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दिल्ली धमाका कनेक्शन के बाद अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर प्रशासन की कड़ी नजर, जल्द गिरेंगे अवैध ढांचे।

ग्रामीणों का आरोप—हमारे रास्ते छीनकर बढ़ाया कैंपस, खेतों तक पहुंच हुई मुश्किल।

क्राइम इंडिया टीवी डिजिटल डेस्क। मनोज कुमार सोनी।

दिल्ली धमाके से जुड़े आतंकी मॉड्यूल के खुलासे के बाद अब अल-फलाह यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ बहुआयामी जांच तेज हो गई है। सुरक्षा एजेंसियों ने जहां आतंकियों के नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, वहीं जिला प्रशासन अब अवैध निर्माण और भूमि प्रबंधन से जुड़ी अनियमितताओं की बारीकी से जांच कर रहा है। माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद जल्द ही बुलडोजर की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।

प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यूनिवर्सिटी की ओर से नियमों की अनदेखी कर बड़े पैमाने पर निर्माण किए गए, जिनके लिए आवश्यक अनुमतियां नहीं ली गईं। कई महत्वपूर्ण फाइलें और रिकॉर्ड भी संदिग्ध पाए गए हैं, जिससे जांच एजेंसियों की शंका और गहरा गई है।

स्थानीय ग्रामीणों ने भी कई शिकायतें दी हैं। उनका आरोप है कि यूनिवर्सिटी विस्तार के नाम पर किसानों की जमीनों पर कब्जा किया गया। साथ ही, गांव के सदियों पुराने रास्तों को बंद कर दिया गया, जिससे कई परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई। कुछ बुजुर्ग ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासन की शह पर यूनिवर्सिटी ने अपनी मनमानी की, लेकिन अब सच सामने आने लगा है।

जमीन की पैमाइश में कई गड़बड़ियां मिली हैं। कई भवन ऐसे स्थानों पर बने पाए गए हैं जो मास्टर प्लान के अनुरूप नहीं हैं। इंजीनियरिंग, मेडिकल और हॉस्टलों के अतिरिक्त कई नई इमारतों के नक्शे तक मंजूर नहीं किए गए। यही वजह है कि कार्रवाई की तलवार इमारतों पर लटकने लगी है।

इसके अलावा, पर्यावरण से जुड़े कई नियमों का भी उल्लंघन सामने आया है। परिसर में मौजूद पेड़ों की कटाई, जलभराव की शिकायतें और ग्रीन बेल्ट में निर्माण के आरोप प्रशासन की निगाहों में हैं। गांव के कई सामाजिक संगठनों ने भी इस पर कड़ा विरोध जताया है।

सुरक्षा एजेंसियों के अंदेशे को देखते हुए परिसर में पुलिस बल भी तैनात किया गया है। किसी भी समय प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हो सकती है।

अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है और जो भी अवैध पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कदम उठाना तय है। दूसरी ओर यूनिवर्सिटी प्रबंधन का कहना है कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रहा है और राजनीतिक दबाव के चलते उनकी छवि खराब की जा रही है।

हालांकि, धमाके की घटना के बाद यूनिवर्सिटी को लेकर उठ रहे सवालों ने हाई-लेवल मॉनिटरिंग को मजबूती दी है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में प्रशासन क्या कदम उठाता है और कितनी इमारतें इस कार्रवाई की जद में आती हैं।

 

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