आस्था
Trending

भगवान दूर नहीं, हर हृदय में निवास करते हैं: सिकंदरा में गुरु चरणानंद जी का प्रवचन।

यथार्थ गीता के मार्ग पर चलकर ही संभव है ईश्वर से सीधा संवाद

श्रद्धा से नाम जपो, भगवान स्वयं पास आ जाते हैं : गुरु चरणानंद जी महाराज।


क्राइम इंडिया टीवी डिजिटल डेस्क, मनोज कुमार सोनी! दौसा/सिकंदरा। विश्व गुरु, विश्व गौरव से सम्मानित कालजयी धर्म-शास्त्र यथार्थ गीता के प्रणेता, समय के तत्वद्रष्टा महापुरुष अनंत विभूषित करुणा निधान परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज के शिष्य, पूज्य श्री गुरु चरणानंद जी महाराज ने शुक्रवार को सरस्वती आर्य विद्या मंदिर, सिकंदरा में आयोजित धर्मसभा में श्रद्धा, साधना और ईश्वर प्राप्ति के गूढ़ रहस्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

अपने ओजस्वी और सरल उद्बोधन में गुरु चरणानंद जी महाराज ने हजारों विद्यार्थियों, श्रद्धालुओं, भक्तों एवं संत-महात्माओं को संबोधित करते हुए कहा कि “श्रद्धा से ओम, राम अथवा शिव—किसी एक नाम का जप करो, भगवान कहीं भी होंगे, दौड़कर तुम्हारे पास आ जाएंगे।” उन्होंने कहा कि भगवान कोई दूर की सत्ता नहीं हैं, जिनसे मिलने के लिए ट्रेन, बस या हवाई जहाज की जरूरत पड़े। भगवान प्रत्येक प्राणी के हृदय, मन और मस्तिष्क में निवास करते हैं। उनसे जुड़ने के लिए केवल श्रद्धा और साधना का मार्ग अपनाना आवश्यक है, जिसका विस्तृत मार्गदर्शन यथार्थ गीता में उपलब्ध है।

पूज्य महाराज ने कहा कि ईश्वर से साक्षात्कार के लिए दिखावे या आडंबर की आवश्यकता नहीं है। यदि साधक श्रद्धा भाव से किसी एक नाम—ओम, राम या शिव—का निरंतर जप करे और सद्गुरु को हृदय से धारण करे, तो भगवान स्वयं प्रकट होकर जीवन का मार्गदर्शन करने लगते हैं। उन्होंने बताया कि नियमपूर्वक दो से चार महीने तक साधना करने से ईश्वर हृदय में रथी होकर प्रकट होते हैं और साधक के जीवन के प्रत्येक क्षण में साथ रहते हैं।

गुरु चरणानंद जी महाराज ने कहा कि जब भगवान कृपा करते हैं तो वे साधक को उठाते-बिठाते, सुलाते-जगाते और हर कदम पर संभालते हैं। “भगवान उंगली पकड़कर चलाने लगते हैं, गिरने पर उठा लेते हैं—बस आवश्यकता है केवल श्रद्धा की,” उन्होंने कहा। श्रद्धा जितनी गहन होती है, ईश्वर की अनुभूति उतनी ही सजीव होती जाती है।

उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि भगवान किसी की पुकार को अनसुना नहीं करते। “चींटी के पग घुंघरू बाजे, वह भी साहब सुनता है”—इस कहावत के माध्यम से उन्होंने बताया कि ईश्वर बहरे नहीं हैं। भक्त दुनिया के किसी भी कोने में हो, यदि सच्चे मन से पुकारेगा तो भगवान तत्काल प्रकट होंगे।

धार्मिक ग्रंथों के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए गुरुजी ने कहा कि भक्त प्रह्लाद की पुकार पर भगवान राजमहल में प्रकट हुए, द्रौपदी के चीरहरण के समय श्रद्धा की पुकार सुनकर भगवान ने उनकी लाज बचाई। गजराज पर जब मगरमच्छ ने प्राणघातक हमला किया, तब नदी के बीच की गई पुकार भी भगवान तक पहुंची। इसी प्रकार भगवान राम ने घनघोर वन प्रदेश को राक्षसों से मुक्त कर ऋषि-मुनियों की बाधित तपस्या को संरक्षण प्रदान किया और पूरे क्षेत्र को भयमुक्त किया।

उन्होंने कहा कि इसका सार यही है कि भक्त जल, थल या नभ—कहीं भी संकट में हो, यदि श्रद्धा भाव है तो भगवान अवश्य सहायता करते हैं। कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं ने पंगत प्रसादी का लाभ लिया और आध्यात्मिक वातावरण में भक्ति भाव के साथ सहभागिता निभाई।

इस अवसर पर भोनू महाराज, सूरज बाबा, बलया बाबा, सूरदास महाराज, भगत भागीरथ सैनी, घासी लाल जी गुरुजी, रामकिशन ठेकेदार, मुकेश बागवाला, सीताराम आढ़तिया, ईश्वरमाल सैनी, हरि सिंह सैनी, सुरेंद्र कुमार, आशीष, अशोक सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, साधु-संत एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

Related Articles

Back to top button