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IPS अधिकारी की भूमिका पर सवाल, निवेश छुपाने का आरोप।

जयपुर में करोड़ों की अवैध संपत्ति का दावा, दैनिक भास्कर के पत्रकार पर गंभीर आरोपों से मचा हड़कंप। 

जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर टिकी निगाहें, क्या खुलेगा करोड़ों की संपत्ति का राज?

मनोज कुमार सोनीजयपुर। राजधानी जयपुर में पत्रकारिता की साख पर सवाल खड़े करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। अधिवक्ता गोवर्धन सिंह ने दैनिक भास्कर से जुड़े पत्रकार एल पी पंत पर करोड़ों रुपये की कथित अवैध संपत्ति होने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि करीब 70 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले पत्रकार के पास जयपुर की एक पॉश बिल्डिंग में कई फ्लैट हैं।

गोवर्धन सिंह के अनुसार, इन संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज और साक्ष्य उनके पास मौजूद हैं। दैनिक भास्कर से जुड़े पत्रकार एल पी पंत को लेकर करोड़ों रुपये की कथित अवैध संपत्तियों का दावा किया गया है। आरोप है कि लगभग 70 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले इस पत्रकार के पास जयपुर की एक पॉश आवासीय बिल्डिंग में अनेक फ्लैट हैं, जिनकी कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि इन संपत्तियों से जुड़े ठोस दस्तावेज, निवेश से संबंधित कागजात और अन्य साक्ष्य उनके पास मौजूद हैं। आरोपों के अनुसार, एल पी पंत ने स्वयं यह स्वीकार किया है कि एक IPS अधिकारी का उनके नाम से निवेश किया गया है। यही नहीं, जयपुर सहित अन्य स्थानों पर कृषि भूमि, प्लॉट, फ्लैट, मकान और व्यावसायिक परिसरों में निवेश की बात भी सामने आई है।

मामले को और गंभीर बनाते हुए शिकायतकर्ता का दावा है कि पत्रकार द्वारा किए गए कथित “स्टिंग ऑपरेशनों” के माध्यम से बड़े पैमाने पर अवैध कमाई की गई, जिसका इस्तेमाल रियल एस्टेट और अन्य क्षेत्रों में निवेश के लिए किया गया। आरोप है कि यह कमाई घोषित आय और वेतन से कई गुना अधिक है, जो आयकर कानूनों और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जांच का विषय बनती है।

सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले की विस्तृत शिकायत दस्तावेजों सहित आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भेजी जा चुकी है। इसके अलावा किरोड़ी लाल मीणा, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी कथित अवैध संपत्तियों की सूची, निवेश का विवरण और संबंधित IPS अधिकारी का नाम भेजे जाने का दावा किया गया है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि जांच एजेंसियां निष्पक्ष तरीके से केवल संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन, बैंक लेन-देन और आय के स्रोतों की जांच कर लें, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि मीडिया की आड़ में प्रभाव और रसूख का इस्तेमाल कर अब तक कार्रवाई से बचा गया।

मामले में सबसे संवेदनशील पहलू कथित IPS अधिकारी की भूमिका को लेकर है। आरोप है कि अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए निवेश को किसी अन्य के नाम पर किया, ताकि संपत्ति और आय को छुपाया जा सके। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल आयकर या मनी लॉन्ड्रिंग तक सीमित न रहकर सेवा नियमों और भ्रष्टाचार निवारण कानूनों के तहत भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आएगा।

शिकायतकर्ता ने आम नागरिकों, बिल्डिंग के अन्य फ्लैट मालिकों और रियल एस्टेट से जुड़े लोगों से अपील की है कि यदि उनके पास एल पी पंत या उनसे जुड़ी किसी अन्य बेनामी अथवा अवैध संपत्ति की जानकारी हो, तो वे आयकर विभाग, ED या सीधे शिकायतकर्ता से संपर्क करें। उनका कहना है कि सामूहिक जानकारी के आधार पर ही इस कथित नेटवर्क का पूरा सच सामने आ सकता है।

फिलहाल इस पूरे मामले पर दैनिक भास्कर प्रबंधन, संबंधित पत्रकार एल पी पंत या आरोपों में घिरे IPS अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जांच एजेंसियों की ओर से भी अब तक सार्वजनिक रूप से किसी जांच या कार्रवाई की पुष्टि नहीं की गई है।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित एजेंसियां इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेती हैं और क्या कथित अवैध संपत्तियों की जांच वास्तव में ज़मीन पर उतरती है या मामला फाइलों में ही दबकर रह जाता है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल एक व्यक्ति बल्कि सिस्टम और मीडिया की भूमिका पर भी बड़े सवाल खड़े करेगा।

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