भारत के बजाय चीन से नोट छपवाने के नेपाल के फैसले के पीछे आर्थिक, राजनीतिक और रणनीतिक हितों का जटिल समीकरण।

राष्ट्रों का भविष्य हमेशा उनके फैसलों से तय होता है—और कभी-कभी छोटे-से दिखने वाले निर्णय भी बहुत बड़ा संदेश दे जाते हैं। नेपाल ने जब यह तय किया कि वह अपने नोट चीन से छपवाएगा, तो यह केवल एक आर्थिक लेन-देन नहीं था; यह आत्मनिर्भरता, आधुनिकता और नए विकल्पों को अपनाने का एक उदाहरण बन गया।
दुनिया बदल रही है। तकनीक आगे बढ़ रही है। वे राष्ट्र आगे बढ़ते हैं जो बदलती परिस्थितियों को पहचानते हैं और आगे बढ़ने का साहस रखते हैं। नेपाल ने देखा कि चीन कम लागत में बेहतर तकनीक दे सकता है। नेपाल ने देखा कि वैश्विक दौर में विकल्पों की कमी नहीं है। और उसने वही चुना जो उसके लिए बेहतर था।
जब हम निर्णय लेते हैं, तो हमें भी यही सोचना चाहिए—क्या हम केवल आदतों पर चल रहे हैं? क्या हम सिर्फ इसलिए किसी राह पर टिके हुए हैं क्योंकि वह पुरानी है? जीवन में भी हमें कई बार ऐसे निर्णय लेने पड़ते हैं जो परंपरा से हटकर होते हैं, पर बेहतर भविष्य की ओर ले जाते हैं।
नेपाल का यह कदम हमें सिखाता है कि—
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विकल्प हमेशा होते हैं
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नई तकनीक नए अवसर लाती है
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और आत्मसम्मान व स्वतंत्रता हर राष्ट्र का आधार है
आज चीन दुनिया में करेंसी प्रिंटिंग का बड़ा केंद्र बन रहा है। नेपाल ने उससे 43 करोड़ नोट छपवाने का कॉन्ट्रैक्ट देकर यह दिखाया कि वह समय के साथ कदम मिलाकर चलना चाहता है।
यह कहानी सिर्फ नेपाल और चीन की नहीं है। यह हर उस व्यक्ति और राष्ट्र की कहानी है जो अपने लिए बेहतर विकल्प तलाशने का साहस रखता है।



