India-Russia तेल कारोबार 4 साल के लो लेवल पर, क्या महंगा हो जाएगा पेट्रोल? एक्सपर्ट बोले- खरीद कमजोर हुई, लेकिन…

India Russia Oil Trade: जनवरी 2026 में भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात घटकर 6 लाख बैरल प्रतिदिन होने का अनुमान है। अमेरिकी प्रतिबंधों और टैरिफ के कार ..
HighLights
- जनवरी 2026 में आयात 4 साल के निचले स्तर पर
- अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रिफाइनरियां सतर्क
- पुतिन का निरंतर सप्लाई का आश्वासन
India Russia oil trade: भारत की रूस से कच्चे तेल की खरीद जनवरी 2026 में करीब चार साल (India oil imports January 2026) के निचले स्तर पर आने वाली है। अनुमान है कि अगले महीने रूस से आने वाली सप्लाई घटकर 6 लाख बैरल प्रतिदिन (Russian oil supply drop India) रह सकती है। यह गिरावट उस समय दिख रही है जब कुछ महीने पहले ही भारत 2.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन आयात कर रहा था, जो कुल आयात का लगभग 45% था।
रूसी तेल पर अमेरिकी पाबंदियां और ट्रंप प्रशासन की कड़ी बयानबाजी ने भारतीय कंपनियों को बैकफुट पर ला दिया है। रॉसनेफ्ट (Rosneft) और लुकोइल (Lukoil) जैसी बड़ी रूसी कंपनियों पर लगे प्रतिबंधों और 50% टैरिफ ने ट्रेड में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इसी वजह से जनवरी में आयात का स्तर शुरुआती 2022 के बाद सबसे कम हो सकता है।
हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि यह गिरावट पूरी तरह स्थाई नहीं है। रूस के प्रतिस्थापन आपूर्तिकर्ता और नए ट्रेडिंग इंटरमीडियरी बाजार में तेजी से उभर रहे हैं। अटलांटिक काउंसिल की विशेषज्ञ (Atlantic Council oil expert) एलिजाबेथ ब्रॉ का कहना है कि, “अगर खरीद विचारधारा नहीं, बल्कि सस्ती कीमत को देखते हुए हो रही है, तो देश इसे जारी रखेंगे।”
रिफाइनरियां सतर्क, कई ने खरीद घटाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने रूसी तेल पर कोई आधिकारिक गाइडलाइन नहीं जारी की है, लेकिन रिफाइनरियां जोखिम को देखते हुए खुद कदम उठा रही हैं। एमआरपीएल (MRPL) और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी (HPCL-Mittal Energy) ने रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया है। वहीं आईओसी (IOC) और बीपीसीएल (BPCL) केवल गैर-प्रतिबंधित रूसी कंपनियों से सीमित मात्रा में आयात ले रही हैं।
नवंबर में आयात 1.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा, क्योंकि कई कंपनियों ने प्रतिबंध प्रभावी होने से पहले ज्यादा बुकिंग कर ली थी। दिसंबर में यह आंकड़ा 1–1.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहने का अनुमान है।
दिल्ली में पुतिन की मौजूदगी और ‘निरंतर सप्लाई’ का वादा
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हालिया दिल्ली यात्रा में तेल पर भले अधिक बातचीत नहीं हुई, लेकिन उन्होंने भारत को ‘निरंतर ईंधन सप्लाई’ देने का आश्वासन दिया। ट्रेडर्स का कहना है कि कई नए नाम- जैसे- ईस्ट इंप्लेक्स स्ट्रीम एफजेडई (Eastimplex Stream FZE), ग्रेवाल हब एफजेडई (Grewale Hub FZE) और Tyndale Solutions FZE अब वडिनार पोर्ट पर रूसी तेल उतार रहे हैं। इससे संकेत मिलता है कि भारत के लिए वैकल्पिक रास्ते तेजी से बन रहे हैं। केप्लर (Kpler) के विश्लेषक सुमित रितोलिया का कहना है कि, “जनवरी में गिरावट दिखेगी, लेकिन सप्लाई पूरी तरह रुकने की संभावना नहीं है।”
महंगे विकल्पों का दबाव
रूसी तेल कम होने से भारत को महंगे मध्य-पूर्वी ग्रेड और अमेरिकी तेल पर निर्भर होना पड़ रहा है। फ्रेट रेट बढ़े, गुयाना और ब्राजील से विकल्प खोजे जा रहे हैं और रूस को भी नुकसान हो रहा है। साथ ही, छूट के बाद उसे केवल 40-45 डॉलर प्रति बैरल मिल रहा है
रिलायंस बनेगा सबसे निर्णायक फैक्टर
रिलायंस इंडस्ट्रीज रूस का सबसे बड़ा भारतीय खरीदार रहा है। हालांकि वह अब अपने निर्यात-उन्मुख प्लांट के लिए रूसी तेल नहीं खरीद रहा, लेकिन रॉसनेफ्ट के साथ उसकी टर्म डील जनवरी में 3.5 लाख बैरल प्रतिदिन जोड़ सकती है। अगर यह सप्लाई सक्रिय होती है, तो भारत का कुल आयात अनुमान से ज्यादा रह सकता है।
आगे का रास्ता क्या कहता है?
विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले महीनों का परिदृश्य तीन बातों पर निर्भर करेगा। पहला- अमेरिका का टैरिफ और प्रतिबंधों पर रुख। दूसरा- भारत की नई सप्लाई चैन और शैडो ट्रेडिंग का विस्तार और तीसरा- रूस द्वारा दी जाने वाली नई छूट। Sparta Commodities की विश्लेषक जूने गोह कहती हैं कि अगर US-India ट्रेड डील में देरी हुई, तो भारत रूसी तेल खरीदने के लिए नए रास्ते ढूंढ लेगा।



