IAS भारती दीक्षित बनाम IAS आशीष: नौकरशाही में बड़ा बवाल।
IAS पति पर मारपीट, पिस्तौल तानने और अवैध संबंध के आरोप पत्नी की FIR से हड़कंप


IAS दंपती विवाद ने उठाए बड़े सवाल: बड़े पद, ऊंची शिक्षा, लेकिन संस्कार और आस्था की कमी से क्यों डगमगा रही रिश्तों की नींव…?क्राइम इंडिया टीवी डिजिटल डेस्क
मनोज कुमार सोनी! जयपुर राजस्थान में उच्च पदों पर बैठे एक IAS दंपती के बीच गंभीर विवाद सामने आया है। मामले ने न केवल नौकरशाही हलकों में हड़कंप मचा दिया है बल्कि समाज में भी यह चर्चा तेज है कि शिक्षा और ऊँचे ओहदे होने के बावजूद, क्या रिश्तों में संस्कार और मर्यादा कमजोर हो चुकी हैं? भारती दीक्षित ने अपने पति आशिष मोदी पर मारपीट करने, शराब पीकर धमकाने, पिस्तौल तानने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। साथ ही उन पर अवैध संबंध बनाने, विवाह के नाम पर छल करने, कैडर चेंज कराने और तलाक के लिए दबाव बनाने की शिकायत भी दर्ज करवाई गई है। वर्तमान में भारती दीक्षित वित्त विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर तैनात हैं, तो वहीं उनके पति आशिष मोदी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में निदेशक हैं। मामला अब कानूनी मोड़ ले चुका है और पुलिस शिकायत (FIR) दर्ज होने के बाद जांच शुरू हो चुकी है। दोनों ही बड़े प्रशासनिक अधिकारी होने के चलते हर कदम पर पूरा देश नजर बनाए हुए है।
ऊँचा पद – लेकिन संस्कार कहां?
आज अधिकतर परिवारों में देखा जा रहा है कि
बच्चों को बड़ी शिक्षा, बड़े कॉलेज, महंगी डिग्रियाँ मिल जाती हैं…सरकारी या बड़े-बड़े कॉर्पोरेट पद भी मिल जाते हैं…लेकिन:क्या परिवार के संस्कार साथ चल पा रहे हैं?क्या ईश्वर और संस्कृति में आस्था बरकरार है?क्या रिश्तों में सम्मान, संयम और धैर्य बचा है?समाज विज्ञान के विशेषज्ञ कहते हैं कि ज्ञान और डिग्री जीवन में सफलता दिला सकती है, लेकिन रिश्तों को जोड़कर नहीं रख सकती।
इसके लिए चाहिए संस्कार, आदर, विश्वास और मर्यादा।
रिश्तों में दरार तब आती है जब…
- अहंकार शिक्षा से बड़ा बन जाता है
- पद और पैसा इंसानियत से ऊपर चढ़ जाता है
- परिवार को समय देने की संस्कृति खत्म हो जाती है
- समझ और संवाद की जगह आरोप और अविश्वास ले लेते हैं, ईश्वर पर आस्था और नैतिकता की सीख पीछे छूट जाती है,आज के समय में कैरियर ग्रोथ सब चाहते हैं,लेकिन रिलेशनशिप ग्रोथ पर ध्यान कम हो रहा है।
बच्चों को गुणवत्ता शिक्षा ज़रूरी — पर जीवन मूल्य भी उतने ही ज़रूरी
हर मां-बाप अपने बच्चों को डॉक्टर, IAS, इंजीनियर, मैनेजर बनाना चाहते हैं, लेकिन…क्या वह उन्हें कर्तव्य सिखा रहे हैं? क्या वह उन्हें रिश्तों की इज्जत करना सिखा रहे हैं? क्या धर्म, संस्कार और समाज की समझ दे रहे हैं?अगर यह नहीं दिया तो डिग्री कितनी भी बड़ी हो…ओहदा कितना भी ऊँचा हो…रिश्ते टूटते ही रहेंगे।
कानूनी झगड़े, तलाक, तनाव — क्यों बढ़ रहे हैं?
- भौतिकवाद की दौड़
- मोबाइल और सोशल मीडिया की लत
- मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी
- अहं और ईगो
- धैर्य की कमी
- नैतिक मूल्यों का पतन आज बड़े पद वालों के घर में भी शांति नहीं,ऊँची सैलरी पर भी खुशियाँ नहीं।
देश की नौकरशाही पर दाग जनता की नजर सवालों पर
IAS/IPS जैसी सेवाएँ देश की रीढ़ मानी जाती हैं।
यदि यही घर में शांति न रख पाएँ,
तो समाज को कैसे दिशा देंगे? विवाद का सच चाहे जो भी हो, लेकिन इस घटना ने देश की युवा पीढ़ी को बड़ा सबक दिया है।
समाज को संदेश:
- पद से ज़्यादा अहम है व्यवहार
- पैसा-शक्ति से ज़्यादा महत्वपूर्ण है सम्मान और विश्वास
- विवाह केवल साथ रहने का नाम नहीं —
बल्कि एक-दूसरे को समझने का वचन है - बेटियों-बेटों को केवल पढ़ाएँ ही नहीं —
संस्कार और आस्था भी सिखाएँ
आज जरूरत इस बात की है कि
हम अपने बच्चों को IAS, IPS, इंजीनियर, डॉक्टर ही नहीं… अच्छा इंसान भी बनाएं। ईश्वर में आस्था, परिवार के प्रति सम्मान,संयम और नैतिकता यही भविष्य की सही नींव हैं। वरना… ऊँची डिग्री और ऊँचा पद होते हुए भी
रिश्तों की नींव कमजोर पड़ जाएगी।



