RAS अफसर से लेकर डिप्टी सीएम की ओएसडी बनने तक,सपना की कहानी हर बेटी के लिए मिसाल।
10 साल की उम्र में अनाथ हुई, लेकिन हौसला नहीं टूटा,अब संभाल रहीं हैं डिप्टी सीएम का दफ्तर।

संघर्षों की आग में तपकर निकली सोने सी चमक — सपना मौर्य की सफलता ने किया राजस्थान को गौरवान्वित
क्राइम इंडिया टीवी डिजिटल डेस्क! जयपुर कहते हैं कि जिनके पास सब कुछ नहीं होता, उनके पास करने का हौसला जरूर होता है। राजस्थान की बेटी सपना मौर्य की कहानी इसी जज़्बे और आत्मविश्वास की मिसाल है। उन्होंने जीवन की हर कठिनाई को अपनी ताकत बनाया और संघर्षों को सीढ़ी बनाकर सफलता की ऊंचाई छू ली।
सिर्फ 10 वर्ष की उम्र में जब माता-पिता का साया सिर से उठ गया, तो जीवन जैसे ठहर सा गया था। परंतु किस्मत ने भले ही परीक्षा ली, मगर उनकी नानी लक्ष्मी देवी भट्ट ने उन्हें मां की ममता और पिता का साया बनकर संभाला। नानी ने उन्हें न सिर्फ जीवन का अर्थ सिखाया, बल्कि आगे बढ़ने का हौसला भी दिया।
सपना की प्रारंभिक शिक्षा गुरु नानक विद्यालय से शुरू हुई और बल मंदिर स्कूल से हायर सेकेंडरी की। इसके बाद उन्होंने अजमेर से बी.टेक की डिग्री हासिल की — लेकिन यह सफर आसान नहीं था। कई बार स्कूल फीस जमा करने के पैसे नहीं होते थे, नई ड्रेस तक खरीदने में मुश्किलें आती थीं। वह दूसरे बच्चों की पुरानी यूनिफॉर्म पहनकर भी अपनी पढ़ाई जारी रखती थीं।
किताबें खरीदना कभी एक सपना बन गया था, लेकिन तभी किस्मत ने करवट ली। सर्वोदय सेवा संस्थान के संरक्षक अनंत राम पोद्दार और अन्य भामाशाहों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और शिक्षा के इस सफर में आर्थिक सहयोग दिया। फीस भरी गई, किताबें मिलीं और सपनों को पंख लग गए।
इन कठिन दिनों में उनकी सच्ची सहेलियाँ — राजनंदनी सिंगाड़िया, लीलावती, नीता और रेखा — हमेशा उनके साथ खड़ी रहीं। वहीं, मामा विपिन भट्ट, कुलदीप भट्ट और मोसी पुष्पा ने भी हर कठिन मोड़ पर परिवार की तरह उनका साथ निभाया।
संघर्षों से भरी यह यात्रा आज सपना मौर्य को उस मुकाम पर ले आई है जहाँ पहुँचना लाखों का सपना होता है। आज वह राज्य सरकार के विद्युत, रोजगार, जन स्वास्थ्य अभियंत्रिकी विभाग और महिला एवं बाल विकास (सीडीपीओ) परियोजना में अपनी सेवाएँ दे रही हैं।
इसके साथ ही वह राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी की ओएसडी (Officer on Special Duty) के रूप में कार्यरत हैं। उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने उनके टैलेंट को पहचाना और जात-पात या ऊंच-नीच से ऊपर उठकर केवल योग्यता और प्रशासनिक कुशलता को प्राथमिकता दी।
अब तक सपना मौर्य 7 सरकारी नौकरियों में चयनित हो चुकी हैं जो उनकी लगन, मेहनत और आत्मविश्वास का प्रमाण है। साल 2023 में RAS परीक्षा में चयन ने उनके संघर्ष को मुकुट की तरह सजाया।
लेकिन इस सफलता के पीछे भी एक दर्द भरी कहानी छिपी है मुख्य परीक्षा से सिर्फ 10 दिन पहले उनके पैर का प्लास्टर खुला था। दर्द असहनीय था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। परीक्षा के दौरान जब दर्द से आंखों से आँसू बह रहे थे, तब भी वह लिखती रहीं क्योंकि उनका हौसला दर्द से कहीं ज्यादा मजबूत था।
आज सपना मौर्य उन तमाम बेटियों के लिए प्रेरणा हैं जो जीवन में कठिनाइयों से गुजर रही हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि अगर इरादे सच्चे हों, तो कोई हालात सपनों की उड़ान नहीं रोक सकता।
अपने व्यस्त जीवन के बावजूद वह आज भी जमीन से जुड़ी और सरल स्वभाव की हैं। जब भी अपने ननिहाल जाती हैं, तो घर के कामों में हाथ बंटाना, बच्चों को पढ़ाना, दीपावली पर दीप उत्सव की तैयारी करना, और पुराने दोस्तों से मिलना ये सब आज भी उनके जीवन का अहम हिस्सा है।
सपना मौर्य मानती हैं कि रिश्ते और अपनापन ही असली संपत्ति हैं। संघर्ष से सफलता तक का उनका सफर न केवल प्रेरक है, बल्कि यह सिखाता है कि हिम्मत, लगन और सच्ची नीयत से कोई भी सपना साकार किया जा सकता है।



