व्यापारियों में मचा हड़कंप, शंकर ऑयल मिल पर छापे के बाद कई बड़े कारोबारी अलर्ट।
टीम ने जब्त किए दर्जनों फाइलें और डिजिटल रिकॉर्ड, कई सालों के टैक्स लेनदेन की हो रही जांच।

हाईलाइट
शंकर ऑयल मिल पर सेल टैक्स और जीएसटी का संयुक्त छापा, फर्जी बिलिंग की गहराई से पड़ताल शुरू
सेल टैक्स और जीएसटी अधिकारियों की संयुक्त टीम ने मिलाया डेटा, आईटीसी क्लेम और बिक्री रिकॉर्ड में असंगतियां मिलीं
जनता के टैक्स से खिलवाड़ नहीं बर्दाश्त, विभाग ने कहा: “हर फर्जी लेनदेन पर होगी सख्त कार्रवाई”
हमारा कारोबार पारदर्शी है” रमेश भक्तानी ने दी सफाई, विभाग बोला ‘कागज़ों की जांच के बाद ही सच सामने आएगा।

अजमेर, गुरुवार सुबह। शहर के तेल व्यापार जगत में आज सनसनी फैल गई जब जयपुर और अजमेर की संयुक्त टैक्स टीम ने श्रीनगर रोड स्थित शंकर ऑयल मिल पर अचानक छापा मारा। यह मिल लंबे समय से तेल वितरण और थोक बिक्री के कारोबार में सक्रिय है। शुरुआती जांच में विभाग को बड़ी मात्रा में बिलिंग में गड़बड़ी और टैक्स चोरी की आशंका नजर आई है। सुबह करीब नौ बजे जब रमेश भक्तानी के निवास पर विभाग की गाड़ियां एक के बाद एक पहुंचीं, तो इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आस-पास के व्यापारी और स्थानीय लोग हैरानी से तमाशा देखते रहे। सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई जयपुर मुख्यालय से मिले गुप्त इनपुट के बाद की गई है।
जांच टीम ने मिल के दफ्तर, गोदाम और निवास के सभी हिस्सों को घेर लिया। अंदर पहुंचने के बाद अधिकारियों ने डिजिटल रिकॉर्ड, कंप्यूटर हार्ड ड्राइव, मोबाइल डेटा और बैंक ट्रांजैक्शन डिटेल्स को कब्जे में ले लिया। टीम ने मिल के कर्मचारियों और अकाउंटेंट से पूछताछ भी शुरू कर दी है।
बताया जा रहा है कि जांच में पिछले तीन सालों की बिक्री रसीदों और टैक्स रिटर्न की बारीकी से तुलना की जा रही है। शुरुआती रिकॉर्ड देखने के बाद ऐसा प्रतीत हो रहा है कि कई इनवॉइस ऐसे हैं जिनमें माल की आपूर्ति तो दिखाई गई, पर टैक्स का भुगतान नहीं हुआ।
एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि कुछ बिल “पेपर पर ट्रेडिंग” यानी केवल कागज़ों पर कारोबार के रूप में दर्ज हैं। इसका मतलब है कि बिना वास्तविक डिलीवरी के सिर्फ टैक्स लाभ लेने के लिए फर्जी बिल बनाए गए। इस पूरे ऑपरेशन की मॉनिटरिंग जयपुर से उच्च अधिकारियों द्वारा की जा रही है। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने बताया कि अभी जांच प्रारंभिक चरण में है और कई महत्वपूर्ण कागज़ात जब्त किए गए हैं।
उधर, अजमेर के व्यापारी वर्ग में यह चर्चा तेज़ है कि विभाग आने वाले दिनों में शहर के अन्य तेल व्यापारियों और संबंधित एजेंसियों पर भी इसी तरह की कार्रवाई कर सकता है। इससे कई कारोबारी सतर्क हो गए हैं और अपने रिकार्ड व्यवस्थित करने में जुट गए हैं।
जानकारी यह भी सामने आ रही है कि शंकर ऑयल मिल का नेटवर्क राजस्थान के कई जिलों तक फैला हुआ है और कई छोटे वितरक इसी चैन से जुड़े हैं। अगर जांच में गड़बड़ी साबित होती है, तो यह मामला राज्यस्तरीय टैक्स फ्रॉड की शक्ल ले सकता है।
कार्रवाई के दौरान विभागीय टीम ने मिल के गोदाम में रखे स्टॉक का फिजिकल वेरिफिकेशन किया। यहां तेल के कई टैंकर और पैकिंग ड्रम बरामद हुए जिनके टैक्स रिकॉर्ड से मेल नहीं मिले। अधिकारियों ने स्टॉक की फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग भी की है ताकि आगे सबूत के रूप में पेश किया जा सके। इस छापे की खबर मिलते ही आसपास के क्षेत्र में कारोबारी मंडी में सन्नाटा छा गया। कई व्यापारी अपने ऑफिस बंद कर कागजातों की जांच में लग गए। सोशल मीडिया पर भी इस छापे की तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं।
भक्तानी परिवार के करीबी सूत्रों का कहना है कि “हमारा सारा कारोबार वैध है, हमने हर टैक्स नियम का पालन किया है, विभाग को हर कागज़ दिया जा रहा है।” वहीं, विभागीय सूत्रों ने स्पष्ट किया कि “यदि सब कुछ सही है तो किसी को डरने की ज़रूरत नहीं।” विभाग अब खातों का फोरेंसिक ऑडिट कराने की तैयारी में है। इसमें पिछले वर्षों के बैंक स्टेटमेंट, कैश ट्रांजैक्शन और सप्लाई चेन डेटा की गहराई से जांच होगी।
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अजमेर और आसपास के छोटे व्यापारिक प्रतिष्ठान अभी भी पुरानी कागजी अर्थव्यवस्था में चल रहे हैं? क्या डिजिटल और पारदर्शी व्यापार के दौर में भी टैक्स चोरी के पुराने तरीके अपनाए जा रहे हैं?
स्थानीय व्यापार संघ ने भी विभाग से मांग की है कि कार्रवाई निष्पक्ष और पारदर्शी रखी जाए ताकि निर्दोष व्यापारियों को परेशानी न हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
अभी फिलहाल विभाग ने किसी भी अधिकारी या व्यापारी के खिलाफ औपचारिक रिपोर्ट जारी नहीं की है। लेकिन संकेत साफ हैं। आने वाले दिनों में यह जांच अजमेर ही नहीं, पूरे राजस्थान के तेल बाजार को हिला सकती है।



