अंतरराष्ट्रीयआस्था

कामा को मिले उसका असली नाम ‘कामवन’, स्वर्णकार समाज ने मुख्यमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी की सौंपा ज्ञापन।

धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा, कामा को कामवन घोषित करने की माँग मुखर।

ब्रज की सांस्कृतिक विरासत का सम्मान—कामवन नाम बहाल करने की लड़ाई।

क्राइम इंडिया टीवी डिजिटल डेस्क। मनोज कुमार सोनीजयपुर/भरतपुर/कामा। धार्मिक नगरी कामा की प्राचीन पहचान, सांस्कृतिक विरासत और ब्रजमंडल से जुड़े गौरव को वापस दिलाने की माँग अब तेज़ हो गई है। मंगलवार को स्वर्णकार समाज के प्रतिनिधिमंडल ने उपखंड कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और कामा को उसके ऐतिहासिक नाम ‘कामवन’ से पुकारने एवं सरकारी स्तर पर घोषित करने की माँग रखी। स्वर्णकार समाज के अध्यक्ष हरिओम सोनी, संरक्षण लक्ष्मण प्रसाद सोनी, महामंत्री पवन कुमार सोनी, गिरिराज सोनी, मोनू सोनी, अशोक सोनी, राजू सोनी, पूर्व अध्यक्ष जयप्रकाश सोनी, पिंटू सोनी, ललित सोनी, बिल्लू सोनी, जगदीश सोनी (सिवार), जगदीश सोनी (नला बाजार), भोला सोनी समेत समाज के कई पदाधिकारी इस दौरान मौजूद रहे।

ज्ञापन में बताया गया कि वेद, पुराणों, धार्मिक ग्रंथों और ब्रज के इतिहास में इस नगरी का नाम सदैव कामवन के रूप में ही वर्णित किया गया है। यह वही भूमि है जहाँ कृष्ण-राधा की भक्ति परंपरा का अनवरत प्रवाह सदियों से बह रहा है। ब्रज 84 कोस पदयात्रा भी यहीं से होकर गुजरती है और यात्रियों का सबसे अधिक प्रवास काल यहीं निर्धारित है। यही कारण है कि भारतीय ही नहीं, विदेशी तीर्थयात्री भी इस भूमि को कामवन नाम से ही जानते और पहचानते हैं।

समाज ने कहा कि ब्रजधाम की धार्मिक सीमाएँ शास्त्रों में स्पष्ट रूप से अंकित हैं, ऐसे में शास्त्रोक्त आधार पर सरकार को इस नगरी का नाम बदलकर कामवन घोषित करने की वैधानिक पहल करनी चाहिए।यहाँ कामदेव, मदनमोहन, व्यास, विष्णुपुरी, श्री राधा-कृष्ण, बालाजी मंदिर, श्री किशोरी महल, मातंगी महल जैसे अनेक प्राचीन मंदिर और तीर्थस्थल मौजूद हैं। इन स्थलियों की वजह से प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु ब्रज-यात्रा के दौरान यहाँ दर्शन करने आते हैं। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि कामा नाम वर्तमान में धार्मिक-पौराणिक महिमा को कम करने वाला प्रतीत होता है। नगर की आत्मा, इतिहास और अध्यात्म कामवन नाम में ही समाहित है। इसलिए इस नाम को वापस देना संस्कृति और ब्रजभक्ति का सम्मान होगा।

सरकारी दस्तावेज़ों में बदलाव की माँग समाज ने राज्य सरकार, राजस्व विभाग, पर्यटन विभाग और मंदिर ट्रस्ट से आग्रह किया कि सभी सरकारी रिकॉर्ड, यातायात संकेतक, पर्यटन पुस्तिका, राजपत्र और राजस्व दस्तावेजों में कामवन नाम अंकित किया जाए। समाज के संरक्षक लक्ष्मण प्रसाद सोनी ने कहा कि प्रदेश सरकार को ब्रज-यात्रा, धार्मिक ग्रंथों और स्थानीय इतिहास के आधार पर नगर को उसकी असली पहचान लौटानी चाहिए। महामंत्री पवन कुमार सोनी ने इसे आस्था से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि वर्षों से संजोए इस सपने को साकार करने का समय आ गया है।

अध्यक्ष हरिओम सोनी ने उपखंड अधिकारी से इस मुहिम को जिला कलेक्टर और मुख्यमंत्री तक तत्परता के साथ भेजने का अनुरोध किया और सकारात्मक निर्णय की उम्मीद जताई।कामवन नाम से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के अवसर पैदा होंगे, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत का संरक्षण होगा तथा नगर की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित होगी। ज्ञापन सौंपने के बाद समाज के सदस्यों ने “जय श्री कामवन बूढ़ा धाम की” के जयकारों के साथ अभियान को जारी रखने का संकल्प दोहराया। समाज ने कहा कि जिले और प्रदेश के जनप्रतिनिधियों से मुलाकात का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।

Related Articles

Back to top button