हल की लकीरों पर चला हुक्मरानों का रास्ता, किसानों की मेहनत फिर कुचली गई।
काग़ज़ों की साजिश में ज़मीन रोती रही, फसलों पर चला विकास का कहर


बीज बोया था उम्मीद का, सड़क उग आई भ्रष्टाचार की,खेतों की मेड़ टूटी, अफसरों की नींद नहीं।
क्राइम इंडिया टीवी डिजिटल डेस्क! मनोज कुमार सोनी। दौसा/सिकराय| सड़क निर्माण कार्य में नियमों की खुली अनदेखी और सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि राजस्व विभाग की आवश्यक अनुमति, सीमांकन रिपोर्ट और उच्च स्तर की स्वीकृति के बिना ही सड़क निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। इससे न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि किसानों की खड़ी फसलों को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार सड़क निर्माण से पहले भूमि की प्रकृति (सरकारी या निजी), राजस्व रिकॉर्ड, सीमांकन और आपत्तियों की जांच अनिवार्य होती है, लेकिन इस प्रकरण में इन सभी नियमों को दरकिनार कर दिया गया। उपखंड अधिकारी द्वारा मौके की अंतिम जांच रिपोर्ट तैयार किए बिना ही कार्य को आगे बढ़ा दिया गया, जबकि पटवारी एवं राजस्व अमले की स्पष्ट रिपोर्ट भी उपलब्ध नहीं कराई गई।
पहले से मौजूद चालू रास्ता, फिर भी फसल रौंदकर नया निर्माण सवालो के घेरे में है, ग्रामीणों का आरोप है कि जिस स्थान पर नया रास्ता निकाला जा रहा है, वहां लगभग 25 वर्ष पूर्व ग्राम पंचायत द्वारा सीमांकन के बाद रास्ता बनाया गया था, जो आज भी सुचारू रूप से चालू है। इसके बावजूद प्रशासन ने खड़ी फसल को नुकसान पहुंचाकर समानांतर नया रास्ता बनाना शुरू कर दिया, जो भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
खातेदार ने लगाए आरोप
खातेदार सीताराम गुर्जर और मुकेश गुर्जर ने आरोप लगाया कि पटवारी अशोक कुमार की मौका रिपोर्ट और ऑनलाइन नक्शा ट्रेस के अनुसार प्रार्थी की फ्रंट भूमि 208 मीटर दर्शाई गई है, जबकि मौके पर नापतोल में यह कम पाई गई। रिपोर्ट के अनुसार पूर्व में बना रास्ता भी खातेदारी भूमि में ही आ रहा है। वहीं दूसरी ओर खसरा संख्या 628 चरागाह भूमि है, जबकि शेष मार्ग शीट में दर्शाया गया है।
पटवारी की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि खसरा संख्या 604 रिकॉर्ड में गैर मुमकिन रास्ता है, जिसकी चौड़ाई लगभग 4 मीटर है। 8 नवंबर 2024 को संबंधित हल्का पटवारियों द्वारा संयुक्त सीमांकन में 12 से 16 मीटर का अंतर सामने आया, जिसके बाद भू-प्रबंधन विभाग को सीमांकन हेतु पत्र लिखा गया। सवाल यह है कि क्या भू-प्रबंधन विभाग ने आज तक सीमांकन किया या नहीं?
हाईकोर्ट आदेश के बावजूद निर्माण पर सवाल मानपुर–सिकराय रोड स्थित प्रार्थी की व्यावसायिक भूमि पर हाईकोर्ट के स्थगन आदेश, सीमांकन लंबित होने और आपत्तियों के बावजूद खड़ी फसल के बीच नया रास्ता बनाना प्रशासनिक जल्दबाजी या दबाव की ओर संकेत करता है।
ग्राम पंचायत पर भी उठे सवाल खातेदार का कहना है कि लगभग 25 वर्ष पहले तत्कालीन सरपंच खैराती लाल बैरवा ने सीमांकन के बाद रास्ता बनवाया था। वर्ष 2014 में इसी रास्ते को ग्रेवल सड़क में बदला गया और 2022 में वर्तमान सरपंच गुलाब बैरवा ने इसी मार्ग का नवीनीकरण करवाया, जिस पर लाखों रुपए खर्च हुए।
अब सवाल यह है कि यदि पूर्व का रास्ता गलत जगह था तो उस पर बार-बार सरकारी धन क्यों खर्च किया गया? और यदि सही था, तो अब नया रास्ता बनाकर किसानों की फसल क्यों नष्ट की जा रही है?
इनका कहना है – पटवारी अशोक कुमार ने कहा कि वह उच्च अधिकारियों के आदेशों की पालना कर रहे हैं। जब उनसे सीमांकन रिपोर्ट को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने चुप्पी साध ली।
वर्तमान सरपंच गुलाब बैरवा ने इसे विभागीय त्रुटियों की का परिणाम बताया
और कहा कि संशोधन के लिए एसडीएम को आवेदन दिया गया है, लेकिन संशोधन से पहले ही निर्माण कार्य शुरू होने पर वह कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। अब जांच की मांग ग्रामीणों और खातेदारों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो, किसानों को मुआवजा दिया जाए और नियमों के विरुद्ध किए गए निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाई जाए।



