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पुणे में सरकारी भूमि घोटाला: 15 एकड़ जमीन बेची गई अवैध रूप से, अधिकारी सस्पेंड।

पुणे की धरती, जो विकास और विस्तार की कहानियों से भरी रहती है, इन दिनों एक ऐसे घोटाले की गूँज से असहज है जिसने प्रशासन की नींव को हिला दिया है। पिंपरी चिंचवाड़ के तथावड़े का इलाका, जहाँ आमतौर पर सुबह की धूप खेतों के किनारों को हल्की सुनहरी चमक देती है, अचानक चर्चा का केंद्र बन गया है। कारण—पशुपालन विभाग की 15 एकड़ सरकारी जमीन का अवैध बिक्री प्रकरण।

सरकारी जमीन, जिसे आम लोगों की संपत्ति माना जाता है, अचानक मात्र कागजों के खेल में 33 करोड़ रुपये में बेच दी गई। जैसे किसी ने जनता की आंखों के सामने से उनकी अपनी मिल्कियत चुरा ली हो। इस जमीन की हरी-भरी सतह शायद आज भी शांत पड़ी है, लेकिन उसके आसपास का माहौल उथल-पुथल से भरा है।

जैसे ही यह खबर फैली, शासन की सीढ़ियों पर हलचल दौड़ पड़ी। इंस्पेक्टर जनरल रजिस्ट्रेशन (IGR) विद्या शंकर बड़े समेत कई अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया। ऐसा प्रतीत हुआ जैसे अचानक किसी ने पर्दा हटाकर व्यवस्था के अंधेरे कोनों को सबके सामने ला दिया हो।

जांच टीमों ने दस्तावेज़ खंगालने शुरू किए, फाइलों के ढेर खुलने लगे, और हर दस्तावेज़ जैसे नई कहानी कह रहा था—गलत प्रमाणन, फर्जी अनुमति, और नियमों का खुलेआम उल्लंघन। जांच अधिकारी जमीन पर जाकर उसकी वास्तविक स्थिति का निरीक्षण भी कर रहे हैं। उस बंजर-सी दिखने वाली जमीन पर मानो हर कण यह पूछ रहा हो कि “किसने मुझे बेचा?”

स्थानीय लोग भी हैरान हैं कि सरकारी सुरक्षा कवच के भीतर रहते हुए भी इतनी बड़ी धांधली कैसे हो गई। राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप की आंधी चल रही है, और जनता उम्मीद कर रही है कि सच सामने आएगा।

यह मामला केवल जमीन का नहीं, बल्कि विश्वास का है। जनता के भरोसे पर चोट हुई है, और अब सबकी निगाहें जांच पर टिकी हैं।

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