सायबर क्राइम से सावधान

जमानत, वारंट और FIR के नाम पर लूट,राजस्थान में बढ़ा नया साइबर फ्रॉड।

फर्जी कोर्ट सम्मन से सावधान,साइबर ठगों का नया हथियार!

 इंडिया टीवी डिजिटल डेस्क, जयपुर।

मनोज कुमार सोनी जयपुर राजस्थान में साइबर अपराध का नया चेहरा सामने आया है। अब ठग पारंपरिक बैंकिंग धोखाधड़ी, OTP फ्रॉड या कस्टमर केयर स्कैम तक सीमित नहीं रहे बल्कि अब फर्जी कोर्ट सम्मन और जमानती वारंट के नाम पर आम नागरिकों को फंसा रहे हैं। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने इस नए ट्रेंड को गंभीरता से लेते हुए राज्यव्यापी चेतावनी और एडवाइजरी जारी की है।

साइबर ठगों ने अब कानून और न्यायपालिका की भाषा को अपना हथियार बना लिया है।जांच में सामने आया कि अपराधी स्वयं को कोर्ट अधिकारी, पुलिस अफसर या सरकारी अधिवक्ता बताकर नागरिकों को कॉल, ईमेल या व्हाट्सएप मैसेज भेजते हैं।

वे कहते हैं –आपके खिलाफ शिकायत दर्ज हुई है।आप पर झूठी FIR हुई है, जमानत के लिए तुरंत फीस जमा करें।आपका कोर्ट सम्मन जारी हुआ है, लिंक पर क्लिक कर तुरंत जवाब दें।”इसी डर और भ्रम का फायदा उठाकर नागरिकों से ऑनलाइन भुगतान, UPI ट्रांसफर या वॉलेट ट्रांजेक्शन के माध्यम से बड़ी रकम ठगी जा रही है।

🔹 फर्जी दस्तावेज और डिजिटल चालबाजी

DIG साइबर क्राइम विकास शर्मा के अनुसार,“अपराधी अब डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त फर्जी दस्तावेज तैयार कर रहे हैं, जिन पर कोर्ट या पुलिस के प्रतीक चिन्ह तक कॉपी किए गए होते हैं। ये नोटिस WhatsApp, Telegram, Gmail या ईमेल अटैचमेंट में भेजे जाते हैं ताकि पीड़ित उन्हें असली समझ ले। कई मामलों में तो अपराधी वीडियो कॉल पर खुद को मजिस्ट्रेट या इंस्पेक्टर बताकर वर्चुअल धमकी देते हैं और कहते हैं कि “अभी जमानत राशि जमा करें, नहीं तो गिरफ्तारी का वारंट जारी होगा।”

🔹 पुलिस ने बताया – इन 5 तरीकों से बचें इस ठगी से राजस्थान पुलिस ने जनता को जागरूक करते हुए 5 प्रमुख सुरक्षा उपाय सुझाए हैं,1️⃣ सत्यापन करें किसी भी कोर्ट सम्मन, FIR या वारंट की सच्चाई संबंधित थाने या न्यायालय से सीधे संपर्क कर पता करें। 2️⃣ क्लिक न करें फर्जी नोटिस या ईमेल में दिए गए संदिग्ध लिंक या अटैचमेंट पर कभी क्लिक न करें। यह आपके मोबाइल या सिस्टम में स्पाइवेयर डाल सकता है। 3️⃣ ऑनलाइन भुगतान से बचें, कोर्ट या पुलिस कभी भी फोन या मैसेज पर जमानत या केस फीस नहीं मांगती। 4️⃣ गहन जांच करें किसी भी मैसेज, वीडियो कॉल, या डॉक्यूमेंट को अधिकारिक नंबर या वेबसाइट से वेरिफाई करें। 5️⃣ गोपनीय जानकारी साझा न करें, OTP, बैंक डिटेल, ATM नंबर, UPI PIN या आधार जैसी जानकारी किसी के साथ न बांटें।

