पूंछ के साथ जन्मी की बच्ची का हुआ ऑपरेशन, झालावाड़ मेडिकल कॉलेज ने दिया नया जीवन

झालावाड़ में जन्म से कमर पर बालों के गुच्छे के साथ पैदा हुई 6 वर्षीय बच्ची में दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल समस्या पाई गई। समय रहते जांच और जटिल सर्जरी से उसकी रीढ़ की चिपकी नस को सफलतापूर्वक अलग किया गया। ऑपरेशन के बाद बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है।
मेडिकल कॉलेज झालावाड़ के न्यूरो सर्जरी विभाग ने पिड़ावा निवासी 6 वर्षीय मुस्कान का सफल जटिल ऑपरेशन कर उसे पूरी तरह स्वस्थ कर दिया है। बच्ची के जन्म से ही कमर पर बालों का गुच्छा था और पिछले एक माह से उसे कमर में दर्द की शिकायत हो रही थी। परिजन उसे इलाज के लिए झालावाड़ मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां जांच के बाद जटिल सर्जरी की गई।
परिवार के लोग मान रहे थे लांछन
न्यूरो सर्जरी विभाग प्रभारी डॉ. रामसेवक योगी ने बताया कि सामाजिक कुरीतियों के चलते परिजन इसे जन्मजात लांछन मान रहे थे, लेकिन सीटी स्कैन और एमआरआई जांच में सामने आया कि बच्ची की कमर की नस चिपकी हुई थी, जिसे टेथर्ड कॉर्ड सिंड्रोम कहा जाता है। इसके साथ ही उसकी रीढ़ की हड्डी पूरी तरह विकसित नहीं थी, जिसे स्पाइनल बाइफिडा कहा जाता है। इसके बाद बच्ची का सफल ऑपरेशन किया गया और अब वह पूरी तरह स्वस्थ है।
यह एक जटिल प्रक्रिया का ऑपरेशन है
डॉ. योगी ने बताया कि यह अत्यंत जटिल सर्जरी होती है। ऑपरेशन के दौरान जोखिम रहता है कि मरीज के दोनों पैर काम करना बंद कर सकते हैं या शौच व पेशाब पर नियंत्रण खत्म हो सकता है। सीमित संसाधनों के बावजूद कमर की नसों के गुच्छे से चिपकी नस को अलग कर निकालना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन ऑपरेशन सफल रहा।
स्पाइनल डिसरैफिज्म या स्पाइनल बाइफिडा क्या है
यह एक जन्मजात स्थिति है, जिसमें गर्भावस्था के पहले महीने के दौरान रीढ़ की हड्डी का असामान्य विकास होता है। इसमें रीढ़ की हड्डी और तंत्रिका जड़ें प्रभावित होती हैं। यह समस्या प्रति 1000 जीवित जन्मों में एक में पाई जाती है। इसके लक्षणों में पीठ पर बालों का गुच्छा, गड्ढा, काला धब्बा, सूजन या छोटा छेद (साइनस) शामिल हैं।
कैसे किया जा सकता है बचाव?
90 प्रतिशत से अधिक मामलों में परिवार में पहले किसी को यह बीमारी नहीं होती। यदि माता-पिता में से किसी एक को यह समस्या है, तो संतान में इसके होने की संभावना लगभग 4 प्रतिशत होती है। इससे बचाव के लिए गर्भावस्था की योजना बनाने से पहले नियमित रूप से फोलिक एसिड सप्लीमेंट लेना आवश्यक है।



