विवादित पोस्ट का असर: कांग्रेस नेत्री की गतिविधियों पर पार्टी ने लगाई तत्काल रोक।

सोशल मीडिया पोस्ट से उपजा बड़ा विवाद
आज के डिजिटल युग में एक पोस्ट कैसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है, इसका ताजा उदाहरण है युवा कांग्रेस की नेता प्रीति मांझी का विवाद। उन्होंने माओवाद के शीर्ष नाम हिड़मा की मौत पर “लाल सलाम कामरेड हिड़मा” लिखकर समर्थन जैसा संदेश दिया, जिससे विवाद गहराता चला गया।
संगठन की त्वरित प्रतिक्रिया
युवा कांग्रेस ने तुरंत इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी। साथ ही, जांच पूरी होने तक प्रीति मांझी को पद से दूरी बनाने का निर्देश दे दिया गया।
हिड़मा और उसकी भूमिका
माड़वी हिड़मा छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र का कुख्यात माओवादी नेता था। सुरक्षा बलों से उसके कई खूनी मुठभेड़ हुए। उस पर 1.80 करोड़ का इनाम भी घोषित था। उसकी मौत को लोकतंत्र की जीत बताया गया था।
आखिर विवाद क्यों?
एक सार्वजनिक प्रतिनिधि द्वारा हिंसा फैलाने वाले व्यक्ति को “कामरेड” कहकर संबोधित करना सुरक्षा एजेंसियों और राजनीतिक संगठनों के लिए गंभीर चिंता का विषय था। कई लोगों ने इसे माओवाद के प्रति सहानुभूति जताने की कोशिश माना।
सफाई और स्पष्टीकरण
विवाद बढ़ने पर प्रीति मांझी ने कहा कि वह किसी भी प्रकार की हिंसा का समर्थन नहीं करतीं और उनकी पोस्ट का गलत अर्थ निकाला गया। उन्होंने यह भी कहा कि वह गांधीवादी विचारधारा का पालन करती हैं।
राजनीतिक गर्माहट में इजाफा
विपक्ष ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी में ऐसे लोग सक्रिय हैं जो माओवाद का नैतिक समर्थन करते हैं। जवाब में कांग्रेस ने कहा कि पार्टी लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध है।
नैतिक और कानूनी प्रश्न
क्या एक राजनीतिक पदाधिकारी को इस तरह की टिप्पणी करनी चाहिए? सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उसकी सीमाओं पर यह मामला गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
स्थिति का भविष्य
अब सबकी निगाहें युवा कांग्रेस की जांच कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह रिपोर्ट ही तय करेगी कि पोस्ट गलती थी, विचार था या एक सियासी भूल।



