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राजधानी के VIP चौराहे पर अवैध पोस्टर राज! सिस्टम की चुप्पी पर सवाल।

VIP चौराहे की इज्ज़त तार-तार: बिना अनुमति सरकारी बोर्ड ढका

पर्यटन की पहचान पर राजनीति का कब्ज़ा! रामबाग चौराहे पर नियम बोने पड़ गए।

क्राइम इंडिया टीवी डिजिटल डेस्क, मनोज कुमार सोनी। जयपुर राजधानी में सरकारी व्यवस्था की लापरवाही का एक और नमूना सामने आया है। शहर की शान और VIP लोकेशन रामबाग चौराहे पर लगे सरकारी साइनबोर्ड को अब राजनीतिक पोस्टरों से ढक दिया गया है। कानून साफ कहता है—सरकारी संपत्ति पर बिना अनुमति किसी भी तरह का पोस्टर लगाना अपराध है। लेकिन यहां कानून सिर्फ किताबों में, जमीन पर नहीं दिखता।

सरकार के अधिकारी बने मूक दर्शक नगर निगम, JDA और प्रशासन के पास रोज़ हजारों कर्मचारी और अधिकारी…फिर भी शहर के सबसे प्रमुख चौराहे पर अवैध चस्पागिरी किसी को दिखाई नहीं देती!या फिर… देख कर भी अनदेखी की जा रही है? ताकतवर नाम, तो कानून बौना? जब पोस्टर पर चेहरा या नाम राजनीति से जुड़ा हो, तो लगता है कानून अचानक लंगड़ा हो जाता है।

ये वही बोर्ड है जिस पर • ट्रैफिक रूल्स • पर्यटन दिशानिर्देश• सरकारी संपत्ति की जानकारी होनी चाहिए…लेकिन यहां किसी की चमचागिरी और दिखावा नियमों पर भारी पड़ गया। क्या अनुमति ली गई? अगर नहीं, तो कार्रवाई कौन करेगा?जयपुर नगर निगम एक्ट, JDA नियम और पब्लिक प्रॉपर्टी डैमेज एक्ट इनके मुताबिक ऐसी गतिविधि पर तुरंत केस दर्ज होना चाहिए।

पर अभी तक • न कोई नोटिस• न कोई एफआईआर• न कोई हटाने की कार्रवाई, क्या इसलिए कि पोस्टर लगाने वाले पावर के करीबी माने जाते हैं? रामबाग चौराहा—शहर की इज्ज़त या राजनीतिक होर्डिंग?अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों से लेकर विदेशी प्रतिनिधिमंडल तक सबकी नजर इस चौराहे से गुजरती है।ऐसे में यह अवैध पोस्टर संदेश देता है कि यहाँ कानून से बड़ा दिखावा है।

सवाल बहुत स्पष्ट है क्या कोई अधिकारी इस पर कार्रवाई करने की हिम्मत रखता है? या फिर हमारी व्यवस्था गूंगी, बहरी और सत्ता से डरी हुई है? सरकारी संपत्ति को निजी प्रचार का मंच बनाने वालों पर कौन नकेल कसेगा? राजधानी में यह हाल… तो बाकी शहर क्या सोचें? अगर राजधानी के दिल में कानून का मज़ाक उड़ाया जा सकता है,तो संदेश साफ है कानून किताब में सुरक्षित है, सड़क पर नहीं।

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