राजस्थान बस अग्निकांड: हादसे के पीछे एक वजह ये भी- साधारण बस को एसी गाड़ी में किया था तब्दील; जले थे जिंदा लोग

राजस्थान बस अग्निकांड: जैसलमेर की दर्दनाक त्रासदी
परिचय
2025 में राजस्थान के जैसलमेर जिले में एक भयावह बस अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। यह दुर्घटना न केवल यात्रियों के जीवन को तबाह करने वाली थी, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का भी खुलासा कर गई। इस दुर्घटना में दर्जनों लोग जिंदा जलकर मर गए और कई गंभीर रूप से घायल हुए। घटना ने बस परिवहन और सुरक्षा नियमों में गहरी चूक उजागर की।
घटना का समय और स्थान
यह हादसा जैसलमेर जिले की एक अंतरराज्यीय बस यात्रा के दौरान हुआ। घटना स्थल, जो आमतौर पर सुनसान रेगिस्तानी मार्गों में से एक है, पर बस के अचानक आग पकड़ने के कारण यात्रियों के लिए बच निकलना अत्यंत कठिन हो गया। रिपोर्ट के अनुसार, बस एक नॉन-एसी साधारण बस थी, जिसे अनधिकृत तरीके से एसी बस में परिवर्तित किया गया था।
बस का हाल और यात्रियों की स्थिति
घटना वाले दिन बस में लगभग 40–50 यात्री सवार थे। अधिकांश यात्री लंबी दूरी की यात्रा पर थे। बस के मालिक और ड्राइवर ने यात्रियों को विश्वास दिलाया था कि बस पूरी तरह सुरक्षित और एसी सुविधा वाली है। हालांकि, जांच में यह सामने आया कि बस को मूल रूप से एसी नहीं बनाया गया था और यह केवल मॉडिफिकेशन के जरिए एसी में तब्दील की गई थी।
अग्निकांड का कारण
जांच में पाया गया कि बस में अवैध इलेक्ट्रिकल वायरींग और पुराने इंजन पर एसी कंडीशनर की स्थापना की गई थी। इस कारण बस में आग लगने का खतरा पहले से ही मौजूद था। जैसे ही बस सड़क पर चल रही थी, अचानक इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट हुआ और बस में तेज आग लग गई। यात्रियों ने जैसे-तैसे खिड़कियों और दरवाजों से भागने की कोशिश की, लेकिन कई यात्री फंस गए।
यात्रियों की त्रासदी
आग इतनी तेज थी कि यात्रियों को बचने का समय नहीं मिल पाया। कई लोग अपने सीट बेल्ट में फंसे रहे या पास के दरवाजों तक नहीं पहुँच सके। यात्रियों की चीख-पुकार सुनकर स्थानीय लोग और कुछ वाहन चालक दौड़े, लेकिन आग इतनी भयंकर थी कि तुरंत मदद पहुंच पाना कठिन था। इस आग ने कई परिवारों का जीवन बदल कर रख दिया।
प्रारंभिक राहत कार्य
स्थानीय पुलिस और फायर ब्रिगेड ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। फायर ब्रिगेड की टीम ने आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक कई यात्रियों की मृत्यु हो चुकी थी। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, लेकिन कुछ गंभीर रूप से घायल यात्रियों ने अस्पताल में भी दम तोड़ दिया।
जांच में खुलासा
घटना के बाद राज्य परिवहन विभाग ने तुरंत जांच शुरू की। जांच के दौरान कई लापरवाहियों का पता चला:
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अवैध मॉडिफिकेशन: बस मूलतः नॉन-एसी थी, लेकिन मालिक ने इसे एसी बस में बदल दिया।
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सुरक्षा नियमों की अनदेखी: बस के अंदर आग बुझाने वाले उपकरण और आपातकालीन निकास की स्थिति जांच में उचित नहीं पाई गई।
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प्रवर्तन की कमी: परिवहन विभाग द्वारा समय-समय पर की जाने वाली निरीक्षण प्रक्रियाओं में गंभीर लापरवाही सामने आई।
जांच में यह भी पता चला कि बस के कुछ दस्तावेज और लाइसेंस आधिकारिक तौर पर सही नहीं थे।
अधिकारियों पर कार्रवाई
घटना के बाद राज्य सरकार ने तुरंत कार्रवाई की। दो वरिष्ठ अधिकारी को निलंबित कर दिया गया और भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो (ACB) ने इस मामले में भ्रष्टाचार और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की आशंका को लेकर जांच शुरू कर दी। अधिकारियों पर यह आरोप लगाया गया कि उन्होंने बस मालिक को नियमों से छूट दिलाई और सुरक्षा निरीक्षण में लापरवाही बरती।
सार्वजनिक प्रतिक्रिया और मीडिया कवरेज
इस त्रासदी ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। मीडिया ने घटना को प्रमुखता से कवरेज दी और कई विशेषज्ञों ने इसे बस परिवहन उद्योग में सुरक्षा मानकों की कमजोरी के रूप में उजागर किया। सोशल मीडिया पर परिवार और पीड़ितों के लिए सहायता अभियान शुरू हुए। लोगों ने सरकार से जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
पीड़ित परिवारों की आपबीती
पीड़ितों के परिवारों ने मीडिया को बताया कि उनका जीवन अब कभी पहले जैसा नहीं रहेगा। कई परिवारों ने दावा किया कि बस मालिक और संबंधित अधिकारी उनकी सुरक्षा के प्रति पूरी तरह गैरजिम्मेदार थे। उन्होंने राज्य सरकार से उचित मुआवजा और सुरक्षा सुधार की मांग की।
सरकारी सुधार और भविष्य की योजना
घटना के बाद राजस्थान सरकार ने राज्य में बस परिवहन सुरक्षा की समीक्षा शुरू कर दी। नए नियम लागू किए गए जिसमें सभी बसों की तकनीकी जांच, लाइसेंसिंग प्रक्रिया और आपातकालीन सुरक्षा उपकरणों का निरीक्षण अनिवार्य किया गया।
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सभी बसों को केवल प्रमाणित और लाइसेंसधारी तकनीशियनों द्वारा ही मॉडिफाई किया जा सकता है।
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यात्रियों की सुरक्षा के लिए हर बस में आग बुझाने वाले यंत्र और आपातकालीन निकास का होना अनिवार्य।
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परिवहन विभाग द्वारा प्रत्येक बस का त्रैमासिक निरीक्षण और अज्ञात स्थानों पर सैंपल जांच।
निष्कर्ष
जैसलमेर बस अग्निकांड केवल एक हादसा नहीं था, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा नियमों की अनदेखी का परिणाम था। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि यात्रियों की सुरक्षा को केवल कानूनी लाइसेंस और दस्तावेजों तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि वास्तविक सुरक्षा उपायों और नियमित निरीक्षण की भी आवश्यकता है।
इस त्रासदी ने पूरे देश को चेताया कि सुरक्षा कोई विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्यता है। बस मालिकों, अधिकारियों और यात्रियों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी यात्रा ऐसे खतरे में न पड़े।



