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RTO से बचने की कोशिश बनी कहर  LPG ट्रक से भिड़ंत में 200 सिलेंडरों ने बरपाया कहर, दो घंटे तक गूंजते रहे धमाके।

चेकिंग से बचने का ख़ौफ़ बना आग का तूफ़ान – LPG ट्रक हादसे ने मचा दी तबाही

सिस्टम के डर ने मचा दी तबाही LPG ट्रक भिड़ा, धमाकों से कांपा इलाका सिलेंडर बम की तरह फटते रहे, सैकड़ों मीटर तक बिखरी तबाही।

एडिटर इन चीफ मनोज कुमार सोनी! जयपुर-अजमेर हाईवे पर मंगलवार रात का नजारा किसी युद्धक्षेत्र से कम नहीं था। रात 10 बजे के आसपास मोखमपुरा (दूदू) के पास ऐसा धमाका हुआ कि पूरा इलाका थर्रा उठा। LPG सिलेंडर से भरे ट्रक में पीछे से आ रहे केमिकल टैंकर ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयानक थी कि टैंकर के केबिन में आग लग गई और कुछ ही मिनटों में आग सिलेंडरों तक पहुंच गई। एक के बाद एक सिलेंडर धमाकों के साथ फटने लगे। दो घंटे तक 200 से ज्यादा सिलेंडर फटते रहे। धमाकों की आवाजें 10 किलोमीटर दूर तक सुनाई दीं। आसपास के गांवों में अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने अपने घरों से बाहर निकलकर खेतों की ओर भागना शुरू कर दिया। कई सिलेंडर 500 मीटर दूर खेतों में जाकर गिरे। आग की लपटें आसमान छूने लगीं, आग इतनी विकराल थी कि रात का अंधेरा भी आग की रोशनी से लाल हो गया। लोगों ने बताया कि ऐसा मंजर उन्होंने जिंदगी में पहली बार देखा था। कोई पास नहीं जा पा रहा था। गर्मी इतनी तेज थी कि 50 मीटर के अंदर तक जाना असंभव था। हादसे के तुरत बाद दमकल की 12 गाड़ियां लगीं, 4 घंटे बाद आग पर काबू पाया जयपुर, किशनगढ़ और दूदू से दमकलें बुलाई गईं। करीब 3 घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। लेकिन तब तक एक व्यक्ति जिंदा जल चुका था। ट्रक में करीब 330 सिलेंडर थे, जिनमें से अधिकांश फट गए।

आरटीओ की भूमिका पर सवाल

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आरटीओ की गाड़ी पीछे लगने से टैंकर ड्राइवर डर गया। उसने गाड़ी को तेजी से ढाबे की ओर मोड़ा ताकि चेकिंग से बच सके। इसी अफरातफरी में उसने सड़क किनारे खड़े LPG ट्रक को टक्कर मार दी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि आरटीओ की गाड़ियां अक्सर ट्रकों का पीछा करती हैं, जिससे ड्राइवर घबरा जाते हैं। कई बार ऐसी पीछा करने की घटनाएं हादसों की वजह बनती हैं।

5 गाड़ियां जलीं, हाईवे पर तबाही का मंजर हादसे में पास खड़ी 5 अन्य गाड़ियां भी आग की चपेट में आ गईं। सड़क किनारे लगी दुकानें, ढाबे और पेड़ तक जल गए। हाईवे को तुरंत बंद कर दिया गया। ट्रैफिक 6 घंटे तक रुका रहा और सुबह 4.30 बजे जाकर दोबारा खोला गया।

आसपास के गांवों मोखमपुरा, गाडिया, माधोपुरा, रूपवास  के लोगों ने बताया कि धमाकों की आवाज सुनकर लगा जैसे भूकंप आ गया हो। कई बुजुर्गों और बच्चों को घबराहट और बेहोशी के दौरे तक पड़े। रातभर गांवों में दहशत का माहौल रहा। गांव वालों ने आरटीओ विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि लगातार पीछा और जबरन रोकना हादसों को न्योता देता है। लोगों ने मांग की है कि रात में भारी वाहनों की चेकिंग पर रोक लगे, ताकि ड्राइवर घबराकर ऐसे खतरनाक कदम न उठाएं। गवाह बोले हम ढाबे पर बैठे थे, तभी जोरदार धमाका हुआ। कुछ ही सेकंड में आग का गोला बना और धमाके शुरू हो गए। पुलिस, फायर ब्रिगेड ने काफी कोशिश की कुछ हदतक हालातों पर काबू पाया।”

घटना की जानकारी मिलते ही डिप्टी सीएम प्रेमचंद बेरवा, एसपी राशि डोगरा डूडी मौके पर पहुंचीं। उन्होंने राहत और बचाव कार्यों का जायजा लिया और हादसे की जांच के आदेश दिए। फॉरेंसिक टीम को बुलाया गया है ताकि टक्कर और आग की सही वजहों का पता चल सके। प्रश्नचिह्न आरटीओ सिस्टम पर: क्या आरटीओ की गाड़ियों द्वारा पीछा करना सुरक्षित है? क्या ड्राइवरों को ऐसे दबाव में डालना हादसों का कारण नहीं बन रहा? क्या सड़क सुरक्षा नियमों का पालन आरटीओ खुद करता है?

पिछले 10 दिनों में तीसरा बड़ा हादसा- इसी हाईवे पर पिछले 10 दिनों में तीसरा बड़ा हादसा हुआ है। हाल ही में एक ट्रक-बस टक्कर में 5 लोगों की मौत हुई थी। इससे पहले ऑयल टैंकर पलटने से आग लगी थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि आरटीओ, ओवरलोडिंग और खराब रोड सेफ्टी मिलकर हाईवे को “डेथ वे” बना चुके हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल मृतक के परिजन जब मौके पर पहुंचे तो वे बेहोश हो गए। परिवार वालों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की लापरवाही से उनकी जान गई। उन्होंने कहा, अगर हाईवे पर नियमित पेट्रोलिंग और सही गाइडलाइन होती, तो हमारा भाई आज जिंदा होता।”

सिस्टम पर हो कार्रवाई- स्थानीय नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और परिवहन यूनियन ने मांग की है कि, आरटीओ पीछा नीति की समीक्षा हो, रात में भारी वाहनों की चेकिंग बंद हो, सभी ट्रकों को सुरक्षित पार्किंग की व्यवस्था मिले, हादसों के जिम्मेदार अधिकारियों पर FIR होरात की वो खौफनाक तस्वीरें घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए जिनमें धमाकों की आवाज, आग के गोले और लोगों की चीखें सुनाई दे रही हैं। लोग कह रहे हैं ऐसा लगा जैसे पूरा गांव जल जाएगा।”

सबक और सवाल: यह हादसा सिर्फ एक ड्राइवर की गलती नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता का सबूत है। क्यों नहीं आरटीओ विभाग ड्राइवरों के साथ इंसानियत से पेश आता? क्यों नहीं हाईवे पर सेफ ज़ोन बनाए जाते? क्यों नहीं LPG और केमिकल जैसे खतरनाक पदार्थों को रात में रोकने की सख्त नीति है? जयपुर-अजमेर हाईवे अब “डेथ कॉरिडोर” बन चुका है। हर हफ्ते हादसे, हर रात मौत का साया।अब वक्त है कि सरकार, प्रशासन और परिवहन विभाग जागे। नहीं तो हर धमाका हमें यही याद दिलाएगा “सिस्टम की लापरवाही, जनता की मौत!”

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