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मतदान का उत्सव: बिहार ने रचा लोकतंत्र का नया इतिहास

सुबह की धूप जब मतदान केंद्रों की कतारों पर पड़ी, तो वह केवल रोशनी नहीं थी — वह लोकतंत्र की चमक थी। चेहरे पर उम्मीद, हाथ में पहचान पत्र और दिल में देशप्रेम लिए लोग अपने अधिकार का प्रयोग करने निकल पड़े।

बूढ़े कदमों की थिरकन में भी आज जोश था और युवाओं की निगाहों में भविष्य का सपना। महिलाएँ अपने बच्चों को साथ लाकर मतदान केंद्र पहुँचीं, मानो कह रही हों — “लोकतंत्र की यह परंपरा पीढ़ियों तक जीवित रहनी चाहिए।”

बिहार ने 67.14 प्रतिशत मतदान कर यह साबित किया कि जनशक्ति जब जागती है, तो इतिहास खुद को नया रूप देती है। सड़कों पर गहमागहमी थी, पर दिलों में शांति थी।

यह सिर्फ एक चुनाव नहीं था, यह जनता की आत्मा की पुकार थी — अपने बिहार के बेहतर कल की ओर एक कदम।

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