने की कोशिश कर रही थी। कई महीनों की निगरानी और गुप्त जानकारी इकट्ठी करने के बाद एजेंसी को जब पर्याप्त सबूत मिले, तब जाकर यह बड़ी कार्रवाई की गई।
कौन हैं संदिग्ध
हालाँकि अभी तक एनआईए ने संदिग्धों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, इनमें कुछ ऐसे लोग भी शामिल हैं जो विदेशों में रह चुके हैं या जिनका संपर्क पाकिस्तान और बांग्लादेश में सक्रिय आतंकी संगठनों से रहा है। कुछ लोग ऑनलाइन माध्यमों से कट्टरपंथी सामग्री साझा करते थे और लोगों को “जिहाद” के नाम पर भड़काने की कोशिश करते थे।
एनआईए की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है
राष्ट्रीय जांच एजेंसी भारत की प्रमुख आतंक-निरोधी संस्था है। जब भी देश में किसी आतंकी गतिविधि या उससे जुड़ी साजिश का मामला सामने आता है, तो एनआईए उसे अपने हाथ में लेती है। यह एजेंसी सीधे केंद्र सरकार के अधीन काम करती है और उसे किसी भी राज्य में जाकर जांच करने का अधिकार है।
एनआईए की यही ताकत है कि वह देशभर में समन्वय बनाकर एक साथ कई जगहों पर कार्रवाई कर सकती है। गुजरात, दिल्ली, केरल, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में एक ही समय पर छापेमारी करना कोई आसान काम नहीं था, लेकिन एजेंसी ने यह दिखाया कि उसकी कार्यप्रणाली कितनी सशक्त और योजनाबद्ध है।
देश की सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क
इस कार्रवाई के बाद सभी राज्यों की पुलिस और खुफिया एजेंसियाँ भी सतर्क हो गई हैं। खासकर उन राज्यों में, जहाँ से संदिग्धों के तार जुड़े पाए गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी इस पूरी जांच की प्रगति पर नज़र रखी हुई है।
जानकारों का कहना है कि भारत में अल-कायदा और ISIS जैसे संगठन कई बार अपनी जड़ें फैलाने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी की वजह से उनकी योजनाएँ सफल नहीं हो पाईं। इस बार भी एनआईए ने समय रहते कार्रवाई कर देश को एक बड़ी आतंकी साजिश से बचा लिया।
आगे क्या होगा
अब एनआईए जब्त किए गए डिजिटल सबूतों की फोरेंसिक जांच कर रही है। इसके बाद यह पता लगाया जाएगा कि इन लोगों के संपर्क में और कौन-कौन था, और क्या देश के किसी और हिस्से में इनके नेटवर्क फैले हुए हैं। एजेंसी को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।
निष्कर्ष
एनआईए की यह कार्रवाई न केवल एक बड़ी सफलता है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि भारत में आतंक फैलाने की कोई भी कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आतंक के खिलाफ यह लड़ाई केवल एजेंसियों की नहीं, बल्कि पूरे देश की है। हमें भी सतर्क रहना चाहिए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत प्रशासन को देनी चाहिए।
भारत की सुरक्षा एजेंसियाँ लगातार यह साबित कर रही हैं कि वे देश के हर नागरिक की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। गुजरात में पकड़ा गया यह मॉड्यूल उसी का एक और उदाहरण है — कि आतंक की हर साजिश को समय रहते नाकाम किया जा सकता है, बस जागरूकता और मिलजुलकर प्रयास की जरूरत है।



