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भास्कर स्टिंग के बाद सियासी भूचाल, ऋतु बानावत ने मांगी CBI जांच

फर्जी डॉक्टर केस की यादें ताजा, पत्रकार की भूमिका फिर विवादों में

55 विधायकों के स्टिंग का दावा, सामने आए सिर्फ 3 नाम,बाकी 52 विधायकों पर चुप्पी क्यों? सवालों के घेरे में पत्रकार।


क्राइम इंडिया टीवी डिजिटल डेस्क। मनोज कुमार सोनी जयपुर भास्कर स्टिंग ऑपरेशन में नाम सामने आने के बाद बयाना विधायक ऋतु बानावत द्वारा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) जांच की मांग ने पूरे राजनीतिक और मीडिया जगत में भूचाल ला दिया है। इस मांग के बाद मामला सिर्फ विधायकों तक सीमित न रहकर स्टिंग करने वाले पत्रकार की भूमिका पर भी आकर टिक गया है।

सूत्रों के अनुसार यह स्टिंग ऑपरेशन करीब 7 महीने पहले किया गया था, लेकिन इतने लंबे समय तक इसे सार्वजनिक नहीं किया गया। इस देरी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं क्या इस दौरान किसी प्रकार के समझौते, सौदेबाजी या सेटलमेंट की कोशिश की जा रही थी? अगर स्टिंग जनहित में था, तो उसे तुरंत सामने क्यों नहीं लाया गया?

पत्रकार द्वारा दावा किया गया कि उसने करीब 55 विधायकों का स्टिंग किया है, लेकिन अब तक केवल 3 विधायकों के नाम ही उजागर हुए हैं। बाकी 52 विधायकों का खुलासा न होना संदेह को और गहरा कर रहा है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि चयनित खुलासे के पीछे बड़े आर्थिक लेन-देन की भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

इस पूरे प्रकरण ने पत्रकारिता की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप यह भी हैं कि स्टिंग के नाम पर दबाव बनाना, डर दिखाना और फिर समझौते की राह तलाशना कहीं न कहीं मीडिया की साख को नुकसान पहुंचा रहा है।

यह पहला मौका नहीं है जब उक्त पत्रकार विवादों में घिरा हो। इससे पहले चिकित्सा विभाग में फर्जी डॉक्टर प्रकरण सामने लाया गया था, जिसमें लगभग 14 डॉक्टर पकड़े गए। उस दौरान तत्कालीन चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर को लेकर भी दबाव और ब्लैकमेल के आरोप सामने आए थे, हालांकि राजनीतिक समर्थन के चलते मामला आगे नहीं बढ़ पाया।

अब सवाल सीधा है— अगर तीन विधायक दोषी हैं तो बाकी 52 पर चुप्पी क्यों?और अगर पत्रकार पूरी तरह ईमानदार है, तो स्वतंत्र CBI जांच से परहेज क्यों? जनता और लोकतंत्र के हित में यह आवश्यक हो गया है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी CBI जांच हो, ताकि दोषी चाहे विधायक हो या पत्रकार—कोई भी कानून से ऊपर न रह सके।

 

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