तेघड़ा में रजनीश कुमार की 27,176 वोटों की लीड बताती है कि सीट पर भाजपा का मजबूत प्रभाव बना हुआ है।
तेघड़ा— भाजपा के रजनीश कुमार 27,176 वोटों की निर्णायक बढ़त के साथ आगे।

तेघड़ा की सुबह आज कुछ अलग ही थी—बूथों के बाहर लगी कतारों में उम्मीदें थीं, चेहरे पर उत्सुकता थी और आवाज़ों में आने वाले समय की आहट। तेघड़ा, जिसे कभी बरौनी के नाम से जाना जाता था, आज भी अपनी सांस्कृतिक धारा, गंगा किनारे बसे घाटों और पुरानी औद्योगिक पहचान को अपने भीतर समेटे बैठा है। इसी पवित्र भूमि पर 2025 का चुनाव एक नई कहानी लिख रहा है।
गिनती शुरू हुई तो जैसे हर राउंड क्षेत्र के लोगों की धड़कनों को तेज कर देता। चौदह राउंड पूरे होते-होते तस्वीर लगभग साफ हो गई—भाजपा के रजनीश कुमार प्रचंड बढ़त के साथ आगे। लगभग पूरे क्षेत्र में उनके समर्थन की लहर बह चुकी थी। सड़कों के किनारे खड़े लोग, चाय दुकानों पर चलती चर्चाएँ और घाटों पर जुटी टोलियाँ—सब एक ही चर्चा कर रही थीं कि इस बार तेघड़ा की राजनीति करवट ले चुकी है।
सीपीआई के राम रतन सिंह, जिन्होंने 2020 में यहाँ की जनता का भरोसा जीता था, इस बार पीछे चल रहे हैं। यह सिर्फ चुनावी अंतर नहीं—बल्कि बदलती प्राथमिकताओं, बदलते सपनों और बदलती उम्मीदों की कहानी है। बरौनी की फैक्ट्रियों से उठती भाप, सिमरिया घाट की आरती और राजेन्द्र सेतु से गुजरती गाड़ियों के शोर के बीच यहाँ के लोगों ने अपनी नई दिशा चुननी शुरू कर दी है।
तेघड़ा के चुनावी मैदान में इस बार कुल 13 खिलाड़ी उतरे। बसपा के मोहम्मद सकील भी उनमें से एक थे। उनके समर्थक इलाकों में नीले झंडे हवा में लहराते दिखते रहे। निर्दलीय उम्मीदवार भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहे, लेकिन असल मुकाबला भाजपा, सीपीआई और बसपा के बीच ही रहा।
घाटों पर सुबह की पहली रोशनी जब गंगा की लहरों में पड़ती है, तो जैसे पूरा इलाका नई ऊर्जा से भर उठता है। चुनाव के दिनों में यह रोशनी उम्मीदों के रंग में बदल गई थी। धर्मराज घाट की सीढ़ियों पर बैठे बुजुर्ग कह रहे थे—“बदलाव ज़रूरी है, लेकिन स्थिरता भी उतनी ही जरूरी है।” शायद यही भावना भाजपा के पक्ष में बढ़ते रुझानों की वजह बनी।
तेघड़ा का चुनाव सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं—यह लोगों की ज़िंदगी से जुड़ा है। बरौनी के मजदूर, तेघड़ा के किसान, घाटों के पुजारी, छोटे दुकानदार—सबको उम्मीद है कि आने वाला समय उनकी तकदीर बदलेगा। रजनीश कुमार की बढ़त जैसे उन्हें विश्वास दिला रही है कि उनके क्षेत्र में नए अवसर आएंगे, नई सड़के बनेंगी, घाटों का विकास होगा और बरौनी का औद्योगिक विस्तार फिर से तेज़ होगा।
2025 की यह चुनावी कहानी तेघड़ा के दिल में हमेशा के लिए दर्ज हो जाएगी—जैसे सिमरिया मेला, जैसे गंगा की अविरत धारा, जैसे बरौनी की धड़कन।