🔹 ऐसे गिरोह देशभर में सक्रिय

साइबर शाखा के अधिकारियों के मुताबिक ये गिरोह दिल्ली, मुंबई, जयपुर, नोएडा और गुरुग्राम से ऑपरेट करते हैं। ये लोग वर्चुअल नंबर, विदेशी IP एड्रेस और नकली वेबसाइट्स का उपयोग करते हैं ताकि ट्रेसिंग मुश्किल हो जाए। अक्सर इनका टारगेट सरकारी कर्मचारियों, बिजनेसमैन, और सेवानिवृत्त नागरिकों को बनाया जाता है, क्योंकि वे कोर्ट या कानून के नाम से जल्दी डर जाते हैं।

🔹 राजस्थान पुलिस ने शुरू की विशेष जांच,DIG विकास शर्मा के निर्देश पर साइबर सेल, CID और जिला पुलिस की संयुक्त टीमें इस तरह के अपराधियों पर निगरानी रख रही हैं। साइबर टीमों ने अब तक 100 से अधिक फर्जी वेबसाइटों और सोशल मीडिया खातों को ब्लॉक कराया है जो कोर्ट या पुलिस के नाम पर चल रहे थे। राज्य पुलिस ने कहा है कि “कोर्ट सम्मन या वारंट से जुड़ा कोई भी संदेहास्पद संदेश मिलने पर घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत रिपोर्ट करें।”

🔹 शिकायत कहां करें  राजस्थान पुलिस ने दिए ये हेल्पलाइन नंबर यदि किसी के साथ इस तरह की घटना हो जाती है तो पीड़ित तुरंत संपर्क कर सकता है: साइबर हेल्पलाइन: 1930  राष्ट्रीय साइबर पोर्टल: cybercrime.gov.in,राजस्थान साइबर हेल्पडेस्क: 9256001930 / 9257510100, निकटतम पुलिस स्टेशन या साइबर थाने में जाकर रिपोर्ट दर्ज कराएं।

🔹 साइबर जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार राजस्थान पुलिस का मानना है कि डिजिटल युग में अपराधी तकनीक का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन यदि नागरिक थोड़ी सी जागरूकता दिखाएं तो ये ठग कभी सफल नहीं हो पाएंगे।“साइबर सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है।” — DIG विकास शर्मा

🔹 विशेष टिप्पणी कानून की आड़ में बढ़ता डिजिटल खतरा क्राइम इंडिया टीवी के विश्लेषण के अनुसार, यह अपराध इसलिए खतरनाक है क्योंकि यह विश्वसनीय संस्थाओं,अदालत और पुलिस की छवि का दुरुपयोग करता है। लोग जब “कोर्ट सम्मन” जैसे शब्द सुनते हैं, तो बिना जांचे-परखे डर में कोई भी कदम उठा लेते हैं। इसी मानसिकता का फायदा साइबर अपराधी उठाते हैं।

🔹 क्या करें अगर आप ठगी का शिकार हो गए हों

तुरंत बैंक या वॉलेट सेवा प्रदाता से संपर्क करें और ट्रांजेक्शन रोकें। संबंधित FIR नंबर या शिकायत ID को सुरक्षित रखें।साइबर पुलिस को पूरा चैट, कॉल रिकॉर्ड, ट्रांजेक्शन स्क्रिनशॉट प्रदान करें। सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा करें ताकि अन्य लोग सतर्क रहें।

🔹 राजस्थान में बढ़ रहे साइबर केस- आंकड़े भी कर रहे हैं आगाह राजस्थान पुलिस के हालिया आंकड़ों के अनुसार – पिछले एक वर्ष में साइबर ठगी के 17,000 से अधिक मामले दर्ज हुए। इनमें करीब 12% केस फर्जी नोटिस और वारंट से जुड़े पाए गए। जयपुर, जोधपुर, कोटा और अजमेर जैसे बड़े शहरों में यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है।

🔹 क्राइम इंडिया टीवी की अपील

“किसी अनजान कॉल, मैसेज या ईमेल पर भरोसा न करें।कानून की जानकारी रखें, डरें नहीं , सवाल पूछें और सत्यापन करें। फर्जी कोर्ट सम्मन और वारंट अब सिर्फ कागज नहीं, साइबर हथियार बन चुके हैं।इनसे बचने का एक ही उपाय है,जागरूकता, सतर्कता और तुरंत कार्रवाई।

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