‘अमेरिका ने टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल कर फेंक दिया’, ‘कंगाल’ पाकिस्तान का छलका दर्द; रोने लगे शहबाज के मंत्री

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने देश में बढ़ते आतंकवाद और संकट के लिए अमेरिका और पूर्व सैन्य तानाशाहों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान का इस्तेमाल कर ‘टॉयलेट पेपर’ की तरह फेंक दिया। आसिफ ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान ने अपनी आतंकी गलतियों को छिपाया है और दो अफगान युद्धों में शामिल होना बड़ी भूल थी, जिसकी कीमत देश आज चुका रहा है।
HighLights
- रक्षा मंत्री ने अमेरिका और पूर्व तानाशाहों को दोषी ठहराया।
- अमेरिका ने पाकिस्तान का इस्तेमाल कर ‘टॉयलेट पेपर’ की तरह फेंका।
- पाकिस्तान अपने आतंकी इतिहास और सैनिकों की मौत छिपाता है।
अपने ही पाले हुए आतंकी सांपों का दंश झेल रहा पाकिस्तान अब दुनिया के सामने मासूम बन रहा है। पाकिस्तान इन दिनों चौतरफा घिर गया है। एक तरफ पाकिस्तान की सेना बलूचिस्तान में बलूच विद्रोहियों से आए दिन पिट रही है वहीं, दूसरी तरफ आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) देश में आए दिन आतंकी हमलों को अंजाम दे रहा है।
हाल में अफगान तालिबान से भी उसकी दुश्मनी हो गई है, जिनके दम पर वह अफगानिस्तान को स्टेट्रेजिक डेप्थ के तौर पर भारत के खिलाफ इस्तेमाल करना चाहता था। अब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इन सबका ठीकरा अमेरिका और पूर्व सैन्य तानाशाहों पर फोड़ा है।
‘अमेरिका ने किया इस्तेमाल’
ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि अमेरिका ने पाकिस्तान को अपने हितों के लिए इस्तेमाल किया और फिर काम निकल जाने पर टायलेट पेपर की तरफ फेंक दिया। उन्होंने आज के लिए आतंकवाद के लिए पाकिस्तान के आतंकी इतिहास को जिम्मेदार बताया है।

शोर मचा रहा पुराना पाप ख्वाजा आसिफ ने नेशनल असेंबली में कहा कि अमेरिका ने अपने रणनीतिक हितों के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल किया और मकसद पूरा हो जाने के बाद टायलेट पेपर की तरह फेंक दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि पाकिस्तान ने अक्सर अपने आतंकी इतिहास से इनकार किया है।
उन्होंने इसे सैन्य तानाशाहों की गलती बताया और कहा कि इन गलतियों का खामियाजा पाकिस्तान आज तक भुगत रहा है। ख्वाजा ने कहा कि दो अफगान युद्धों में हिस्सा लेना हमारी गलती थी और पाकिस्तान में आज का आतंकवाद अतीत में की गई गलतियों का नतीजा है।
तालिबान के खिलाफ जंग पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा कि 11 सितंबर, 2001 के आतंकी हमले के बाद आतंक के खिलाफ अमेरिका की जंग में शामिल होने के नतीजे पाकिस्तान के लिए बहुत भयावह रहे। इस प्रक्रिया में पाकिस्तान को तालिबान के खिलाफ लड़ाई लड़नी पड़ी।
उन्होंने कहा कि एक समय के बाद अमेरिका क्षेत्र से निकल गया और पाकिस्तान लंबे समय से जारी हिंसा, कट्टरता और आर्थिक मुश्किलों से जूझ रहा है।
इस्लाम नहीं, अमेरिका को खुश करना था मकसद
ख्वाजा आसिफ ने इस बात को खारिज किया कि पाकिस्तान धार्मिक दायित्व की वजह से अफगान संघर्ष में शामिल हुआ। उन्होंने संसद में बताया कि दो पूर्व सैन्य तानाशाहों जियाउल हक और परवेज मुशर्रफ अफगानिस्तान के युद्ध में इस्लाम के लिए नहीं, महाशक्ति को खुश करने के लिए शामिल हुए।
उन्होंने कहा कि देश को इस गलती की कीमत चुकानी पड़ रही है और नुकसान इतना बड़ा है कि इसकी भरपाई नहीं की जा सकती है।
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सैनिकों की मौत भी छिपाता है पाकिस्तान
ख्वाजा अब्बास ने आखिरकार यह बात भी स्वीकार कर ली है कि पाकिस्तान एक्शन में मारे गए सैनिकों की संख्या छिपा लेता है और उनको वह सम्मान भी नहीं देता है, जिसके वह हकदार हैं। उनकी यह स्वीकारोक्ति पाकिस्तान की सेना के लिए बेहद शर्मनाक है।
भारत लंबे समय से यह बात कहता रहा है कि पाकिस्तान की सेना संषर्ष में मारे गए सैनिकों की संख्या के बारे में सही जानकारी सार्वजनिक नहीं करता है। कारगिल युद्ध में तो पाकिस्तान ने अपने सैनिकों के शव लेने से भी यह कह कर इन्कार कर दिया था कि यह उसके सैनिक नहीं हैं।


