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जोधपुर के चौखा से मौलवी अयूब, पीपाड़ से मसूद और सांचौर से उस्मान दबोचा!

विदेशी हवाला और आतंकी कनेक्शन की कड़ी — एजेंसियों ने जब्त किए मोबाइल, लैपटॉप और संदिग्ध दस्तावेज!

राजस्थान में NIA-ATS की ताबड़तोड़ कार्रवाई, जोधपुर-जालोर से 3 मौलवी गिरफ्तार — विदेशी फंडिंग और आतंकी कनेक्शन के आरोप

क्राइम इंडिया टीवी डिजिटल डेस्क /जोधपुर। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की संयुक्त टीम ने शुक्रवार तड़के राजस्थान में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस संयुक्त अभियान में सुरक्षा एजेंसियों ने जोधपुर और जालोर जिले से तीन मौलवियों को हिरासत में लिया है। शुरुआती इनपुट्स के अनुसार, इनका संबंध अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से होने की आशंका जताई जा रही है और इनके खातों में संदिग्ध विदेशी फंडिंग के प्रवाह के सबूत मिले हैं।

बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई गुप्त सूचनाओं और कई दिनों की निगरानी के बाद की गई। एजेंसियों को जानकारी मिली थी कि पश्चिमी राजस्थान में कुछ धार्मिक संस्थानों के जरिए विदेश से आए फंड का इस्तेमाल संदिग्ध गतिविधियों में किया जा रहा है। इसी सूचना के बाद जोधपुर, पीपाड़ और सांचौर इलाके में एक साथ छापेमारी की गई।

सूत्रों के मुताबिक, पकड़े गए मौलवियों में जोधपुर के अयूब, पीपाड़ के मसूद, और जालोर जिले के सांचौर निवासी उस्मान शामिल हैं। तीनों से पूछताछ के दौरान एजेंसियों ने कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, पासपोर्ट, बैंक डिटेल्स और संदिग्ध दस्तावेज जब्त किए हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि ये तीनों लंबे समय से आपसी संपर्क में थे और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए विदेशों में बैठे कुछ लोगों से लगातार बातचीत करते थे।

जोधपुर के चौखा इलाके से अयूब को उस वक्त पकड़ा गया जब वह नमाज के लिए मस्जिद की ओर जा रहा था। पीपाड़ का मौलवी मसूद शुरुआती सूचना मिलते ही अंडरग्राउंड हो गया था, लेकिन एटीएस टीम ने उसे देर रात एक मकान से दबोच लिया। वहीं, सांचौर के झेरडियावास मदरसे से मौलवी उस्मान को हिरासत में लिया गया।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, अलसुबह जब भारी पुलिस और एजेंसी टीमों ने इलाके को घेर लिया, तो पूरा माहौल तनावपूर्ण हो गया। कई गांवों में अफवाहों का दौर भी शुरू हो गया कि कहीं यह किसी बड़े आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा तो नहीं है।

सुरक्षा एजेंसियों ने अब तीनों मौलवियों को जोधपुर से जयपुर ट्रांसफर कर दिया है, जहां उनसे NIA और ATS की संयुक्त पूछताछ जारी है। एजेंसियों का मानना है कि इनके जरिए राजस्थान और गुजरात के सीमावर्ती इलाकों में चल रहे एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है।

राजस्थान पुलिस के उच्च अधिकारियों ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है लेकिन फिलहाल किसी आतंकी संगठन का नाम उजागर नहीं किया गया है। जांच एजेंसियां उनके बैंक खातों, विदेश यात्राओं और कॉल डिटेल्स को खंगाल रही हैं।

सूत्रों का कहना है कि अगर प्रारंभिक जांच में विदेशी फंडिंग और आतंकी संगठनों से संपर्क के ठोस सबूत मिलते हैं तो मामला UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) के तहत दर्ज किया जाएगा।

इस बीच जोधपुर और जालोर में सुरक्षा एजेंसियों ने मदरसों, धार्मिक स्थलों और एनजीओ के खातों की भी जांच शुरू कर दी है। सोशल मीडिया पर किसी तरह की अफवाह न फैले इसके लिए पुलिस ने साइबर सेल को अलर्ट पर रखा है।

स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी या अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखें।

यह कार्रवाई राजस्थान में पिछले एक साल में आतंकी गतिविधियों पर की गई सबसे बड़ी ऑपरेशनल स्ट्राइक मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस मामले में विदेशी फंडिंग और कट्टरपंथी नेटवर्क के लिंक साबित होते हैं तो यह पूरे पश्चिमी भारत के लिए सुरक्षा दृष्टि से बड़ा अलर्ट सिग्नल होगा।

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