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Mahashivratri: सभी मूरादें होती हैं पूरी, खुद बजरंग बली ने रखा था शिवलिंग,अर्धनारीश्वर रूप से सजे हाटकेश्वरनाथ

 Hatkeshwarnath mahadev Temple:  छत्तीसगढ़ के शिवालयों में महाशिवरात्रि का पर्व बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है।

Mahashivratri 2026; Hatkeshwarnath mahadev Temple:  छत्तीसगढ़ के शिवालयों में महाशिवरात्रि का पर्व बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सभी शिवालय आज शिवमय हुए हैं। रायपुर के शिव मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी हुई है। सुबह 3 बजे से ही लोगों की लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं। राजधानी के पूरे शिवालय हर-हर महादेव की जयघोष से गूंज रहे हैं। रायपुर के महादेवघाट स्थित हटकेश्वरनाथ मंदिर में महादेव को अर्धनारीश्वर रूप में श्रृंगार किया गया है। अर्धनारीश्वर का मनमोहनी रूप लोगों को लुभा रहा है।

महाशिवरात्रि पर भारी संख्या में शिवभक्तों की भीड़ उमड़ी। इस दौरान भगवान हटकेश्वरनाथ महादेव की मंत्रोच्चारण के बीच विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जा रही है। मंदिर परिसर के 500 मीटर दूर तक श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें लगी हुई है। सभी लोग दशर्न करने के लिये अपनी-अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। ‘ओम नम:शिवाय’ के जयकारें लग रहे हैं।

निकलेगी भगवान शिव की बारात
यहां पर भंडारे की भी व्यवस्था की गई है। वहीं शाम को भगवान शिव की बारात निकाली जायेगी। इस दौरान आकर्षक झांकी निकाली जायेगी। आयोजकगण झांकी निकालने की तैयारी में लगे हुए हैं। इसे अंतिम रूप दे रहे हैं। रायपुर सहित प्रदेश के कोने-कोने से पहुंचे लोग यहां के मनमोहक उद्यान और  लक्ष्मण झूले का आनंद ले रहे हैं। वहीं नौका विहार कर हर-हर महादेव के जयकारें लगा रहे हैं। महादेवघाट समेत रायपुर शहर का पूरा वातावरण शिवमय हुआ है।

लक्ष्मण झूला और नाव की सवारी आकर्षण का केंद्र 
हरिद्वार के लक्ष्मण झूला की तर्ज पर यहां बने लक्ष्मण झूला और खारून नदी में नाव की सवारी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। पास में बने गॉर्डन यहां की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। रायपुर सहित अन्य जिलों के सैलानी यहां बड़ी संख्या पहुंचकर इसका आनंद लेते हैं। शहर की जीवनदायिनी नदी ‘खारुन’ तट पर स्थित ऐतिहासिक हटकेश्वरनाथ मंदिर का विशेष महत्व है।

कल्चुरी राजाओं ने कराया था मंदिर का निर्माण
1402 ई में कल्चुरी वंश के राजा रामचंद्र के पुत्र ब्रह्मदेव राय के शासन काल में हाजीराज नाइक ने मंदिर का निर्माण करवाया था। ऐसी मान्यता है कि यहां नंदी महाराज के कानों में जो भक्त फरियाद या मन्नत मांगते हैं, उसकी भगवान शिव मुरादें जरूर पूरी करते हैं। सावन के महीने में यहां रायपुर और प्रदेश के कोने-कोने से लोग पहुंचते हैं। छत्तीसगढ़ के कई जिलों से श्रद्धालु कांवर लेकर पहुंचते हैं। हर साल कांवर पदयात्रा भी निकाली जाती है।

ये है धार्मिक मान्यता
धार्मिक मान्यताओं और पुराणों के अनुसार, जहां भगवान श्रीराम लंका पर चढ़ाई के लिए रामेश्वरम में समुंद्र पर पुल बनाने की योजना बनाई तो उस समय बजरंग बली को शिवलिंग लाने के लिए कहा गया था। इस पर बजरंग बली शिवलिंग लाने गए। इस दौरान शिवलिंग लाने में काफी देर हुई, तो भगवान राम ने रामेश्वरम में रेत से ही विधि-विधान से पूजा अर्चना कर शिवलिंग की स्थापना कर दी थी। बजरंग बली को किसी नदी के किनारे उस शिवलिंग को रखने के लिए कहा गया। कहा जाता है कि भगवान हनुमान ने रायपुर में खारून नदी के तट पर शिवलिंग रखकर चले गए, जो कालांतर में हटकेश्वर नाथ, महादेव घाट के  नाम से विख्यात हुआ।

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